दिल्ली घोषणा ने शुष्कभूमि पुनरुद्धार को परियोजना से साक्ष्य तंत्र की ओर बढ़ायापर्यावरण और स्वास्थ्य

GS Paper 3 · 14 सितम्बर 2026

दिल्ली घोषणा ने शुष्कभूमि पुनरुद्धार को परियोजना से साक्ष्य तंत्र की ओर बढ़ाया

तीन-दिवसीय शुष्कभूमि कांग्रेस 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में दिल्ली घोषणा ऑन ड्रायलैंड्स, अर्थात 3D, के साथ समाप्त हुई। घोषणा ने दक्षिण-दक्षिण और त्रिकोणीय सहयोग, मजबूत साक्ष्य तथा आँकड़ा तंत्र, नीति के लिए दूरदृष्टि और शोध को भू-दृश्य तथा समुदाय से जोड़ने वाली जीवंत प्रयोगशालाओं पर बल दिया। सम्मेलन ने शुष्कभूमि को खाली या समान रूप से खराब क्षेत्र के बजाय उत्पादक सामाजिक-पारिस्थितिक तंत्र माना। उसने सरकार, वैज्ञानिक, संस्था और स्थानीय पक्षों के बीच साझेदारी का आह्वान भी किया। आधिकारिक विज्ञप्ति ने संबंधित पुरस्कारों के लिए 34 देशों से 170 नामांकन बताए; यह व्यापक रुचि दिखाता है, पुनरुद्धार परिणाम नहीं। शुष्कभूमि नीति महत्त्वपूर्ण है क्योंकि शुष्कता, अनिश्चित वर्षा, भूमि क्षरण और आजीविका असुरक्षा एक-दूसरे को बढ़ा सकते हैं। घोषणा अवधारणा और साझेदारी जोड़ सकती है, पर क्रियान्वयन स्थानीय आधार-रेखा, भूमि अधिकार, दीर्घकालीन वित्त और मिट्टी, जल, जैव-विविधता तथा घरेलू प्रत्यास्थता को साथ मापने वाली कसौटी पर निर्भर करेगा। समान वृक्षारोपण लक्ष्य चराई, खेती और साझा भूमि की विविधता नहीं समझेगा।

यूपीएससी के लिए महत्व

GS प्रश्नपत्र 3 में यह भूमि क्षरण, मरुस्थलीकरण, जलवायु अनुकूलन, टिकाऊ कृषि और अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण सहयोग से जुड़ता है। उत्तर में साक्ष्य तंत्र, स्थानीय संस्था, भू-अधिकार, वित्त, पारिस्थितिक उपयुक्तता और परिणाम-आधारित निगरानी जाँचें।

इस खबर को कैसे पढ़ें

शुष्कभूमि मौसम के साथ बदलती है और खेती, चराई, जैव-विविधता तथा गतिशील आजीविका को सहारा देती है। नीति विफलता तब शुरू होती है जब कम वृक्ष आवरण को अपने-आप क्षरण कहा जाए या भिन्न पारिस्थितिक तंत्र पर एक ही प्रतिरूप लगाया जाए। इसलिए साक्ष्य की शुरुआत पारदर्शी आधार-रेखा से हो: उस जीव-प्रदेश के अनुकूल वनस्पति, मिट्टी स्थिति, भूजल, कटाव, उत्पादकता, भू-अधिकार और आजीविका जोखिम। जीवंत प्रयोगशाला समुदाय के साथ उपाय आजमा, परिणाम तुलना और सुधार कर सकती है, बशर्ते वह सार्वजनिक आँकड़े के बिना छोटी पायलट परियोजना न बने। दक्षिण-दक्षिण सहयोग उपयोगी है क्योंकि कई देशों में गर्मी, जल और क्षमता की समान बाधाएँ हैं, पर तकनीक को स्थानीय बनाना होगा। त्रिकोणीय सहयोग वित्त या तकनीकी सहायता दे सकता है, जबकि स्थानीय संस्था का स्वामित्व रहे। पुनरुद्धार वितरण का प्रश्न भी है: साझा भूमि की बाड़ एक सूचक सुधार सकती है, पर पशुपालक को बाहर कर सकती है। सहमति, परंपरागत पहुँच और लाभ-वितरण पारिस्थितिक लक्ष्य के साथ हों। मजबूत डैशबोर्ड रोपण से आगे जीवितता, मिट्टी नमी, देशज विविधता, कम कटाव, आय परिवर्तन और पहुँच विवाद बताए। UPSC उत्तर में इसे विज्ञान, अधिकार और वित्त वाला क्रमिक शासन मानें, जिसमें स्वतंत्र मूल्यांकन और गलत हस्तक्षेप सुधारने की व्यवस्था हो।

पेपर का व्यापक संदर्भ

GS प्रश्नपत्र 3 की कहानियों को साक्ष्य और अंतिम-मील क्रियान्वयन से पढ़ें: उत्पादन तथा परिणाम अलग करें, विज्ञान या अवसंरचना को उपयोगकर्ता से जोड़ने वाली संस्था और प्रोत्साहन मानचित्रित करें तथा पारिस्थितिकी, सुरक्षा और समानता बचाएँ।

संभावित प्रश्न

शुष्कभूमि पुनरुद्धार को समान वृक्षारोपण कार्यक्रम के बजाय अनुकूलनशील भू-दृश्य शासन मानना चाहिए। चर्चा कीजिए।

त्वरित अभ्यास

  1. Q1

    दिल्ली शुष्कभूमि घोषणा ने किस पर बल दिया?

    1. साक्ष्य तंत्र और दक्षिण-दक्षिण सहयोग
    2. समान एकल-फसल लक्ष्य
    3. स्थानीय भागीदारी समाप्त करना
    4. सभी शुष्कभूमि खेती बदलना
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: साक्ष्य तंत्र और दक्षिण-दक्षिण सहयोग

    घोषणा ने साक्ष्य, दूरदृष्टि, जीवंत प्रयोगशाला और दक्षिण-दक्षिण या त्रिकोणीय सहयोग प्रमुख रखा।

  2. Q2

    शुष्कभूमि में समान वृक्षारोपण लक्ष्य अनुपयुक्त क्यों हो सकता है?

    1. हर शुष्कभूमि निर्जन है
    2. पारिस्थितिकी और आजीविका विविध हैं
    3. मिट्टी आँकड़ा कभी उपयोगी नहीं
    4. पुनरुद्धार को निगरानी नहीं चाहिए
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: पारिस्थितिकी और आजीविका विविध हैं

    अलग जीव-प्रदेश और आजीविका तंत्र को स्थानीय रूप से उपयुक्त उपाय चाहिए।

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