GS Paper 2 · 15 अगस्त 2026
राजस्थान समान नागरिक संहिता की ओर: लिव-इन संबंधों के प्रावधानों के साथ UCC विधेयक का मसौदा मंजूर
राजस्थान मंत्रिमंडल ने समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक का मसौदा मंजूर कर लिया है, जिसमें लिव-इन संबंधों के पंजीकरण का प्रावधान शामिल है। यह मुख्य रूप से उत्तराखंड जैसी समान राज्य-स्तरीय पहलों के बाद है और Article 44 के इर्द-गिर्द संवैधानिक बहस को फिर से हवा देता है। इस कदम का व्यक्तिगत विधियों, लैंगिक न्याय और एकरूपता तथा धार्मिक विविधता के बीच संतुलन पर प्रभाव पड़ता है। विधेयक के विधानसभा में पेश किए जाने के बाद कानूनी जांच और सर्वोच्च न्यायालय में चुनौतियों की संभावना है।
यूपीएससी के लिए महत्व
प्राथमिक GS-2: भारतीय संविधान, राज्य के नीति निदेशक तत्व (Article 44), मौलिक अधिकार बनाम नीति निदेशक तत्व, संघवाद, व्यक्तिगत विधियाँ। द्वितीयक GS-1: सामाजिक मुद्दे, एकरूपता बनाम विविधता। GS-4: लैंगिक न्याय और सांस्कृतिक स्वायत्तता के नैतिक आयाम। स्थैतिक संबंध: Laxmikanth में राज्य के नीति निदेशक तत्व (Article 44) और मौलिक अधिकार (Articles 14, 15, 25) पर अध्याय; Ramesh Singh में सामाजिक न्याय पर अध्याय।
इस खबर को कैसे पढ़ें
राजस्थान का यह मसौदा केवल एक और राज्य-स्तरीय विधेयक नहीं है; यह Article 44 की व्याख्या के इर्द-गिर्द घूमती संवैधानिक बहस को नई दिशा देता है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि लिव-इन संबंधों के पंजीकरण का प्रावधान जोड़कर राज्य ने UCC को केवल विवाह और उत्तराधिकार तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे पारिवारिक संबंधों के व्यापक दायरे में ले गया। यह कदम Article 14 और Article 15 के समानता के वादे को साकार करने का दावा करता है, परंतु Article 25 के धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार से टकराव की संभावना पैदा करता है। परीक्षा की दृष्टि से यह मामला मौलिक अधिकारों और नीति निदेशक तत्वों के बीच संतुलन का जीवंत उदाहरण है। संघवाद का कोण भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। उत्तराखंड के बाद राजस्थान का यह कदम दर्शाता है कि राज्य स्तर पर UCC लागू करने की होड़ संवैधानिक एकरूपता के विचार को चुनौती दे सकती है। यदि प्रत्येक राज्य अपनी अलग संहिता बनाता है, तो क्या Article 44 का उद्देश्य पूरा होगा? यह प्रश्न संघ सूची और समवर्ती सूची के विधायी क्षेत्रों पर बहस को जन्म देता है। सर्वोच्च न्यायालय में संभावित चुनौतियाँ इस बात की परीक्षा लेंगी कि क्या राज्य विधानमंडल व्यक्तिगत विधियों के क्षेत्र में प्रवेश कर सकता है। लैंगिक न्याय का पक्ष भी उतना ही जटिल है। UCC के समर्थक इसे महिलाओं के अधिकारों की समानता का माध्यम मानते हैं, जबकि आलोचक इसे धार्मिक अल्पसंख्यकों की सांस्कृतिक स्वायत्तता पर आघात बताते हैं। राजस्थान का मसौदा इस द्वंद्व को सुलझाने के बजाय और गहरा करता है, क्योंकि लिव-इन संबंधों का पंजीकरण सामाजिक रूढ़िवादिता और आधुनिकता के बीच एक नई बहस छेड़ता है। उम्मीदवारों को चाहिए कि वे इस मुद्दे को केवल कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक-नैतिक दृष्टि से भी देखें।
पेपर का व्यापक संदर्भ
GS Paper 2 में आज का समूह संवैधानिक निकायों और नीति निदेशक तत्वों की परीक्षा है। सुप्रीम कोर्ट का प्रकाश सिंह निर्देशों की पुनः पुष्टि करना, CAG की रिपोर्ट और राजस्थान का UCC विधेयक—तीनों ही Article 148, Article 44 और संघीय ढाँचे के इर्द-गिर्द घूमते हैं। यहाँ सबसे बड़ा जाल है सतही उत्तर: केवल ‘सुप्रीम कोर्ट ने कहा’ या ‘CAG ने पाया’ लिखने के बजाय यह बताना होगा कि ये निर्णय शक्तियों के पृथक्करण और जवाबदेही की शृंखला में कहाँ बैठते हैं।
संभावित प्रश्न
राजस्थान का UCC विधेयक, जिसमें लिव-इन संबंधों का पंजीकरण शामिल है, Article 44 के नीति निदेशक स्वरूप और मौलिक अधिकारों के बीच किस संवैधानिक तनाव को सामने लाता है? क्या राज्य-स्तरीय पहल संघीय ढाँचे में एकरूपता और विविधता के संतुलन को बदल सकती है?
त्वरित अभ्यास
Q1
राजस्थान के UCC विधेयक के मसौदे के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह विधेयक Article 44 को मौलिक अधिकार के रूप में लागू करता है। 2. इसमें लिव-इन संबंधों के पंजीकरण का प्रावधान शामिल है। 3. यह विधेयक संसद द्वारा पारित किया जाएगा। उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 2
- केवल 1 और 3
- केवल 2 और 3
उत्तर देखें
सही उत्तर: केवल 2
राजस्थान मंत्रिमंडल ने UCC विधेयक का मसौदा मंजूर किया है, जिसमें लिव-इन संबंधों के पंजीकरण का प्रावधान है। Article 44 राज्य के नीति निदेशक तत्व का हिस्सा है, मौलिक अधिकार नहीं, इसलिए कथन 1 गलत है। यह विधेयक राज्य विधानसभा में पेश किया जाएगा, संसद में नहीं, इसलिए कथन 3 गलत है।
Q2
राजस्थान के UCC विधेयक के मसौदे के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा संवैधानिक प्रावधान सबसे अधिक प्रासंगिक है?
- Article 14
- Article 15
- Article 25
- Article 44
उत्तर देखें
सही उत्तर: Article 44
Article 44 राज्य को समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का निर्देश देता है, इसलिए यह सबसे प्रासंगिक है। Article 14 और Article 15 समानता से संबंधित हैं, और Article 25 धार्मिक स्वतंत्रता से, लेकिन UCC का सीधा संवैधानिक आधार Article 44 है।
संबंधित विगत वर्ष प्रश्न
- GS-2 2017: उन संभावित कारकों की चर्चा कीजिए जो भारत को समान नागरिक संहिता लागू करने से रोकते हैं।
- GS-1 2015: भारतीय धर्मनिरपेक्षता के संदर्भ में समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर बहस कीजिए।