जनगणना 2027: केंद्र ने 40 प्रश्नों को मंजूरी दी, जाति और Aadhaar विवरण सूची में शामिलराजव्यवस्था और शासन

GS Paper 1 · 15 अगस्त 2026

जनगणना 2027: केंद्र ने 40 प्रश्नों को मंजूरी दी, जाति और Aadhaar विवरण सूची में शामिल

केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के लिए प्रश्नावली को मंजूरी दे दी है, जिसमें 40 प्रश्न शामिल हैं, जिनमें जाति की गणना और Aadhaar विवरण का संग्रह शामिल है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि दशकीय जनगणना 2021 से आगे विलंबित हो गई है, और जाति को शामिल करना साक्ष्य-आधारित सामाजिक न्याय नीतियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों के अनुरूप है। Aadhaar को जोड़ने से डेटा गोपनीयता और संघवाद संबंधी चिंताएँ उत्पन्न होती हैं। निहितार्थों में कल्याणकारी योजनाओं का बेहतर लक्ष्यीकरण शामिल है, लेकिन साथ ही व्यक्तिगत गोपनीयता और जाति गणना के संवैधानिक आधार पर बहसें भी शामिल हैं।

यूपीएससी के लिए महत्व

प्राथमिक GS-1 (जनसंख्या और संबंधित मुद्दे, सामाजिक मुद्दे – जाति)। द्वितीयक GS-2 (सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप, कल्याणकारी योजनाएँ)। भारतीय राजव्यवस्था – Article 246 के अंतर्गत जनगणना, NCERT Geography – Population, तथा Ram Ahuja द्वारा Social Problems in India से जुड़ता है।

इस खबर को कैसे पढ़ें

जनगणना 2027 की प्रश्नावली को मंजूरी मिलना केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं है; यह सामाजिक न्याय, संघवाद और डेटा गोपनीयता के बीच गहरे तनाव को सामने लाता है। जाति गणना को शामिल करना साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव है, क्योंकि दशकों से कल्याणकारी योजनाओं का लक्ष्यीकरण पुराने आंकड़ों पर निर्भर रहा है। परीक्षा की दृष्टि से, यह मुद्दा GS-1 के सामाजिक मुद्दों और GS-2 की शासन व्यवस्था दोनों को जोड़ता है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि जनगणना का संवैधानिक आधार Article 246 के अंतर्गत संघ सूची में है, जबकि जाति आधारित आरक्षण और कल्याण राज्य सूची से जुड़े हैं। यह विभाजन संघीय विवाद का केंद्र बन सकता है। Aadhaar विवरण का संग्रह गोपनीयता के अधिकार से टकराता है, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने मौलिक अधिकार माना है। छात्रों को यह समझना चाहिए कि जनगणना का डेटा नीति निर्माण का आधार है, लेकिन इसका दुरुपयोग सामाजिक विभाजन को गहरा सकता है। मुख्य परीक्षा में इस विषय पर संतुलित दृष्टिकोण अपेक्षित है: जाति गणना से समावेशी विकास संभव है, परंतु गोपनीयता और सामाजिक सद्भाव के जोखिमों का आकलन आवश्यक है। यह मुद्दा पिछले वर्षों के प्रश्नों से भिन्न है, क्योंकि यहाँ तकनीकी डेटा संग्रह और सामाजिक न्याय का अंतर्संबंध नया है।

पेपर का व्यापक संदर्भ

आज GS Paper 1 के तीनों आइटम—जनगणना 2027, El Niño और विभाजन स्मृति दिवस—एक ही धागे से बंधे हैं: जनसंख्या, जलवायु और इतिहास की स्मृति। परीक्षक यहाँ सामान्य विवरण नहीं, बल्कि आँकड़ों के पीछे की नीतिगत मंशा और सामाजिक प्रभाव पूछता है। जाति गणना को लेकर संवैधानिक आधार और गोपनीयता की चिंता, El Niño के मानसून पर प्रभाव की क्रियाविधि, और विभाजन की मानवीय कीमत—इन तीनों में ‘क्यों’ और ‘कैसे’ पर जोर दें।

संभावित प्रश्न

जनगणना 2027 में जाति गणना और Aadhaar विवरण का संग्रह साक्ष्य-आधारित सामाजिक न्याय नीतियों और व्यक्तिगत गोपनीयता के बीच किस संतुलन की माँग करता है? Article 246 के अंतर्गत जनगणना की संवैधानिक स्थिति इस बहस को कैसे प्रभावित करती है?

त्वरित अभ्यास

  1. Q1

    जनगणना 2027 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्रश्नावली में 40 प्रश्न शामिल हैं। 2. जाति गणना को शामिल किया गया है। 3. Aadhaar विवरण का संग्रह नहीं किया जाएगा। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. केवल 1 और 2
    2. केवल 2 और 3
    3. केवल 1 और 3
    4. 1, 2 और 3
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: केवल 1 और 2

    स्रोत के अनुसार, जनगणना 2027 की प्रश्नावली में 40 प्रश्न हैं, जिनमें जाति की गणना और Aadhaar विवरण का संग्रह शामिल है। अतः कथन 1 और 2 सही हैं, जबकि कथन 3 गलत है क्योंकि Aadhaar विवरण संग्रह किया जाएगा।

  2. Q2

    जनगणना 2027 में जाति गणना को शामिल करने का मुख्य उद्देश्य क्या है?

    1. केवल जनसंख्या वृद्धि दर का आकलन
    2. साक्ष्य-आधारित सामाजिक न्याय नीतियों का निर्माण
    3. केवल शहरीकरण के स्तर का मापन
    4. केवल साक्षरता दर की गणना
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: साक्ष्य-आधारित सामाजिक न्याय नीतियों का निर्माण

    स्रोत में स्पष्ट किया गया है कि जाति को शामिल करना साक्ष्य-आधारित सामाजिक न्याय नीतियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों के अनुरूप है। इसका उद्देश्य कल्याणकारी योजनाओं का बेहतर लक्ष्यीकरण करना है, न कि केवल जनसंख्या या साक्षरता का आकलन।

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