GS Paper 1 · 18 अगस्त 2026
उज्जैन में अशोक-कालीन स्तूप पर नए सिरे से ध्यान, संभवतः सांची से बड़ा
प्रारंभिक मूल्यांकन के 90 वर्ष बाद, उज्जैन में स्थित एक टीले पर पुनः पुरातात्विक ध्यान केंद्रित हुआ है, जिसके बारे में विशेषज्ञों का सुझाव है कि इसमें अशोक-कालीन बौद्ध स्तूप हो सकता है जो प्रसिद्ध सांची स्तूप से बड़ा है। यदि इसकी पुष्टि होती है, तो यह खोज मध्य भारत में सम्राट अशोक द्वारा बौद्ध धर्म को प्रदान किए गए संरक्षण की समझ को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगी। यह घटनाक्रम भारत की प्राचीन बौद्ध विरासत के संरक्षण और मौर्य कला एवं स्थापत्य पर विद्वत्ता के लिए महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी के लिए महत्व
प्राथमिक GS-1 (कला एवं संस्कृति: बौद्ध स्थापत्य, मौर्य काल)। द्वितीयक GS-1 (प्राचीन भारतीय इतिहास: अशोक और बौद्ध धर्म का प्रसार)। यह स्तूप वास्तुकला, सांची, बौद्ध स्थलों और अशोक के अभिलेखों जैसे विषयों से जुड़ता है। पाठ्यपुस्तक संदर्भ: NCERT Class 11 Ancient India (Ancient India by R.S. Sharma), Nitin Singhania Art & Culture (Buddhist Art and Architecture), CCRT material on Buddhist monuments।
इस खबर को कैसे पढ़ें
यह समाचार केवल एक पुरातात्विक संभावना नहीं है, बल्कि मौर्य साम्राज्य के सांस्कृतिक भूगोल को पढ़ने का अवसर है। उज्जैन प्राचीन अवंतिका है, जो दक्षिणापथ का प्रमुख व्यापारिक केंद्र था। अशोक के काल में बौद्ध स्तूपों का निर्माण केवल धार्मिक कार्य नहीं था; वे व्यापार मार्गों, नगरों और प्रशासनिक केंद्रों से जुड़े होते थे। यदि उज्जैन का टीला वास्तव में सांची से बड़ा स्तूप निकलता है, तो यह मध्य भारत में बौद्ध संरक्षण के केंद्र के रूप में उज्जैन की भूमिका को नया आयाम देगा। परीक्षा की दृष्टि से यह घटना स्थल-विशिष्ट जानकारी से अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि यह स्तूप वास्तुकला के विकास, मौर्य कला की क्षेत्रीय विविधता और अशोक के धम्म प्रसार की रणनीति को जोड़ती है। अभ्यर्थी को चाहिए कि वह सांची, भरहुत, अमरावती और अब उज्जैन को एक तुलनात्मक ढांचे में रखकर देखे। साथ ही, प्रारंभिक मूल्यांकन के 90 वर्ष बाद पुनः ध्यान दिया जाना यह दर्शाता है कि पुरातात्विक अनुसंधान में तकनीकी सीमाएँ और संस्थागत प्राथमिकताएँ किस प्रकार किसी स्थल के भाग्य का निर्धारण करती हैं। यह बिंदु निबंध या साक्षात्कार में विरासत संरक्षण की चुनौतियों पर चर्चा का आधार बन सकता है। उत्तर लेखन में मूल शासकीय सिद्धांत को प्रशासनिक तंत्र से अलग करके कार्यान्वयन के लिए उत्तरदायी संस्था की पहचान करनी चाहिए।
पेपर का व्यापक संदर्भ
आज GS-1 में दो सांस्कृतिक प्रतीक आमने-सामने हैं: उज्जैन का संभावित अशोक-कालीन स्तूप और वंदे मातरम् का विवाद। दोनों में सामान्य जाल यह है कि अभ्यर्थी तथ्यों को रट लेते हैं, पर उनके ऐतिहासिक स्रोत और संवैधानिक स्थिति को नहीं जोड़ते। स्तूप के प्रश्न में मौर्य कला की विशेषताएँ और सांची से तुलना का आधार पूछा जा सकता है, जबकि वंदे मातरम् में रचना, अंगीकरण की तिथि और न्यायिक निर्णयों का अंतर ही असली परीक्षा है।
संभावित प्रश्न
उज्जैन का टीला यदि सांची से बड़ा अशोक-कालीन स्तूप निकला, तो यह मध्य भारत में बौद्ध संरक्षण के मानचित्र को कैसे बदल देगा? मौर्य स्तूप वास्तुकला की उन विशेषताओं को रेखांकित कीजिए जो इसे बाद के काल से अलग करती हैं।
त्वरित अभ्यास
Q1
उज्जैन के टीले के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह टीला मध्य प्रदेश राज्य में स्थित है। 2. प्रारंभिक मूल्यांकन के 90 वर्ष बाद इस पर पुनः ध्यान केंद्रित किया गया है। 3. विशेषज्ञों का सुझाव है कि इसमें अशोक-कालीन बौद्ध स्तूप हो सकता है जो सांची स्तूप से बड़ा है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर देखें
सही उत्तर: 1, 2 और 3
स्रोत के अनुसार उज्जैन का टीला मध्य प्रदेश में है, प्रारंभिक मूल्यांकन के 90 वर्ष बाद पुनः ध्यान दिया गया है, और विशेषज्ञों का सुझाव है कि इसमें अशोक-कालीन स्तूप हो सकता है जो सांची से बड़ा है। अतः तीनों कथन सही हैं।
Q2
उज्जैन के टीले की पुष्टि होने पर यह खोज मुख्य रूप से किसकी समझ को बढ़ाएगी?
- गुप्त कालीन मंदिर स्थापत्य
- मध्य भारत में अशोक द्वारा बौद्ध धर्म को दिया गया संरक्षण
- सिंधु घाटी सभ्यता का नगर नियोजन
- चोल कालीन धातु मूर्तियाँ
उत्तर देखें
सही उत्तर: मध्य भारत में अशोक द्वारा बौद्ध धर्म को दिया गया संरक्षण
स्रोत स्पष्ट करता है कि यदि पुष्टि होती है, तो यह खोज मध्य भारत में सम्राट अशोक द्वारा बौद्ध धर्म को प्रदान किए गए संरक्षण की समझ को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगी।
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