जीएस पेपर 2 — राजव्यवस्था, शासन, अंतर्राष्ट्रीय संबंध
GS-2 के विषय भरोसे, डेटा और सहयोग पर चलने वाली संस्थाओं की वैधता से जुड़े हैं। PM CARES में प्रकटीकरण और परिणामगत जवाबदेही प्रमुख हैं। Aadhaar विद्यालय अभियान राज्य क्षमता से अंतिम छोर की बाधा घटाता है, पर सुधार, गोपनीयता और वैकल्पिक व्यवस्था अनिवार्य बनाता है। BRICS पर्यावरण परिणाम मृदु-विधि सहयोग का उदाहरण है, जहाँ सहमति ज्ञान और प्राथमिकता को व्यवस्थित करती है, पर घरेलू क्रियान्वयन निर्णायक रहता है। उत्तर में घोषित उद्देश्य और जवाबदेही तंत्र अलग करके यह पूछें कि विफलता पर सुधार कौन और कैसे माँग सकता है।
PM CARES ने 18 अगस्त 2026 को वित्त वर्ष 2024-25 का प्राप्ति और भुगतान लेखा प्रकाशित किया। आधिकारिक विवरण में ₹479.05 करोड़ के घरेलू दान, लगभग ₹0.93 करोड़ के विदेशी दान, ₹87.85 लाख के भुगतान तथा ₹8,452.07 करोड़ की अंतिम शेष राशि दर्ज है, जिसमें ₹7,846.65 करोड़ की सावधि जमा शामिल है। कोष की प्रश्नोत्तर सामग्री इसे सार्वजनिक धर्मार्थ न्यास बताती है, जिसके लेखों की जाँच न्यासियों द्वारा नियुक्त स्वतंत्र लेखापरीक्षक करता है; साथ ही आयकर कानून के अंतर्गत लेखापरीक्षा की कोई निश्चित वैधानिक अवधि निर्धारित नहीं होने की बात कही गई है। इसलिए यह प्रकटीकरण आपात राहत संस्था में कानूनी स्वरूप, लेखापरीक्षा, सार्वजनिक सूचना और परिणाम-आधारित जवाबदेही के संबंध पर विचार का अवसर देता है।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS-2 शासन: पारदर्शिता, संस्थागत जवाबदेही, सार्वजनिक न्यास तथा वैधानिक लेखापरीक्षा, स्वतंत्र लेखापरीक्षा और विधायी निगरानी का अंतर। किसी अनियमितता का अनुमान लगाए बिना विश्लेषण करना चाहिए। प्रकाशित लेखा प्राप्ति, भुगतान और शेष राशि बताता है; पर्याप्तता का आकलन स्पष्ट उद्देश्यों, समयबद्ध प्रकटीकरण, व्यय मानदंड और मापनीय राहत परिणामों से होगा।
संभावित प्रश्न: वित्तीय प्रकटीकरण सार्वजनिक जवाबदेही के लिए आवश्यक है, परंतु पर्याप्त नहीं। आपात राहत कोषों के शासन के संदर्भ में चर्चा कीजिए।
संबंधित विगत वर्ष प्रश्न: GS-2: शासन की गुणवत्ता सुधारने में पारदर्शिता और जवाबदेही की भूमिका पर चर्चा कीजिए।; GS-2: संस्थागत संरचना किस प्रकार संचालनगत लचीलेपन और सार्वजनिक निगरानी में संतुलन स्थापित कर सकती है?
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UIDAI ने 18 अगस्त 2026 को बताया कि विद्यालय-आधारित अभियान के माध्यम से लगभग 1.56 लाख विद्यालयों में 2 करोड़ से अधिक अनिवार्य बायोमेट्रिक अद्यतन पूरे किए गए। UDISE+ से एकीकरण अद्यतन की स्थिति पहचानने में सहायता करता है, जबकि विद्यालय शिविर सेवा को बच्चों के निकट लाते हैं। 5 वर्ष से कम आयु में Aadhaar नामांकन के दौरान जनसांख्यिकीय विवरण और छायाचित्र लिया जाता है, पर अंगुलियों तथा आँख की पुतली की पहचान नहीं ली जाती; अद्यतन 5 वर्ष और फिर 15 वर्ष की आयु पर आवश्यक है। 5 से 17 वर्ष के लिए सेवा 30 सितंबर 2026 तक निःशुल्क है। यह पहल कल्याण और परीक्षाओं में प्रमाणीकरण विफलता घटा सकती है, पर डेटा शुद्धता, स्पष्ट सूचना, शिकायत निवारण और गोपनीयता सुरक्षा भी उतनी ही आवश्यक हैं।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS-2 शासन और सामाजिक न्याय: डिजिटल पहचान, अंतिम छोर तक सेवा, शिक्षा प्रशासन और बहिष्करण का जोखिम। विश्लेषण में लाभ एवं परीक्षा तक पहुँच के लिए सही प्रमाणीकरण को बच्चों के अनुरूप सूचना, सुधार व्यवस्था, डेटा न्यूनतमकरण, गोपनीयता और प्रमाणीकरण विफल होने पर सुलभ वैकल्पिक साधनों के साथ संतुलित करना चाहिए।
संभावित प्रश्न: विद्यालय-आधारित डिजिटल पहचान अद्यतन किस प्रकार सेवा वितरण सुधार सकता है, बिना बहिष्करण बढ़ाए या बच्चों की डेटा सुरक्षा कमजोर किए? चर्चा कीजिए।
संबंधित विगत वर्ष प्रश्न: GS-2: कल्याण वितरण में डिजिटल प्रौद्योगिकी की संभावनाओं और सीमाओं का परीक्षण कीजिए।; GS-2: नागरिक-केंद्रित ई-शासन को शिकायत निवारण और गोपनीयता सुरक्षा किस प्रकार मजबूत करते हैं?
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जीएस पेपर 3 — अर्थव्यवस्था, पर्यावरण, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, सुरक्षा
GS-3 के विषय निर्देशित ऋण, खरीद की निश्चितता, राजकोषीय एकरूपता और संसाधन आवंटन द्वारा बाजार व्यवहार बदलने को दिखाते हैं। RRB समावेशन को सहारा देते हैं, रक्षा स्वदेशीकरण घरेलू क्षमता चाहता है, MMDR संशोधन पूर्वानुमेय खनिज बाजार बनाता है और PNG योजना सक्रिय घरेलू कनेक्शन को पुरस्कृत करती है। इनका मूल्यांकन केवल निवेश या संख्या से न करें। उत्पादकता, प्रतिस्पर्धा, उपभोक्ता संरक्षण, पर्यावरणीय बाह्य प्रभाव और मापनीय परिणाम से जोड़ें। संतुलित निष्कर्ष रणनीतिक क्षमता के साथ पारदर्शिता, संघीय परामर्श और स्वतंत्र मूल्यांकन बनाए रखे।
रक्षा उत्पादन विभाग ने 18 अगस्त 2026 को छठी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची अधिसूचित की। इसमें ₹3,070 करोड़ की अनुमानित कारोबारी क्षमता वाली 405 रणनीतिक वस्तुएँ हैं, जिनमें भारतीय तटरक्षक बल की 16 और रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों की 389 वस्तुएँ शामिल हैं। सूची में विमान, बख्तरबंद मंच, युद्धपोत, प्रक्षेपास्त्र प्रणाली, रडार, सोनार, गोला-बारूद और विभिन्न घटक आते हैं। प्रत्येक वस्तु के लिए स्वदेशीकरण की सांकेतिक समय-सीमा है और सफल विकास के बाद खरीद भारतीय उद्योग से की जानी है। अगस्त 2020 में आरंभ SRIJAN पोर्टल पर जून 2026 तक 33,000 से अधिक वस्तुएँ प्रस्तुत की गई थीं तथा 15,700 से अधिक वस्तुओं के स्वदेशीकरण की सूचना दी गई।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS-3 सुरक्षा और अर्थव्यवस्था: रक्षा औद्योगिक नीति, आयात प्रतिस्थापन, रणनीतिक स्वायत्तता, MSME भागीदारी और खरीद संरचना। सकारात्मक सूचियाँ माँग की पूर्वानुमेयता देती हैं, पर विश्लेषण में परीक्षण मानक, समयबद्ध विकास, प्रतिस्पर्धा, जीवन-चक्र सहयोग और संरक्षित अक्षमता से बचाव भी शामिल होना चाहिए।
संभावित प्रश्न: सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियाँ माँग की निश्चितता बना सकती हैं, किंतु अकेले रणनीतिक स्वायत्तता सुनिश्चित नहीं कर सकतीं। चर्चा कीजिए।
संबंधित विगत वर्ष प्रश्न: GS-3: भारत की रक्षा तैयारी और रणनीतिक स्वायत्तता के लिए स्वदेशीकरण के महत्व पर चर्चा कीजिए।; GS-3: घरेलू रक्षा क्षमता निर्माण में MSME और नवाचार पारितंत्र की भूमिका का परीक्षण कीजिए।
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वित्त मंत्रालय ने 18 अगस्त 2026 को बताया कि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का सकल बकाया ऋण 10.3% बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 के ₹5.24 लाख करोड़ से वित्त वर्ष 2025-26 में ₹5.78 लाख करोड़ हो गया। समायोजित शुद्ध बैंक ऋण के निर्धारित 75% लक्ष्य के मुकाबले औसत प्राथमिकता क्षेत्र ऋण 91.7% रहा। कृषि और संबद्ध गतिविधियों में ₹3.78 लाख करोड़ अर्थात प्राथमिकता क्षेत्र ऋण का 77% था। MSME ऋण ₹66,978 करोड़ रहा, जिसमें 95% से अधिक सूक्ष्म उद्यमों को मिला। कमजोर वर्गों को ऋण ₹3.49 लाख करोड़ तक पहुँचा। आँकड़े विकासोन्मुख भूमिका दिखाते हैं, पर स्थिरता के लिए परिसंपत्ति गुणवत्ता, क्षेत्रीय संतुलन, प्रौद्योगिकी और ग्राहक संरक्षण का आकलन भी आवश्यक है।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS-3 अर्थव्यवस्था: वित्तीय समावेशन, प्राथमिकता क्षेत्र ऋण, ग्रामीण साख और संस्थागत वित्त। उच्च लक्ष्य-प्राप्ति विकासोन्मुखता दर्शाती है, पर पूर्ण उत्तर में यह जाँचना चाहिए कि ऋण उत्पादक, क्षेत्रीय रूप से समावेशी और वित्तीय रूप से सुदृढ़ है या नहीं तथा ग्राहकों को उपयुक्त उत्पाद, निष्पक्ष वसूली और प्रभावी शिकायत निवारण मिलता है या नहीं।
संभावित प्रश्न: वित्तीय समावेशन और विवेकपूर्ण, टिकाऊ ग्रामीण ऋण वितरण में संतुलन स्थापित करने में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की भूमिका का आकलन कीजिए।
संबंधित विगत वर्ष प्रश्न: GS-3: संस्थागत ऋण ग्रामीण ऋणग्रस्तता घटाकर समावेशी विकास को किस प्रकार सहारा दे सकता है?; GS-3: विकासोन्मुख बैंकिंग और वित्तीय स्थिरता में संतुलन की चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।
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खान और खनिज विकास एवं विनियमन संशोधन अधिनियम, 2026 ने धारा 9D जोड़कर खनिज अधिकारों तथा खनिज-युक्त भूमि पर कर, उपकर या अन्य शुल्क के लिए एकसमान ढाँचा बनाया है। राज्य ऐसे शुल्क केवल संघ सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों या प्रतिबंधों के अनुसार लगा सकेंगे। पूर्व के ऐसे शुल्क जो वसूल नहीं हुए, अमान्य माने जाएँगे; पहले से प्राप्त राशि वापस नहीं होगी। आधिकारिक पृष्ठभूमि-पत्र का तर्क है कि अनेक और असमान शुल्क खनन की व्यवहार्यता, महत्वपूर्ण खनिज सुरक्षा तथा साझा खनिज बाजार को प्रभावित करते हैं। साथ ही लघु खनिज राज्य नियंत्रण में रहते हैं और खनन राजस्व का प्रमुख भाग राज्यों को मिलता है। यह संशोधन कराधिकार, नियामक एकरूपता, निवेश निश्चितता और राज्य वित्तीय स्वायत्तता से जुड़ा संघवाद का प्रश्न है।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS-3 अर्थव्यवस्था और GS-2 संघवाद: खनिज विनियमन, महत्वपूर्ण खनिज, अंतर-सरकारी राजकोषीय संबंध और संसाधन शासन। विश्लेषण में खान एवं खनिज विकास पर संसदीय विनियमन को राज्यों के कर हितों से अलग करते हुए पूर्वानुमेयता, स्थानीय बाह्य प्रभाव, राजस्व आवश्यकता, जिला खनिज प्रतिष्ठान और सहकारी नियम-निर्माण को साथ देखना चाहिए।
संभावित प्रश्न: एकसमान खनिज कर व्यवस्था निवेश की निश्चितता बढ़ा सकती है, पर राज्य की वित्तीय स्वायत्तता सीमित कर सकती है। MMDR संशोधन अधिनियम, 2026 के संघीय संतुलन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
संबंधित विगत वर्ष प्रश्न: GS-2: प्राकृतिक संसाधनों और साझा राजस्व के प्रबंधन में सहकारी संघवाद की भूमिका पर चर्चा कीजिए।; GS-3: टिकाऊ और स्थानीय रूप से जवाबदेह खनन सुनिश्चित करते हुए महत्वपूर्ण खनिज सुरक्षित करने की चुनौतियों का परीक्षण कीजिए।
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सरकार ने 18 अगस्त 2026 को घरेलू पाइप्ड प्राकृतिक गैस के सक्रिय कनेक्शन बढ़ाने के लिए एक प्रोत्साहन योजना मंजूर की, जो 1 सितंबर 2026 से प्रभावी होगी। देश में अभी 1.74 करोड़ घरेलू PNG कनेक्शन हैं। पात्र नगर गैस वितरण कंपनियों को अपने भौगोलिक क्षेत्र की सीमा से ऊपर प्रत्येक अतिरिक्त बिलयुक्त घरेलू कनेक्शन पर कम कीमत वाली घरेलू उत्पादित गैस के 200 मानक घन मीटर अतिरिक्त मिलेंगे। योजना छह माह में दो चरणों में चलेगी और यह अतिरिक्त आवंटन परिवहन क्षेत्र में प्रयुक्त महँगी आयातित LNG का स्थान ले सकता है। सरकार का अनुमान है कि विभिन्न क्षेत्रों में लागत-बचत से घरेलू कनेक्शन की पूँजी-वसूली अवधि लगभग 10 वर्ष से घटकर लगभग 3 वर्ष हो सकती है, जिससे वितरकों के प्रोत्साहन बदलेंगे।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS-3 ऊर्जा और अवसंरचना: नगर गैस वितरण, स्वच्छ खाना पकाना, प्रशासित घरेलू गैस और प्रोत्साहन संरचना। योजना का लक्ष्य लगी हुई पर निष्क्रिय अवसंरचना को वास्तविक उपयोग में बदलना है। विश्लेषण में लागत-बचत का उपभोक्ता तक पहुँचना, नेटवर्क पहुँच, सुरक्षा, वहनीयता, मीथेन रिसाव और गैस-जाल से बाहर परिवारों के समर्थन पर प्रभाव देखना चाहिए।
संभावित प्रश्न: परिणाम-आधारित प्रोत्साहन अवसंरचना उपयोग सुधार सकते हैं, किंतु उनकी संरचना उपभोक्ता संरक्षण और क्षेत्रीय समावेशन सुनिश्चित करे। घरेलू PNG विस्तार के संदर्भ में चर्चा कीजिए।
संबंधित विगत वर्ष प्रश्न: GS-3: भारत के ऊर्जा संक्रमण और शहरी ऊर्जा सुरक्षा में प्राकृतिक गैस की भूमिका पर चर्चा कीजिए।; GS-3: प्रोत्साहन संरचना सार्वजनिक सेवा अवसंरचना के उपयोग को किस प्रकार सुधार सकती है?
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