GS Paper 2 · 17 अगस्त 2026
भारत-बांग्लादेश तनाव: शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर अदालतें फैसला करेंगी; बातचीत की दिशा बदलने की कोशिश
भारत ने संकेत दिया है कि बांग्लादेश के पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण अनुरोध पर अदालतें निर्णय करेंगी। इसके साथ ही, दिल्ली और ढाका कथित तौर पर कूटनीतिक ठंडापन कम करने के लिए काम कर रहे हैं, जिसके तहत बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के किसी सलाहकार की संभावित यात्रा शामिल है। इस स्थिति में जटिल कानूनी, कूटनीतिक और मानवीय आयाम हैं। यह भारत की विधि के शासन के प्रति प्रतिबद्धता और एक प्रमुख पड़ोसी के साथ उसके द्विपक्षीय संबंधों की परीक्षा है।
यूपीएससी के लिए महत्व
प्राथमिक GS-2 अंतर्राष्ट्रीय संबंध (भारत-बांग्लादेश द्विपक्षीय संबंध, प्रत्यर्पण); द्वितीयक GS-2 शासन/विधिक ढाँचा। यह भारत के प्रत्यर्पण कानूनों, पड़ोसी प्रथम नीति और बांग्लादेश में घरेलू राजनीतिक स्थिरता से जुड़ता है। Laxmikanth (Indian Polity) के विदेश नीति और अंतर्राष्ट्रीय संबंध अध्याय से प्रासंगिक।
इस खबर को कैसे पढ़ें
इस मामले में परीक्षार्थी को केवल घटना नहीं, बल्कि प्रक्रिया समझनी चाहिए। भारत का यह कहना कि प्रत्यर्पण पर अदालतें निर्णय करेंगी, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों के विभाजन को दर्शाता है। प्रत्यर्पण अधिनियम के अंतर्गत न्यायालय प्रथम दृष्टया जाँच करता है कि अपराध प्रत्यर्पणीय है या नहीं, तत्पश्चात केंद्र सरकार अंतिम आदेश देती है। यहाँ सरकार ने न्यायिक प्रक्रिया को आगे रखकर कूटनीतिक दबाव को कानूनी ढाँचे में समाहित करने का प्रयास किया है। दूसरा पक्ष द्विपक्षीय संबंधों का है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के सलाहकार की संभावित यात्रा से संकेत मिलता है कि दोनों देश संवाद जारी रखना चाहते हैं। यह भारत की 'पड़ोसी प्रथम' नीति की परीक्षा है, क्योंकि एक ओर कानूनी प्रक्रिया का पालन और दूसरी ओर रणनीतिक हितों का संतुलन आवश्यक है। परीक्षा की दृष्टि से यह विषय GS-2 में अंतर्राष्ट्रीय संबंध और शासन दोनों खंडों को जोड़ता है। प्रत्यर्पण संधि का अभाव या उपस्थिति, न्यायिक समीक्षा का दायरा, और मानवीय आधार पर अस्वीकृति के प्रावधान — ये सभी बिंदु उत्तर में विश्लेषण की गहराई ला सकते हैं। अभ्यर्थी को चाहिए कि वह केवल तथ्य न लिखे, बल्कि यह बताए कि यह मामला भारत की विधि के शासन की प्रतिबद्धता को किस प्रकार प्रदर्शित करता है और क्षेत्रीय स्थिरता पर इसका क्या प्रभाव पड़ सकता है।
पेपर का व्यापक संदर्भ
आज GS-2 में चार अलग-अलग संस्थाएँ हैं—राज्य सरकार, न्यायालय, सांविधिक निकाय और अंतर्राष्ट्रीय वार्ता—लेकिन सबका साझा धागा है 'विनियामक अतिक्रमण बनाम स्वायत्तता'। प्रत्यर्पण में न्यायिक प्रक्रिया, BCI बनाम NALSAR, और FSSAI की अनुपालन कार्रवाई—तीनों में संस्थागत सीमाओं का प्रश्न है।
संभावित प्रश्न
शेख हसीना के प्रत्यर्पण में न्यायालयों की भूमिका को रेखांकित करना भारत की विधि-प्रतिबद्धता दर्शाता है, लेकिन क्या यह पड़ोसी प्रथम नीति के तहत कूटनीतिक लचीलेपन को सीमित करता है?
त्वरित अभ्यास
Q1
भारत-बांग्लादेश प्रत्यर्पण मामले के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत ने कहा है कि शेख हसीना के प्रत्यर्पण अनुरोध पर अदालतें निर्णय करेंगी। 2. बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के किसी सलाहकार की भारत यात्रा की संभावना है। 3. भारत और बांग्लादेश के बीच कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर देखें
सही उत्तर: केवल 1 और 2
स्रोत में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि भारत ने संकेत दिया है कि प्रत्यर्पण अनुरोध पर अदालतें निर्णय करेंगी (कथन 1 सही) और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के सलाहकार की संभावित यात्रा शामिल है (कथन 2 सही)। कथन 3 स्रोत में नहीं दिया गया है, इसलिए उसे सही नहीं माना जा सकता।
Q2
भारत-बांग्लादेश तनाव के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा आयाम स्रोत में उल्लिखित है?
- केवल कानूनी
- केवल कूटनीतिक
- कानूनी, कूटनीतिक और मानवीय
- केवल मानवीय
उत्तर देखें
सही उत्तर: कानूनी, कूटनीतिक और मानवीय
स्रोत में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इस स्थिति में जटिल कानूनी, कूटनीतिक और मानवीय आयाम हैं। अतः विकल्प (c) सही है।
संबंधित विगत वर्ष प्रश्न
- GS-2 2016: भारत-बांग्लादेश संबंध और उनके सीमा मुद्दे
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