अंतरराष्ट्रीय संबंधGS Paper 2 · 31 अगस्त 2026
भारत और उज्बेकिस्तान ने संवाद को क्रियान्वयन तंत्र से जोड़ते हुए साझेदारी उन्नत की
प्रधानमंत्री की 29–30 अगस्त 2026 की राजकीय यात्रा के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक उन्नत किया। परिणामों में विदेश मंत्रियों की अगुवाई वाला निगरानी तंत्र, व्यापार बाधाओं, महत्वपूर्ण खनिजों, डिजिटल प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य और शिक्षा पर सहयोग तथा वरीयतापूर्ण व्यापार समझौते के व्यवहार्यता अध्ययन पर आगे की कार्रवाई शामिल है। दोनों पक्षों ने 2026–30 के लिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम पर हस्ताक्षर किए, फयाज टेपा और कराटेपा के बौद्ध स्थलों के संरक्षण पर सहमति बनाई और अरल सागर क्षेत्र में वनीकरण के लिए भारत की USD 1 million सहायता घोषित की। एक भुगतान समझौता भारतीय UPI ऐप को उज्बेकिस्तान के UZQR व्यापारी कोड स्कैन करने योग्य बनाएगा। नीतिगत महत्व महाद्वीपीय सुरक्षा और संपर्क को कार्यशील संस्थाओं से जोड़ने में है। मध्य एशिया नीति तभी टिकाऊ होगी जब समझौतों की मंत्री-स्तरीय निगरानी हो, व्यापार बाधाएं सुलझें, डिजिटल प्रणालियां परस्पर जुड़ें और संपर्क संप्रभुता का सम्मान करे।
यूपीएससी के लिए महत्व
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 में भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों को मध्य एशिया नीति, रणनीतिक स्वायत्तता, आतंकवाद-रोधी सहयोग, संपर्क, महत्वपूर्ण खनिज, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और सांस्कृतिक कूटनीति से जोड़ें। शिखर घोषणा और जवाबदेह क्रियान्वयन तंत्र में अंतर स्पष्ट करें।
इस खबर को कैसे पढ़ें
भारत-उज्बेकिस्तान परिणाम बताता है कि मध्य एशिया नीति को एक साथ कई साधन चाहिए। सुरक्षा संवाद आतंकवाद और अस्थिरता पर सहयोग देता है, पर आर्थिक साझेदारी के लिए भरोसेमंद परिवहन, सरल भुगतान, नियामकीय समन्वय और व्यवहार्य परियोजनाएं जरूरी हैं। विदेश मंत्रियों के नेतृत्व वाला तंत्र शिखर इच्छा और विभागीय पालन के बीच अंतर घटा सकता है, क्योंकि वह क्रियान्वयन को राजनीतिक निगरानी देता है। डिजिटल भुगतान यात्रियों और कंपनियों की लागत घटा सकता है; महत्वपूर्ण खनिज और ऊर्जा सहयोग आपूर्ति विविध कर सकता है। फिर भी परियोजनाओं को पारदर्शी अनुबंध, साइबर सुरक्षा और वास्तविक वाणिज्यिक मांग चाहिए। बौद्ध स्थलों का संरक्षण, अभिलेखीय संबंध और छात्रवृत्ति लेन-देन से आगे टिकाऊ सामाजिक पूंजी बनाते हैं। अरल सागर क्षेत्र की सहायता कूटनीति को पारिस्थितिकी लोकहित से जोड़ती है, किंतु उसका परिणाम पौधों की जीवितता और स्थानीय भागीदारी से मापा जाना चाहिए। संपर्क को केवल मानचित्र की रेखा नहीं समझना चाहिए। अच्छा गलियारा संप्रभुता का सम्मान करता है, पूर्वानुमेय सीमा शुल्क देता है, वैकल्पिक मार्ग बनाता है और वास्तविक उपयोगकर्ता की जरूरत पूरी करता है। केंद्रीय प्रश्न यह है कि नया निगरानी तंत्र व्यापक साझेदारी को पूर्ण, मापनीय और पारस्परिक रूप से उपयोगी परिणाम में बदलता है या नहीं।
पेपर का व्यापक संदर्भ
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 में पूछें कि क्रियान्वयन का समन्वय कौन करता है, संघीय और निजी भागीदार अधिकार कैसे बांटते हैं और कौन-सा जवाबदेही तंत्र पारस्परिकता, समावेशन तथा सार्वजनिक उद्देश्य की रक्षा करता है।
संभावित प्रश्न
मध्य एशिया के साथ भारत के संबंधों का मूल्यांकन कूटनीतिक प्रतीकों से अधिक संस्थागत क्रियान्वयन पर होगा। भारत-उज्बेकिस्तान व्यापक रणनीतिक साझेदारी के संदर्भ में चर्चा कीजिए।
त्वरित अभ्यास
Q1
भारत-उज्बेकिस्तान समझौतों के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए कौन-सा नया तंत्र प्रस्तावित है?
- विदेश मंत्रियों के नेतृत्व वाला तंत्र
- साझा केंद्रीय बैंक
- एकल सीमा शुल्क संघ
- संयुक्त निर्वाचन आयोग
उत्तर देखें
सही उत्तर: विदेश मंत्रियों के नेतृत्व वाला तंत्र
दोनों नेताओं ने समन्वय और क्रियान्वयन निगरानी के लिए विदेश मंत्रियों के नेतृत्व वाला तंत्र स्वीकार किया।
Q2
कौन-सा परिणाम खुदरा भुगतान अंतर-संचालनीयता को सीधे आगे बढ़ाता है?
- विशेष आरक्षित मुद्रा
- नई समुद्री सीमा
- भारतीय UPI ऐप द्वारा UZQR व्यापारी कोड स्कैन करना
- साझा आयकर
उत्तर देखें
सही उत्तर: भारतीय UPI ऐप द्वारा UZQR व्यापारी कोड स्कैन करना
वाणिज्यिक समझौता भारतीय UPI ऐप को उज्बेकिस्तान के राष्ट्रीय QR स्वीकृति नेटवर्क से जोड़ता है।
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