राष्ट्रीय नगरीय सम्मेलन ने सशक्त नगर सरकारों के संवैधानिक प्रश्न को फिर केंद्र में रखाराजव्यवस्था और शासन

GS Paper 2 · 26 अक्टूबर 2026

राष्ट्रीय नगरीय सम्मेलन ने सशक्त नगर सरकारों के संवैधानिक प्रश्न को फिर केंद्र में रखा

25 अक्टूबर 2026 को द्वितीय राष्ट्रीय नगरीय सम्मेलन में नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने पाँच वर्ष के कार्यकाल वाले प्रत्यक्ष निर्वाचित महापौर, महापौर-परिषद व्यवस्था, समय पर नगर चुनाव और 74वें संविधान संशोधन के अंतर्गत सूचीबद्ध सभी 18 कार्यों के हस्तांतरण का आह्वान किया। आधिकारिक विज्ञप्ति ने कमजोर नगर राजस्व, अनियमित राज्य वित्त आयोग, राज्यों से शहरों को कम राजकोषीय हस्तांतरण, प्रतिबंधात्मक नियोजन नियम और किफायती किराये के आवास की आवश्यकता भी रेखांकित की। इसमें भारत की नगरीय जनसंख्या लगभग 50 करोड़ से बढ़कर 2050 तक 85 करोड़ होने और 2014 के बाद नगरीय क्षेत्र का बजटीय परिव्यय दस गुना बढ़ने का अनुमान दिया गया। ये प्रस्ताव और आधिकारिक अनुमान हैं, पूर्ण सुधार नहीं। नगर सरकार राज्य विषय है; अतः टिकाऊ परिवर्तन के लिए राज्य कानून, कार्यों का वास्तविक आवंटन, कर्मचारी, वित्त और स्थानीय जवाबदेही चाहिए। इसलिए विषय केवल महापौर चुनने की पद्धति नहीं, संवैधानिक विकेंद्रीकरण और सार्वजनिक क्षमता है।

यूपीएससी के लिए महत्व

GS प्रश्नपत्र 2 में 74वें संविधान संशोधन को नगरीय स्थानीय निकाय, राज्य वित्त आयोग, राजकोषीय विकेंद्रीकरण, नियोजन और जवाबदेही से जोड़ें। प्रत्यक्ष चुनाव को पूर्ण सुधार मानने के बजाय कार्य, वित्त और कार्मिक—तीनों का मूल्यांकन करें।

इस खबर को कैसे पढ़ें

नगरीय शासन अधिकार, क्षमता और जवाबदेही की एक शृंखला है। प्रत्यक्ष निर्वाचित महापौर स्पष्ट जनादेश दे सकता है, किंतु कर्मचारियों, बजट या सौंपे गए कार्यों पर नियंत्रण के बिना वही जनादेश सेवा-प्रदान के बजाय टकराव पैदा कर सकता है। संवैधानिक ढाँचा नगर संस्थाओं की रचना में राज्यों को केंद्रीय भूमिका देता है; इसलिए कार्यकाल, शक्ति, वित्त और समानांतर एजेंसियों से संबंध में बहुत अंतर मिलता है। सुधार को स्पष्ट करना होगा कि भूमि-उपयोग की योजना कौन बनाएगा, जल और परिवहन कौन चलाएगा, राजस्व कौन जुटाएगा और सेवा विफल होने पर नागरिक को उत्तर कौन देगा। नियमित चुनाव लोकतांत्रिक निरंतरता बचाते हैं। वार्ड समितियाँ और सार्वजनिक प्रकटीकरण भागीदारी को मोहल्ले की समस्याओं के निकट ला सकते हैं। संपत्ति कर का बेहतर प्रशासन और न्यायसंगत उपयोग शुल्क अपने राजस्व को बढ़ाते हैं, जबकि पूर्वानुमेय हस्तांतरण तथा नियमित राज्य वित्त आयोग ऊर्ध्वाधर असंतुलन घटाते हैं। नियोजन में आवास, परिवहन, आजीविका, जलवायु जोखिम और अवसंरचना को एक साथ देखना चाहिए। पेशेवर नगर संवर्ग और विश्वसनीय स्थानीय आँकड़े क्रियान्वयन के लिए आवश्यक हैं। प्रत्यक्ष चुनाव के साथ परिषद की निगरानी, पारदर्शी खरीद, लेखा-परीक्षा, हित-संघर्ष नियम और स्पष्ट पदच्युति प्रक्रिया भी चाहिए। उत्तर में महापौर प्रस्ताव को व्यापक विकेंद्रीकरण पैकेज का एक विकल्प मानें। वास्तविक कसौटी यह है कि अधिकार, धन, कार्मिक और सार्वजनिक निगरानी उसी स्तर पर मिलें जहाँ नागरिक सेवा का अनुभव करता है।

पेपर का व्यापक संदर्भ

GS प्रश्नपत्र 2 में विकेंद्रीकरण और संसदीय कूटनीति को संस्थागत अधिकार, प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और अनुवर्ती कार्रवाई से पढ़ें। निर्वाचित पद या औपचारिक मंच तभी प्रभावी है जब नियम, संसाधन और निगरानी उसे कार्यशील क्षमता दें।

संभावित प्रश्न

सशक्त नगर सरकारों के लिए प्रत्यक्ष निर्वाचित महापौर से अधिक व्यापक सुधार आवश्यक हैं। 74वें संविधान संशोधन के आलोक में चर्चा कीजिए।

त्वरित अभ्यास

  1. Q1

    सार्थक नगर हस्तांतरण को कौन-सा संयोजन सबसे सही दर्शाता है?

    1. कार्य, वित्त और कार्मिक
    2. केवल नया भवन
    3. केवल चुनावी घोषणा
    4. केवल लंबा पदनाम
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: कार्य, वित्त और कार्मिक

    स्थानीय निकाय को सौंपा गया कार्य, उपयोग योग्य वित्त और सक्षम कार्मिक एक साथ चाहिए।

  2. Q2

    राज्य वित्त आयोग क्यों महत्त्वपूर्ण हैं?

    1. वे राष्ट्रीय चुनाव कराते हैं
    2. वे राज्य और स्थानीय निकाय के राजकोषीय संबंधों की समीक्षा करते हैं
    3. वे न्यायाधीश नियुक्त करते हैं
    4. वे विदेश व्यापार नियंत्रित करते हैं
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: वे राज्य और स्थानीय निकाय के राजकोषीय संबंधों की समीक्षा करते हैं

    ये आयोग स्थानीय सरकारों के साथ संसाधन बाँटने के सिद्धांत सुझाते हैं।

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