BRICS शिखर सम्मेलन ने समावेशी वैश्विक शासन को प्रतिनिधित्व और क्रियान्वयन से जोड़ाअंतरराष्ट्रीय संबंध

GS Paper 2 · 14 सितम्बर 2026

BRICS शिखर सम्मेलन ने समावेशी वैश्विक शासन को प्रतिनिधित्व और क्रियान्वयन से जोड़ा

नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री ने 12 सितंबर 2026 को वैश्विक शासन मजबूत करने वाले सत्र की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि संकट का पहला प्रभाव अक्सर ग्लोबल साउथ पर पड़ता है, पर निर्णय में उसकी दूरी बनी रहती है। इसलिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सहित वैश्विक संस्थाओं में अधिक प्रतिनिधित्व की माँग रखी गई। संबोधन ने देशों को नियम मानने वाले से नियम बनाने में भागीदार बनने की दिशा बताई और BRICS तथा साझेदार देशों के राजनयिकों एवं नीति-निर्माताओं के प्रशिक्षण में भारतीय सहायता की पेशकश की। दुर्घटना, हिरासत या विदेश में संकट झेल रहे नाविकों के लिए सीफेरर्स इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क का प्रस्ताव भी दिया गया। नेताओं ने नई दिल्ली घोषणा स्वीकार की। ये कदम संस्थागत सुधार, क्षमता-निर्माण और व्यावहारिक सहयोग को एक साथ रखते हैं। फिर भी शिखर घोषणा अपने-आप मतदान अधिकार, सदस्यता या वित्त व्यवस्था नहीं बदलती। उसका महत्व वार्ता के बाद होने वाली कार्रवाई, स्पष्ट संस्थागत रचना और बड़े सदस्य समूह में उपयोगी सहमति बनाने पर निर्भर करेगा।

यूपीएससी के लिए महत्व

GS प्रश्नपत्र 2 में यह बहुपक्षीय संस्था सुधार, ग्लोबल साउथ प्रतिनिधित्व, BRICS विस्तार और सेतु-निर्माता के रूप में भारत की भूमिका से जुड़ता है। उत्तर में कार्यसूची और औपचारिक सुधार अलग करें तथा वैधता, सहमति, क्षमता-निर्माण, व्यावहारिक सहयोग और प्रभावशीलता जाँचें।

इस खबर को कैसे पढ़ें

प्रतिनिधित्व वैधता का प्रश्न है, जबकि प्रभावशीलता संस्थागत रचना का। अधिक प्रतिनिधि सुरक्षा परिषद वर्तमान शक्ति और प्रभावित क्षेत्रों को बेहतर दिखा सकती है, पर औपचारिक सुधार के लिए असमान हित और विशेषाधिकार वाले देशों की सहमति चाहिए। BRICS राजनीतिक दबाव बना सकता है, वार्ता रुख समन्वित कर सकता है और व्यावहारिक सहयोग से विकल्प दिखा सकता है; वह घोषणा द्वारा दूसरी संस्था का नियम नहीं बदल सकता। विस्तृत सदस्यता में लाभ और कठिनाई दोनों हैं: अधिक आवाज समावेशन बढ़ाती है, पर अलग रणनीतिक हित सहमति धीमी कर सकते हैं। राजनयिक प्रशिक्षण छोटी संस्थाओं की वह वार्ता क्षमता बढ़ा सकता है जिसके अभाव में वे तकनीकी नियम प्रभावित नहीं कर पातीं। प्रस्तावित नाविक नेटवर्क उपयोगी कसौटी है, क्योंकि उसमें संपर्क बिंदु, सत्यापित सूचना, वाणिज्य दूत समन्वय, आँकड़ा सुरक्षा और प्रतिक्रिया समय चाहिए। भारत को इसलिए नैतिक दावे के साथ मापनीय प्रस्ताव रखने चाहिए। Mains उत्तर में दो मार्ग दें: औपचारिक प्रतिनिधित्व सुधार आगे बढ़ाएँ और साथ-साथ पारदर्शी विषय-आधारित सार्वजनिक वस्तुएँ बनाएँ। प्रगति को केवल शिखर भाषा से नहीं, स्वीकृत प्रक्रिया, वित्तपोषित कार्यक्रम, प्रतिक्रिया परिणाम और टिकाऊ गठबंधन से मापें।

पेपर का व्यापक संदर्भ

GS प्रश्नपत्र 2 की कहानी को वैधता और क्रियान्वयन से पढ़ें: कम प्रतिनिधित्व वाले पक्ष, नियम बदल सकने वाली संस्था और औपचारिक सुधार के दौरान जवाबदेह सार्वजनिक वस्तु देने वाले BRICS तंत्र पहचानें।

संभावित प्रश्न

समावेशी वैश्विक शासन के लिए प्रतिनिधि संस्था और साझा सार्वजनिक वस्तु देने की क्षमता दोनों आवश्यक हैं। BRICS के संदर्भ में परीक्षण कीजिए।

त्वरित अभ्यास

  1. Q1

    BRICS शासन सत्र में भारत ने कौन-सी संस्थागत चिंता प्रमुखता से रखी?

    1. बड़े निर्णयों में ग्लोबल साउथ का कम प्रतिनिधित्व
    2. एक साझा BRICS मुद्रा स्वीकार हुई
    3. संयुक्त राष्ट्र चार्टर बदला गया
    4. सभी व्यापार बाधाएँ समाप्त हुईं
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: बड़े निर्णयों में ग्लोबल साउथ का कम प्रतिनिधित्व

    संबोधन में संकट का प्रभाव झेलने वाले ग्लोबल साउथ की निर्णय-प्रक्रिया में अपर्याप्त भागीदारी बताई गई।

  2. Q2

    व्यावहारिक सहयोग के लिए कौन-सा तंत्र प्रस्तावित हुआ?

    1. वैश्विक सीमा शुल्क संघ
    2. सीफेरर्स इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क
    3. साझा BRICS सेना
    4. स्थायी वस्तु मूल्य
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: सीफेरर्स इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क

    विदेश में संकट झेल रहे नाविकों की सहायता समन्वित करने के लिए नेटवर्क प्रस्तावित हुआ।

संबंधित अभ्यास प्रश्न

  • व्यापक प्रतिनिधित्व की माँग के बावजूद वैश्विक संस्था सुधार कठिन क्यों रहा है?
  • ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताएँ आगे बढ़ाने में BRICS से भारत के अवसर और सीमाएँ जाँचिए।
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