राजव्यवस्था और शासनGS Paper 2 · 19 अगस्त 2026
UIDAI के विद्यालय अभियान में 2 करोड़ से अधिक बायोमेट्रिक अद्यतन पूरे
UIDAI ने 18 अगस्त 2026 को बताया कि विद्यालय-आधारित अभियान के माध्यम से लगभग 1.56 लाख विद्यालयों में 2 करोड़ से अधिक अनिवार्य बायोमेट्रिक अद्यतन पूरे किए गए। UDISE+ से एकीकरण अद्यतन की स्थिति पहचानने में सहायता करता है, जबकि विद्यालय शिविर सेवा को बच्चों के निकट लाते हैं। 5 वर्ष से कम आयु में Aadhaar नामांकन के दौरान जनसांख्यिकीय विवरण और छायाचित्र लिया जाता है, पर अंगुलियों तथा आँख की पुतली की पहचान नहीं ली जाती; अद्यतन 5 वर्ष और फिर 15 वर्ष की आयु पर आवश्यक है। 5 से 17 वर्ष के लिए सेवा 30 सितंबर 2026 तक निःशुल्क है। यह पहल कल्याण और परीक्षाओं में प्रमाणीकरण विफलता घटा सकती है, पर डेटा शुद्धता, स्पष्ट सूचना, शिकायत निवारण और गोपनीयता सुरक्षा भी उतनी ही आवश्यक हैं।
यूपीएससी के लिए महत्व
GS-2 शासन और सामाजिक न्याय: डिजिटल पहचान, अंतिम छोर तक सेवा, शिक्षा प्रशासन और बहिष्करण का जोखिम। विश्लेषण में लाभ एवं परीक्षा तक पहुँच के लिए सही प्रमाणीकरण को बच्चों के अनुरूप सूचना, सुधार व्यवस्था, डेटा न्यूनतमकरण, गोपनीयता और प्रमाणीकरण विफल होने पर सुलभ वैकल्पिक साधनों के साथ संतुलित करना चाहिए।
इस खबर को कैसे पढ़ें
UIDAI अभियान दिखाता है कि प्रशासनिक एकीकरण अंतिम छोर की समस्या हल कर सकता है। UDISE+ के साथ स्थिति जोड़ने से विद्यालय और प्राधिकरण उन बच्चों की पहचान कर सकते हैं जिन्हें बायोमेट्रिक अद्यतन चाहिए, जबकि विद्यालय शिविर परिवारों की यात्रा तथा लेन-देन लागत घटाते हैं। लगभग 1.56 लाख विद्यालयों में 2 करोड़ से अधिक अद्यतन व्यापक पहुँच दर्शाते हैं। नीति का आधार भी स्पष्ट है: 5 वर्ष से कम आयु में अंगुलियों और आँख की पुतली की पहचान नहीं ली जाती, इसलिए बढ़ती आयु के साथ सूचना अद्यतन करने से प्रमाणीकरण विश्वसनीय रहता है। फिर भी शासन का मानक केवल पूर्णता संख्या नहीं हो सकता। रिकॉर्ड पुराना होने, डेटा मेल न खाने या सुधार कठिन होने पर बच्चे लाभ और परीक्षाओं से वंचित हो सकते हैं। अधिकार-सम्मत प्रणाली को सरल भाषा में पूर्व सूचना, डेटाबेस के बीच सीमित उद्देश्य, शिविरों में सुरक्षित प्रबंधन, सुलभ सुधार एवं शिकायत और प्रमाणीकरण विफल होने पर दंड-रहित विकल्प देना चाहिए। विद्यालय कर्मचारी सुविधा प्रदान करें, पहचान लागू करने वाले बाध्यकारी अधिकारी न बनें। मुख्य परीक्षा में डिजिटल पहचान को ऐसी सार्वजनिक अवसंरचना मानें जिसकी वैधता आनुपातिकता और उपचार पर निर्भर है। दक्षता और गोपनीयता विरोधी नहीं; शुद्ध डेटा, सीमित उपयोग और प्रभावी विकल्प मिलकर भरोसा बनाते हैं।
पेपर का व्यापक संदर्भ
GS-2 के विषय भरोसे, डेटा और सहयोग पर चलने वाली संस्थाओं की वैधता से जुड़े हैं। PM CARES में प्रकटीकरण और परिणामगत जवाबदेही प्रमुख हैं। Aadhaar विद्यालय अभियान राज्य क्षमता से अंतिम छोर की बाधा घटाता है, पर सुधार, गोपनीयता और वैकल्पिक व्यवस्था अनिवार्य बनाता है। BRICS पर्यावरण परिणाम मृदु-विधि सहयोग का उदाहरण है, जहाँ सहमति ज्ञान और प्राथमिकता को व्यवस्थित करती है, पर घरेलू क्रियान्वयन निर्णायक रहता है। उत्तर में घोषित उद्देश्य और जवाबदेही तंत्र अलग करके यह पूछें कि विफलता पर सुधार कौन और कैसे माँग सकता है।
संभावित प्रश्न
विद्यालय-आधारित डिजिटल पहचान अद्यतन किस प्रकार सेवा वितरण सुधार सकता है, बिना बहिष्करण बढ़ाए या बच्चों की डेटा सुरक्षा कमजोर किए? चर्चा कीजिए।
त्वरित अभ्यास
Q1
बच्चों के बढ़ने पर अनिवार्य बायोमेट्रिक अद्यतन क्यों आवश्यक होता है?
- क्योंकि 5 वर्ष से कम आयु में अंगुलियों और आँख की पुतली की पहचान नहीं ली जाती और बाद में सूचना अद्यतन करनी होती है।
- क्योंकि Aadhaar में जनसांख्यिकीय सूचना नहीं होती।
- क्योंकि प्रत्येक विद्यालय अलग राष्ट्रीय पहचान संख्या बनाता है।
- क्योंकि अद्यतन शिकायत निवारण की आवश्यकता समाप्त करता है।
उत्तर देखें
सही उत्तर: क्योंकि 5 वर्ष से कम आयु में अंगुलियों और आँख की पुतली की पहचान नहीं ली जाती और बाद में सूचना अद्यतन करनी होती है।
स्रोत के अनुसार 5 वर्ष से कम आयु के नामांकन में जनसांख्यिकीय सूचना और छायाचित्र लिया जाता है, पर अंगुलियों तथा आँख की पुतली की पहचान नहीं।
Q2
Aadhaar प्रमाणीकरण विफल होने पर कौन-सा संरक्षण बहिष्करण सीधे घटाता है?
- बिना समीक्षा सेवा रोक देना
- सुधार, शिकायत और वैकल्पिक पहुँच व्यवस्था देना
- सभी विद्यालय डेटा को बिना उद्देश्य सीमा साझा करना
- शिक्षक से अंतिम कानूनी विवाद तय कराना
उत्तर देखें
सही उत्तर: सुधार, शिकायत और वैकल्पिक पहुँच व्यवस्था देना
सुलभ सुधार, शिकायत निवारण और वैकल्पिक पहुँच डेटा अथवा प्रमाणीकरण त्रुटि को अधिकार या अवसर से वंचना बनने से रोकते हैं।
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