अंतरराष्ट्रीय संबंधGS Paper 2 · 19 अगस्त 2026
BRICS पर्यावरण मंत्रियों ने समुदाय-केंद्रित लचीलेपन पर संयुक्त वक्तव्य अपनाया
नई दिल्ली में आयोजित 12वीं BRICS पर्यावरण मंत्रिस्तरीय बैठक 18 अगस्त 2026 को संयुक्त मंत्रिस्तरीय वक्तव्य और चार परिणाम दस्तावेजों पर सहमति के साथ समाप्त हुई। इनमें टिकाऊ जीवनशैली के लिए संस्थागत ज्ञान नेटवर्क, समेकित भू-दृश्य प्रबंधन, वनाग्नि की तैयारी और प्रतिक्रिया तथा पारंपरिक ज्ञान पर आधारित जन-केंद्रित जलवायु अनुकूलन शामिल हैं। भारत ने अपनी BRICS अध्यक्षता की प्राथमिकताएँ टिकाऊ जीवनशैली, वनीकरण एवं आपदा-लचीलापन, चक्रीय अर्थव्यवस्था और अनुकूलन के रूप में रखीं। यह परिणाम व्यापक दक्षिण-दक्षिण पर्यावरण सहयोग को विषय-विशिष्ट सिद्धांतों में बदलता है, किंतु सफलता वित्त, प्रौद्योगिकी सहयोग, राष्ट्रीय क्षमता और मापनीय अनुपालन पर निर्भर करेगी।
यूपीएससी के लिए महत्व
GS-2 अंतरराष्ट्रीय संबंध और GS-3 पर्यावरण: वैश्विक दक्षिण के सहयोग मंच के रूप में BRICS, जलवायु अनुकूलन, वनाग्नि शासन, भूमि पुनर्स्थापन और पारंपरिक ज्ञान। उत्तर में सहमति-आधारित मंत्रिस्तरीय वक्तव्य को बाध्यकारी संधि से अलग करना तथा यह जाँचना चाहिए कि ज्ञान-साझाकरण व्यवस्था वित्त, क्षमता और स्थानीय क्रियान्वयन में बदलती है या नहीं।
इस खबर को कैसे पढ़ें
बैठक का महत्व इस बात में है कि उसने सामान्य जलवायु सहयोग को चार व्यावहारिक क्षेत्रों में व्यवस्थित किया: टिकाऊ जीवनशैली, भू-दृश्य प्रबंधन, वनाग्नि की तैयारी और समुदाय-केंद्रित अनुकूलन। फिर भी मंत्रिस्तरीय वक्तव्य राजनीतिक प्रतिबद्धता है, बाध्यकारी दायित्व वाली संधि नहीं। इसका मूल्य कार्यसूची निर्धारित करने, साझा सिद्धांत बनाने, संस्थागत संपर्क बढ़ाने तथा संयुक्त प्रयोग और क्षमता निर्माण की संभावना में है। वैश्विक दक्षिण के लिए BRICS विमर्श को केवल उत्सर्जन-न्यूनीकरण लक्ष्य से आगे ले जाकर अनुकूलन वित्त, पारंपरिक ज्ञान और विकास संबंधी सीमाओं पर केंद्रित कर सकता है। मुख्य जोखिम क्रियान्वयन के कमजोर पड़ने का है, क्योंकि व्यापक सहमति अलग-अलग राष्ट्रीय हित, प्रशासनिक क्षमता और वित्तीय प्राथमिकताएँ छिपा सकती है। मुख्य परीक्षा में इसे मृदु-विधि सहयोग के रूप में समझाइए, जो कानूनी बाध्यता के बिना भी मानक बना और ज्ञान लागत घटा सकता है। फिर जाँचिए कि समुदाय निर्णय में भाग लेते हैं या नहीं, वित्त तथा प्रौद्योगिकी संवेदनशील क्षेत्रों तक पहुँचते हैं या नहीं, और परिणाम मापे जाते हैं या केवल घोषित होते हैं। जन-केंद्रित लचीलापन तभी विश्वसनीय होगा जब घरेलू योजना, आपदा प्रबंधन और बजट व्यवस्था भी उसी सिद्धांत पर चलें।
पेपर का व्यापक संदर्भ
GS-2 के विषय भरोसे, डेटा और सहयोग पर चलने वाली संस्थाओं की वैधता से जुड़े हैं। PM CARES में प्रकटीकरण और परिणामगत जवाबदेही प्रमुख हैं। Aadhaar विद्यालय अभियान राज्य क्षमता से अंतिम छोर की बाधा घटाता है, पर सुधार, गोपनीयता और वैकल्पिक व्यवस्था अनिवार्य बनाता है। BRICS पर्यावरण परिणाम मृदु-विधि सहयोग का उदाहरण है, जहाँ सहमति ज्ञान और प्राथमिकता को व्यवस्थित करती है, पर घरेलू क्रियान्वयन निर्णायक रहता है। उत्तर में घोषित उद्देश्य और जवाबदेही तंत्र अलग करके यह पूछें कि विफलता पर सुधार कौन और कैसे माँग सकता है।
संभावित प्रश्न
क्या BRICS जैसे बहुपक्षीय समूह बाध्यकारी दायित्वों के अभाव के बावजूद समुदाय-केंद्रित जलवायु अनुकूलन को सुदृढ़ कर सकते हैं? विश्लेषण कीजिए।
त्वरित अभ्यास
Q1
BRICS पर्यावरण परिणाम को किस प्रकार का साधन मानना सबसे उचित है?
- घरेलू न्यायालयों में स्वतः लागू बाध्यकारी संधि
- सहयोग और मानक-विकास का मार्गदर्शन करने वाला सहमति-आधारित मंत्रिस्तरीय वक्तव्य
- अनिवार्य वैश्विक कार्बन कर
- सदस्य देशों पर लागू न्यायिक आदेश
उत्तर देखें
सही उत्तर: सहयोग और मानक-विकास का मार्गदर्शन करने वाला सहमति-आधारित मंत्रिस्तरीय वक्तव्य
बैठक ने सहमति से संयुक्त मंत्रिस्तरीय वक्तव्य और परिणाम दस्तावेज अपनाए। वे सहयोग व्यवस्थित कर सकते हैं, पर स्रोत उन्हें बाध्यकारी संधि नहीं बताता।
Q2
स्वीकृत पर्यावरण सहयोग पैकेज में कौन-सा तत्व शामिल था?
- पारंपरिक ज्ञान पर आधारित समुदाय-केंद्रित जलवायु अनुकूलन
- सभी राष्ट्रीय अनुकूलन कार्यक्रमों पर रोक
- स्थानीय ज्ञान को एक केंद्रीय प्रतिरूप से बदलना
- वनाग्नि सहयोग से हटना
उत्तर देखें
सही उत्तर: पारंपरिक ज्ञान पर आधारित समुदाय-केंद्रित जलवायु अनुकूलन
स्रोत में पारंपरिक ज्ञान पर आधारित जन-केंद्रित और समुदाय-आधारित अनुकूलन एक सहमत परिणाम के रूप में है।
संबंधित विगत वर्ष प्रश्न
- GS-2: वैश्विक दक्षिण के हितों को आगे बढ़ाने में उभरते बहुपक्षीय समूहों की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
- GS-3: जलवायु अनुकूलन के लिए स्थानीय समुदाय और पारंपरिक ज्ञान क्यों महत्वपूर्ण हैं?