GS Paper 1 · 18 अगस्त 2026
केरल और राजस्थान में वंदे मातरम् विवाद: राष्ट्रीय गीत की संवैधानिक स्थिति और बाध्यता के प्रश्न
केरल में स्वतंत्रता दिवस समारोह में वंदे मातरम् के गायन को कथित रूप से छोड़े जाने के बाद विवाद उत्पन्न हो गया है, जिस पर BJP और केंद्रीय मंत्री H.D. Kumaraswamy की तीखी प्रतिक्रिया आई, जबकि Congress ने राजस्थान में पूर्ण गीत बजाए जाने का बचाव किया। राजस्थान में गलत धुन और उलटा तिरंगा जैसी कथित चूकें भी सामने आईं। यह प्रकरण इस बहस को पुनर्जीवित करता है कि क्या वंदे मातरम् का गायन अनिवार्य होना चाहिए, तथा राष्ट्रगान के संदर्भ में इसकी संवैधानिक और सांस्कृतिक स्थिति क्या है। यद्यपि वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गीत के रूप में व्यापक सम्मान प्राप्त है, संविधान इसके गायन को अनिवार्य नहीं बनाता, और न्यायालयों ने यह अभिनिर्धारित किया है कि यदि यह धार्मिक आस्थाओं को ठेस पहुँचाता है तो किसी भी नागरिक को इसे गाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
यूपीएससी के लिए महत्व
मुख्य GS-1: भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय प्रतीक, और स्वतंत्रता संग्राम की सांस्कृतिक अभिव्यक्तियाँ। द्वितीयक GS-2: Article 51A के अंतर्गत मौलिक कर्तव्य, राष्ट्रीय गीत/गान पर न्यायिक निर्णय, और धर्मनिरपेक्षता बनाम राष्ट्रीय प्रतीक। स्थैतिक संदर्भ: NCERT कक्षा 12 राजनीति विज्ञान (Politics in India since Independence) और Indian Polity by Laxmikanth में मौलिक कर्तव्यों पर।
इस खबर को कैसे पढ़ें
इस समाचार का परीक्षा-मूल्य केवल राजनीतिक विवाद में नहीं, बल्कि उस संवैधानिक भेद में है जिसे अभ्यर्थी प्रायः भूल जाते हैं: राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत की स्थिति समान नहीं है। संविधान सभा ने जन गण मन को राष्ट्रगान के रूप में अंगीकृत किया, किंतु वंदे मातरम् को केवल राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया गया। यह भेद इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि Article 51A(a) के अंतर्गत मौलिक कर्तव्य केवल राष्ट्रगान के प्रति सम्मान की बात करता है, राष्ट्रीय गीत की नहीं। अतः वंदे मातरम् के गायन की कोई संवैधानिक बाध्यता नहीं है। न्यायालयों ने भी यही स्पष्ट किया है कि धार्मिक आस्था के आधार पर कोई नागरिक इसे गाने से इनकार कर सकता है। यह निर्णय धर्मनिरपेक्षता के उस सिद्धांत से जुड़ता है जो राज्य को किसी धार्मिक आचरण के लिए बाध्य करने से रोकता है। केरल और राजस्थान के प्रकरण इसी संवैधानिक सीमा की परीक्षा हैं। परीक्षा में ऐसे प्रश्न अक्सर सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और संवैधानिक नैतिकता के बीच संतुलन पूछते हैं। अभ्यर्थी को यह समझना चाहिए कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान स्वैच्छिक भावना से जुड़ा है, बाध्यता से नहीं। यही कारण है कि उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रगान को सिनेमाघरों में अनिवार्य बनाने के आदेश को भी बाद में संशोधित किया था। इस समाचार से जुड़ा एक और बिंदु है: प्रतीकों का दुरुपयोग या गलत प्रस्तुति — जैसे उलटा तिरंगा या गलत धुन — भी विवाद का विषय बनती है, क्योंकि यह राष्ट्रीय सम्मान की भावना को आहत करती है। अतः उत्तर लेखन में केवल घटना का वर्णन न करें, बल्कि संवैधानिक प्रावधान, न्यायिक व्याख्या और सांस्कृतिक बहुलता के बीच संबंध स्थापित करें।
पेपर का व्यापक संदर्भ
आज GS-1 में दो सांस्कृतिक प्रतीक आमने-सामने हैं: उज्जैन का संभावित अशोक-कालीन स्तूप और वंदे मातरम् का विवाद। दोनों में सामान्य जाल यह है कि अभ्यर्थी तथ्यों को रट लेते हैं, पर उनके ऐतिहासिक स्रोत और संवैधानिक स्थिति को नहीं जोड़ते। स्तूप के प्रश्न में मौर्य कला की विशेषताएँ और सांची से तुलना का आधार पूछा जा सकता है, जबकि वंदे मातरम् में रचना, अंगीकरण की तिथि और न्यायिक निर्णयों का अंतर ही असली परीक्षा है।
संभावित प्रश्न
वंदे मातरम् का विवाद सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और संवैधानिक धर्मनिरपेक्षता के बीच के तनाव को कैसे दर्शाता है? राष्ट्रीय गीत की विधिक स्थिति को राष्ट्रगान से भिन्न करते हुए समझाइए।
त्वरित अभ्यास
Q1
वंदे मातरम् के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (1) यह राष्ट्रीय गीत है और इसका गायन Article 51A(a) के अंतर्गत मौलिक कर्तव्य है। (2) उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि धार्मिक आस्था के आधार पर कोई व्यक्ति इसे गाने से इनकार कर सकता है। (3) संविधान सभा ने इसे राष्ट्रगान के साथ ही अंगीकृत किया था। उपर्युक्त में से कौन-से सही हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1, 2 और 3
उत्तर देखें
सही उत्तर: केवल 2
केवल कथन 2 सही है। Article 51A(a) केवल राष्ट्रगान के प्रति सम्मान का कर्तव्य लागू करता है, राष्ट्रीय गीत का नहीं। संविधान सभा ने वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया, किंतु राष्ट्रगान के साथ उसी दिन अंगीकृत नहीं किया। न्यायालयों ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक आस्था के आधार पर गायन से इनकार किया जा सकता है।
Q2
राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- इसकी रचना Bankim Chandra Chatterjee ने की थी और यह पहली बार Anandamath उपन्यास में प्रकाशित हुआ था।
- संविधान के Article 51A(a) में इसके गायन को मौलिक कर्तव्य के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
- उच्चतम न्यायालय ने इसे सभी शैक्षणिक संस्थानों में अनिवार्य रूप से गाने का आदेश दिया है।
- राजस्थान सरकार ने इसे राज्य गीत के रूप में अधिसूचित किया है।
उत्तर देखें
सही उत्तर: इसकी रचना Bankim Chandra Chatterjee ने की थी और यह पहली बार Anandamath उपन्यास में प्रकाशित हुआ था।
वंदे मातरम् की रचना Bankim Chandra Chatterjee ने की थी और यह उनके उपन्यास Anandamath में प्रकाशित हुआ था। Article 51A(a) केवल राष्ट्रगान से संबंधित है, राष्ट्रीय गीत से नहीं। न्यायालय ने इसे अनिवार्य नहीं बनाया है और राजस्थान में इसे राज्य गीत का दर्जा नहीं दिया गया है।
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