NGT ने संशोधित गंगा बाढ़-मैदान नियमों पर केंद्र से जवाब मांगाराजव्यवस्था और शासन

GS Paper 2 · 24 अगस्त 2026

NGT ने संशोधित गंगा बाढ़-मैदान नियमों पर केंद्र से जवाब मांगा

राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने गंगा संरक्षण ढांचे में संशोधन को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा है। याचिका में आरोप है कि नदी और उसकी सहायक नदियों के किनारे निर्माण-निषेध सुरक्षा हटाई गई तथा सक्रिय बाढ़-मैदान को 5 वर्ष में 1 बार आने वाली बाढ़ की वापसी-अवधि से परिभाषित किया गया, जिसका अर्थ किसी वर्ष में 20 प्रतिशत संभावना है। पीठ ने इन आरोपों को दर्ज किया है, उनके गुण-दोष पर निर्णय नहीं दिया। याचिका में पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, पुराने न्यायिक निर्णय और मूल अधिसूचना का उल्लेख है। अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को होगी।

यूपीएससी के लिए महत्व

GS Paper 2 में विशेष पर्यावरणीय न्यायाधिकरण, प्रत्यायोजित विधान और न्यायिक समीक्षा को समझें। GS Paper 3 में बाढ़-मैदान क्षेत्रीकरण को आपदा जोखिम न्यूनीकरण, नदी पारिस्थितिकी और सावधानीपूर्ण भूमि-उपयोग से जोड़ें।

इस खबर को कैसे पढ़ें

NGT की कार्यवाही एक सीमित विधिक प्रश्न के साथ व्यापक शासन परिणाम उठाती है। इस चरण पर अधिकरण ने जवाब मांगा है; उसने याचिका के आरोप स्वीकार नहीं किए और संशोधन रद्द नहीं किया। यह अंतर मुख्य परीक्षा उत्तर को लंबित मामले को अंतिम निर्णय बनाने से बचाता है। बाढ़-मैदान नियमों को मानव बसावट, नदी पारिस्थितिकी और आपदा जोखिम में संतुलन बनाना होता है। वापसी-अवधि वैज्ञानिक साधन है, लेकिन चुनी सीमा जोखिम का वितरण भी करती है। संकीर्ण सक्रिय क्षेत्र से बाहर भूमि दुर्लभ किंतु गंभीर बाढ़ झेल सकती है। इसलिए पारदर्शी जलवैज्ञानिक आंकड़े, नदी-बेसिन मानचित्र और सार्वजनिक कारण जरूरी हैं। प्रत्यायोजित विधान मूल पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम की सीमा में रहे और न्यायिक निर्देश का सम्मान करे। न्यायिक समीक्षा वैधता और प्रक्रिया जांच सकती है, पर लागू और व्यावहारिक क्षेत्र बनाना प्रशासन का प्राथमिक दायित्व है। मुआवजा, पुनर्वास, अनुमत उपयोग और निगरानी स्पष्ट हों, अन्यथा रोक मनमानी या अप्रभावी बन सकती है। UPSC में सावधानी सिद्धांत लागू करें, पर हर रोक को स्वतः सर्वोत्तम न मानें। अच्छा विनियमन समानुपाती, प्रमाण-आधारित और जलवायु तथा भूमि-उपयोग परिवर्तन के साथ समीक्षा योग्य होता है। अंतिम कसौटी जीवन-हानि, पारिस्थितिक क्षति और अनियोजित जोखिम में कमी है। निर्णय तक दोनों पक्ष के दावे रखें और आरोप को सिद्ध तथ्य न लिखें।

पेपर का व्यापक संदर्भ

GS-2 को जवाबदेह क्रियान्वयन से पढ़ें। विश्वसनीय स्वास्थ्य संचार निगरानी-प्रमाण को अफवाह से अलग करता है, पर्यावरणीय न्यायाधिकरण जांचता है कि कार्यपालिका के नियम विधिसम्मत और प्रमाण-आधारित हैं या नहीं, तथा डिजिटल कौशल को वास्तविक पहुंच-बाधाओं वाले शिक्षार्थियों तक पहुंचना चाहिए।

संभावित प्रश्न

बाढ़-मैदान विनियमन पर्यावरण, आपदा-प्रबंधन और विधि के शासन—तीनों का प्रश्न है। परीक्षण कीजिए।

त्वरित अभ्यास

  1. Q1

    इस चरण पर NGT ने क्या किया है?

    1. संशोधन अंतिम रूप से रद्द किया
    2. नया अधिनियम लिखा
    3. याचिका पर जवाब मांगा
    4. हर निर्माण मंजूर किया
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: याचिका पर जवाब मांगा

    अधिकरण ने जवाब मांगा है; गुण-दोष पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ।

  2. Q2

    बाढ़-मैदान क्षेत्रीकरण में जलवैज्ञानिक प्रमाण क्यों चाहिए?

    1. सार्वजनिक कारण हटाने के लिए
    2. हर अदालत बदलने के लिए
    3. बाढ़ रोकने की गारंटी के लिए
    4. भूमि रोक को वास्तविक जोखिम से जोड़ने के लिए
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: भूमि रोक को वास्तविक जोखिम से जोड़ने के लिए

    पारदर्शी जलवैज्ञानिक प्रमाण क्षेत्र को पारिस्थितिक और आपदा जोखिम के अनुरूप बनाता है।

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