GS Paper 3 · 17 अगस्त 2026
NASA ने ISRO को Artemis चंद्र चौकी कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया; भारत का चंद्र भविष्य केंद्र में
NASA ने ISRO को अपने Artemis चंद्र कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है, जिसका उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के समीप मानव चौकी स्थापित करना है। यह स्थान लंबी सूर्य रोशनी तथा स्थायी रूप से छाया वाले गड्ढों में जल बर्फ के कारण महत्वपूर्ण है। भारत की भागीदारी से उसकी अंतरिक्ष क्षमताओं, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और प्रौद्योगिकीय विकास को बल मिलेगा। इसका भारत के अपने चंद्र मिशनों और अंतरिक्ष कूटनीति में रणनीतिक स्थिति पर प्रभाव पड़ेगा। यह निर्णय भारत के दीर्घकालिक अंतरिक्ष अन्वेषण रोडमैप को आकार देगा।
यूपीएससी के लिए महत्व
प्राथमिक GS-3 विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष अन्वेषण; द्वितीयक GS-2 अंतरराष्ट्रीय संबंध। यह भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम, Chandrayaan मिशनों, Artemis Accords और भारत-अमेरिका अंतरिक्ष सहयोग से जुड़ा है। संबंधित पाठ्यपुस्तक अध्याय: भारतीय भूगोल/अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, तथा विज्ञान में अंतरराष्ट्रीय सहयोग।
इस खबर को कैसे पढ़ें
यह समाचार केवल एक निमंत्रण नहीं, बल्कि भारत की अंतरिक्ष कूटनीति और तकनीकी क्षमता की परीक्षा है। Artemis कार्यक्रम में शामिल होने का अर्थ है चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के समीप मानव चौकी स्थापित करने की बहुपक्षीय परियोजना में भागीदारी। यह स्थान लंबी सूर्य रोशनी और स्थायी रूप से छाया वाले गड्ढों में जल बर्फ के कारण रणनीतिक महत्व रखता है। भारत के लिए यह अवसर Chandrayaan मिशनों से अर्जित अनुभव को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का है। परीक्षा की दृष्टि से देखें तो यह विषय GS-3 के अंतर्गत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में अंतरिक्ष अन्वेषण और GS-2 में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बीच सेतु का कार्य करता है। प्रश्न संभवतः Artemis Accords के संदर्भ में भारत की स्थिति, चंद्र दक्षिणी ध्रुव के वैज्ञानिक महत्व, तथा भारत-अमेरिका अंतरिक्ष साझेदारी के आर्थिक और सामरिक आयामों पर केंद्रित हो सकते हैं। मुख्य परीक्षा में उत्तर लिखते समय ध्यान रखें कि भागीदारी के लाभ—प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, मानव अंतरिक्ष उड़ान अनुभव, गहन अंतरिक्ष संचार नेटवर्क तक पहुंच—के साथ चुनौतियाँ भी जुड़ी हैं: बौद्धिक संपदा साझाकरण, लागत वहन, तथा स्वदेशी कार्यक्रमों की प्राथमिकता। संतुलित विश्लेषण में यह स्पष्ट करें कि भारत का अपना चंद्र रोडमैप किस प्रकार Artemis के साथ समन्वय या टकराव की स्थिति में होगा। अंत में, यह घटनाक्रम भारत की अंतरिक्ष नीति में 'सहयोग के साथ आत्मनिर्भरता' के सिद्धांत को रेखांकित करता है। अभ्यर्थी को चाहिए कि वह Artemis कार्यक्रम के उद्देश्यों, चंद्र दक्षिणी ध्रुव की विशेषताओं, तथा भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं के बीच तार्किक संबंध स्थापित करते हुए उत्तर प्रस्तुत करे।
पेपर का व्यापक संदर्भ
GS-3 के चारों मद एक ही आर्थिक-सुरक्षा स्पेक्ट्रम पर हैं: उर्वरक सब्सिडी का वितरण संकट, सीमा पार डिजिटल भर्ती, और चंद्र चौकी में तकनीकी सहयोग। सामान्य गलती यह है कि अभ्यर्थी इन्हें अलग-अलग 'टॉपिक' मानकर रट लेते हैं, जबकि परीक्षक चाहता है कि आप आपूर्ति श्रृंखला, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष कूटनीति को एक ही राष्ट्रीय क्षमता निर्माण के आयाम के रूप में देखें।
संभावित प्रश्न
NASA के Artemis कार्यक्रम में भारत का आमंत्रण चंद्र अन्वेषण में रणनीतिक साझेदारी का अवसर है, परंतु क्या यह भारत के स्वदेशी चंद्र मिशनों की प्राथमिकता को प्रभावित कर सकता है?
त्वरित अभ्यास
Q1
NASA के Artemis कार्यक्रम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसका उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के समीप मानव चौकी स्थापित करना है। 2. भारत को इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है। 3. चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लंबी सूर्य रोशनी और स्थायी रूप से छाया वाले गड्ढों में जल बर्फ पाई जाती है। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर देखें
सही उत्तर: 1, 2 और 3
स्रोत के अनुसार, Artemis कार्यक्रम का उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के समीप मानव चौकी स्थापित करना है, भारत को भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है, तथा दक्षिणी ध्रुव पर लंबी सूर्य रोशनी और स्थायी रूप से छाया वाले गड्ढों में जल बर्फ है। अतः सभी कथन सही हैं।
Q2
Artemis कार्यक्रम में भारत की भागीदारी से निम्नलिखित में से कौन-सा लाभ अपेक्षित है?
- भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और प्रौद्योगिकीय विकास को बल मिलेगा
- भारत को चंद्रमा पर एकमात्र स्थायी अड्डा स्थापित करने का अधिकार मिलेगा
- भारत के सभी भविष्य के चंद्र मिशन NASA द्वारा संचालित होंगे
- भारत को अंतरिक्ष में सैन्य प्रभुत्व प्राप्त होगा
उत्तर देखें
सही उत्तर: भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और प्रौद्योगिकीय विकास को बल मिलेगा
स्रोत स्पष्ट करता है कि भारत की भागीदारी से उसकी अंतरिक्ष क्षमताओं, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और प्रौद्योगिकीय विकास को बल मिलेगा। शेष विकल्प स्रोत में उल्लिखित नहीं हैं।
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