जीएस पेपर 2 — राजव्यवस्था, शासन, अंतर्राष्ट्रीय संबंध
शासन विषयों को संस्थागत डिजाइन से पढ़िए। परामर्शी संघीय मंच, सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम और अंतरराष्ट्रीय क्षमता साझेदारी बैठक के बाद समन्वय, विश्वसनीय सूचना और क्रियान्वयन पर निर्भर हैं। उत्तर में विधिक प्राधिकार तथा प्रशासनिक प्रभाव अलग करते हुए पहुंच, कारणयुक्त निर्णय, गरिमा, जवाबदेही और नागरिक परिणामों से सफलता मापिए।
केंद्रीय कुष्ठ प्रभाग ने इंदौर में राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा एवं क्षमता-विकास कार्यशाला शुरू की। इसमें 70 से अधिक प्रतिभागी, मध्य प्रदेश के सभी 51 जिलों के अधिकारी, तकनीकी संस्थान और कुष्ठ से प्रभावित व्यक्तियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम ने महामारी-विज्ञान, क्रियान्वयन अंतर और जिला अनुभवों की समीक्षा की। शीघ्र रोग पहचान, पूर्वव्यापी तथा प्रतिलोम संपर्क-अनुसरण, समय पर उपचार पूर्ण करना, दिव्यांगता रोकथाम, निगरानी और सामुदायिक भागीदारी पर विशेष बल दिया गया। अधिकारियों ने प्रसार दर को 10,000 जनसंख्या पर 1 से नीचे लाने के साथ संचरण अवरोध की दिशा में काम करने की बात कही। कम प्रसार दर अपने-आप संचरण समाप्ति सिद्ध नहीं करती; छिपे मामले, देर से निदान और कलंक रोग तथा दिव्यांगता को बनाए रख सकते हैं।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS Paper 2 के लिए कुष्ठ नियंत्रण सार्वजनिक स्वास्थ्य की अंतिम-मील चुनौती दिखाता है। औषधीय उपचार के साथ प्राथमिक स्वास्थ्य क्षमता, सक्रिय निगरानी, संपर्क-अनुसरण, दिव्यांगता सेवाएं और कलंक-विरोधी संवाद जरूरी हैं। उत्तर में सार्वजनिक-स्वास्थ्य सीमा के रूप में रोग उन्मूलन और संचरण अवरोध का अंतर स्पष्ट करना चाहिए। केंद्र-राज्य समन्वय, प्रशिक्षित अग्रिम कर्मी, रोगी भागीदारी और एकल प्रसार अनुपात से आगे बढ़ने वाले परिणाम सूचक भी महत्वपूर्ण हैं।
संभावित प्रश्न: कम रोग-प्रसार अनुपात संचरण अवरोध को अनिवार्य रूप से सिद्ध क्यों नहीं करता? कुष्ठ नियंत्रण की अंतिम-मील शासन आवश्यकताओं पर चर्चा कीजिए।
संबंधित विगत वर्ष प्रश्न: सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणाम उपचार की उपलब्धता जितने ही निगरानी और प्राथमिक देखभाल पर निर्भर करते हैं। चर्चा कीजिए।
मूल स्रोत
गृह मंत्रालय ने महाबलीपुरम में 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद बैठक की घोषणा की। परिषद में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना के साथ पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह तथा लक्षद्वीप शामिल हैं। क्षेत्रीय परिषदें राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धाराओं 15 से 22 के अंतर्गत स्थापित हैं और उनकी भूमिका परामर्शी है। मुख्य सचिवों की स्थायी समिति राज्यों के प्रस्तावों पर पहले विचार करती है; शेष विषय परिषद के समक्ष आते हैं। घोषित कार्यसूची में जल बंटवारा, आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, नागरिक उड्डयन, शिक्षा, आवास और Fast Track Special Courts जैसे अंतर-राज्य तथा केंद्र-राज्य प्रश्न शामिल हैं। आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार जून 2014 से लगभग 12 वर्षों में परिषदों और उनकी स्थायी समितियों की 69 बैठकें हुईं। इसका महत्व संरचित वार्ता में है, बाध्यकारी निर्णय में नहीं।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS Paper 2 में परिषद न्यायालयों और औपचारिक वित्तीय निकायों के बाहर सहकारी संघवाद का उदाहरण है। इसकी शक्ति बार-बार होने वाला संवाद, वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कार्यसूची की तैयारी तथा मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय गृह मंत्री का राजनीतिक स्वामित्व है। परामर्शी स्वरूप इसकी सीमा भी है, क्योंकि क्रियान्वयन सहमति, विभागीय अनुवर्ती कार्रवाई और पारदर्शी निगरानी पर निर्भर करता है। उत्तर में वार्ता मंच और न्यायनिर्णय तंत्र की तुलना करते हुए जल, पुनर्गठन और सीमा-पार सेवाओं में राजनीतिक समायोजन तथा विधिक स्पष्टता दोनों की जरूरत बतानी चाहिए।
संभावित प्रश्न: अंतर-राज्य और केंद्र-राज्य विषयों के समाधान हेतु परामर्शी संस्थाओं के रूप में क्षेत्रीय परिषदों के योगदान और सीमाओं का आकलन कीजिए।
संबंधित विगत वर्ष प्रश्न: अंतर-राज्य परामर्श के संस्थागत तंत्र सहकारी संघवाद को कैसे मजबूत कर सकते हैं? चर्चा कीजिए।
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लोक प्रशासन और शासन सुधार पर भारत-मलेशिया संयुक्त कार्य समूह की दूसरी बैठक ने भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग कार्यक्रम के अंतर्गत सहयोग की समीक्षा की और मलेशिया के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए विशेष क्षमता-विकास कार्यक्रमों पर चर्चा की। अधिकारियों ने डिजिटल शासन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड सेवाओं, साइबर सुरक्षा, ब्लॉकचेन, साझा अवसंरचना और आंकड़ा-आधारित प्रशासन के अनुभव बांटे। भारत ने नागरिक शिकायत सुधार के उदाहरण के रूप में CPGRAMS और 30 मई 2026 को शुरू हुई बहुभाषी वॉइस चैटबॉट Samadhan Didi प्रस्तुत की। मलेशिया ने 2027-2029 शासन साझेदारी कार्ययोजना रखी। आधिकारिक विज्ञप्ति अगस्त 2024 में द्विपक्षीय संबंधों के व्यापक रणनीतिक साझेदारी बनने का उल्लेख भी करती है। बैठक ने समन्वय बिंदु और प्रस्तावित क्रियान्वयन ढांचा बनाया; इसने अपने-आप मापनीय सेवा परिणाम स्थापित नहीं किए।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS Paper 2 में यह भारत की क्षमता-विकास कूटनीति को घरेलू प्रशासनिक सुधार से जोड़ता है। डिजिटल साधन शिकायत दर्ज करना और विश्लेषण सरल बना सकते हैं, पर सुशासन के लिए कारणयुक्त निस्तारण, समावेशन, निजता, साइबर सुरक्षा और लेखापरीक्षण क्षमता भी चाहिए। दक्षिण-दक्षिण ज्ञान विनिमय का मूल्यांकन बैठकों या मंचों की संख्या से नहीं, क्रियान्वयन और नागरिक परिणामों से होना चाहिए। तकनीकी सहयोग रणनीतिक साझेदारी को व्यावहारिक गहराई दे सकता है।
संभावित प्रश्न: डिजिटल लोक प्रशासन घरेलू सुधार का साधन और क्षमता-विकास कूटनीति का माध्यम दोनों है। इसकी संभावनाओं और सुरक्षा उपायों का परीक्षण कीजिए।
संबंधित विगत वर्ष प्रश्न: सार्वजनिक सेवाओं को अधिक नागरिक-केंद्रित बनाने में प्रौद्योगिकी और संस्थागत क्षमता की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
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जीएस पेपर 3 — अर्थव्यवस्था, पर्यावरण, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, सुरक्षा
अवसंरचना, पर्यावरण और विज्ञान विषयों को क्रियान्वयन तथा प्रमाण से पढ़िए। क्षमता विस्तार को बहु-माध्यम संपर्क चाहिए; स्वच्छ माल नियमों को संक्रमण सहायता और प्रवर्तन; प्रयोगशाला चयनात्मकता को नैदानिक सत्यापन; माल प्रक्रिया सरलता को सुरक्षित अभिरक्षा चाहिए। अनुमान, पायलट या पूर्व-नैदानिक परिणाम को पूर्ण राष्ट्रीय उपलब्धि न मानें।
आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने रेल मंत्रालय की चार बहु-लाइन परियोजनाओं को लगभग 9,450 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत के साथ मंजूरी दी है और इन्हें 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य है। खड़गपुर-भद्रक, भद्रक-हरिदासपुर, गुम्मिडीपुंडी-गुडूर और कटक-पारादीप खंडों में कुल लगभग 410 किमी नेटवर्क जोड़ा जाएगा। परियोजनाएं पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के आठ जिलों को प्रभावित करेंगी। आधिकारिक विज्ञप्ति इन्हें PM Gati Shakti की एकीकृत योजना से जोड़ती है तथा लगभग 6,448 गांवों और करीब 60 लाख आबादी के लिए बेहतर संपर्क एवं 76 MTPA अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता का अनुमान देती है। इसमें लगभग 13 करोड़ लीटर तेल की बचत और करीब 65 करोड़ किग्रा कार्बन-डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी का अनुमान भी है। ये परियोजना-स्तर के अनुमान हैं, प्राप्त परिणाम नहीं।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS Paper 3 के लिए यह निर्णय परिवहन अवसंरचना, रसद दक्षता, क्षेत्रीय विकास और निम्न-कार्बन संक्रमण को जोड़ता है। उत्तर में मंजूरी और वास्तविक क्रियान्वयन के बीच अंतर करते हुए भूमि एवं पर्यावरण स्वीकृति, अंतिम-मील संपर्क, समयबद्ध निर्माण और सड़क से रेल की ओर माल ढुलाई के स्थानांतरण का विश्लेषण करना चाहिए। यह उदाहरण बताता है कि सार्वजनिक निवेश में आर्थिक लाभ, पारिस्थितिक सुरक्षा और मापनीय प्रगति सूचक एक साथ आवश्यक हैं।
संभावित प्रश्न: भारत की रसद लागत घटाने के लिए रेल क्षमता विस्तार आवश्यक है, किंतु पर्याप्त नहीं। बहु-माध्यम योजना, परियोजना क्रियान्वयन और पर्यावरणीय सुरक्षा के संदर्भ में चर्चा कीजिए।
संबंधित विगत वर्ष प्रश्न: समावेशी वृद्धि और क्षेत्रीय विकास के लिए दक्ष परिवहन अवसंरचना के महत्व पर चर्चा कीजिए।
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वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने Direction No. 102 के माध्यम से दिल्ली-NCR में पारंपरिक N1 और N2 हल्के मालवाहक वाहनों के नए पंजीकरण पर चरणबद्ध प्रतिबंध मंजूर किए हैं। शुरुआत दिल्ली और अधिक वाहन-घनत्व वाले जिलों से होगी। आयोग के अनुसार हल्के मालवाहक वाहन सक्रिय वाहन समूह का लगभग 1.2% हैं, पर उसी समूह के कणीय उत्सर्जन में उनका योगदान करीब 3.3% है। Direction No. 103 स्टोन-क्रशिंग इकाइयों की संचालन-सहमति में CPCB के धूल-नियंत्रण निर्देश शामिल करती है और वीडियो, कण सेंसर तथा पहिया-धुलाई जैसी दूरस्थ निगरानी जोड़ती है। बैठक ने जैव-द्रव्य सह-दहन लक्ष्य न पाने वाले छह ताप विद्युत संयंत्रों पर 61.85 करोड़ रुपये पर्यावरणीय प्रतिपूर्ति तथा चार वायु-गुणवत्ता शोध परियोजनाओं के लिए 3,25,56,393 रुपये की सहायता भी दर्ज की।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS Paper 3 में यह बहु-क्षेत्राधिकार वाले वायु-क्षेत्र शासन का उपयोगी उदाहरण है। नीति को केवल आपात प्रतिबंधों पर निर्भर रहने के बजाय अधिक उत्सर्जन वाले वाहन वर्ग और भगोड़ी धूल को लक्षित करना होगा। उत्तर में CAQM के वैधानिक समन्वय, छोटे मालवाहक संचालकों के लिए न्यायसंगत संक्रमण, सेंसर आंकड़ों की विश्वसनीयता, प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों की प्रवर्तन क्षमता और स्वतंत्र सत्यापन पर विचार होना चाहिए। घोषित उपायों को वास्तविक परिवेशी वायु सुधार से अलग करके देखना भी जरूरी है।
संभावित प्रश्न: वायु-क्षेत्र आधारित विनियमन स्वच्छ शहरी माल परिवहन को आजीविका और अनुपालन लागत के साथ कैसे संतुलित कर सकता है? संस्थागत तथा प्रवर्तन आवश्यकताओं का परीक्षण कीजिए।
संबंधित विगत वर्ष प्रश्न: शहरी वायु प्रदूषण के कारणों का परीक्षण करते हुए समन्वित नियामकीय और प्रौद्योगिकीय उपाय सुझाइए।
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Institute of Advanced Study in Science and Technology और IIT Guwahati के शोधकर्ताओं ने RK-251 नामक प्रोड्रग विकसित की, जो प्रतिक्रियाशील ऑक्सीजन प्रजातियों से सक्रिय होती है और GSTP1 अवरोधक NBDHEX को मुक्त करती है। Journal of Medicinal Chemistry में प्रकाशित शोध के अनुसार डिजाइन में निकट-अवरक्त फ्लोरोफोर और ROS-संवेदी इकाई जोड़ी गई। प्रयोगशाला परीक्षणों में सक्रियण के बाद अवरोधक मुक्त हुआ तथा ट्रिपल-नेगेटिव स्तन कैंसर कोशिकाओं पर गैर-घातक कोशिकाओं की तुलना में अधिक प्रभाव दिखा। विकसित हो रहे zebrafish भ्रूणों में रिपोर्ट किए गए परीक्षणों के दौरान स्पष्ट असामान्यता या तीव्र विषाक्तता नहीं दिखी। GSTP1 कई कैंसर कोशिकाओं में अधिक पाया जाता है और कुछ कैंसररोधी औषधियों को निष्क्रिय कर सकता है। प्रमाण अभी पूर्व-नैदानिक हैं; ये मानव सुरक्षा, खुराक, प्रभावशीलता या श्रेष्ठता सिद्ध नहीं करते। इसलिए इसे कीमोथेरेपी का तैयार विकल्प कहना समयपूर्व होगा।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS Paper 3 में यह लक्षित प्रोड्रग डिजाइन, रूपांतरणीय चिकित्सा और प्रमाण-संवेदी विज्ञान संचार का उदाहरण है। उत्तर में ट्यूमर-संबद्ध जैवरासायनिक संकेत से औषधि सक्रिय करने का सिद्धांत समझाना चाहिए, किंतु पूर्व-नैदानिक चयनात्मकता को मानव उपचार की सफलता नहीं मानना चाहिए। सार्वजनिक शोध सहायता, बौद्धिक संपदा, विष-विज्ञान, चरणबद्ध नैदानिक परीक्षण, नियामकीय समीक्षा और सफल होने पर वहनीय पहुंच प्रमुख नीति प्रश्न हैं।
संभावित प्रश्न: लक्षित कैंसर उपचार की पूर्व-नैदानिक संभावना को नैदानिक प्रभावशीलता से अलग रखना क्यों आवश्यक है? रूपांतरण के वैज्ञानिक और नियामकीय चरण समझाइए।
संबंधित विगत वर्ष प्रश्न: जैव-प्रौद्योगिकी शोध को वहनीय स्वास्थ्य सेवा में बदलने की संभावनाओं तथा नैतिक-नियामकीय चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।
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नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने चेन्नई-दिल्ली-फ्रैंकफर्ट मार्ग पर अवधारणा-परीक्षण के बाद दिल्ली के IGI हवाई अड्डे पर घरेलू-से-अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट माल संचालन का विस्तार किया। पायलट 20 जून 2026 को शुरू हुआ और इसमें 280 MT माल संभाला गया। मंत्रालय के अनुसार औसत आरंभ-से-अंत पारगमन समय 60 घंटे से घटकर 20 घंटे हुआ तथा विमान क्षमता उपयोग 75% से बढ़कर लगभग 100% पहुंचा। अब बेंगलुरु, अहमदाबाद, मुंबई और हैदराबाद घरेलू उद्गम तथा लंदन और कोपेनहेगन अंतरराष्ट्रीय गंतव्य जोड़े गए हैं। इन मार्गों पर मासिक माल 1,763 MT से 3,183 MT, अर्थात लगभग 80% बढ़ने का अनुमान है। AVSEC Circular No. 6/2024 के Addendum-II के अंतर्गत सुरक्षित माल समर्पित सुरक्षा क्षेत्र से निर्धारित सुरक्षा उपायों के साथ दोबारा जांच के बिना गुजर सकता है। यह पायलट और अनुमान है, राष्ट्रव्यापी परिणाम नहीं।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS Paper 3 में सुधार रसद प्रतिस्पर्धा, विमानन सुरक्षा, केंद्र-आश्रित नेटवर्क और व्यापार सुविधा को जोड़ता है। दोहराई गई जांच हटाने से समय और लागत तभी घटेंगे जब अभिरक्षा-श्रृंखला, सीमा-शुल्क समन्वय, आंकड़ा साझाकरण और भौतिक सुरक्षा विश्वसनीय रहें। उत्तर में अन्य हवाई अड्डों पर विस्तार, विमान सेवा नेटवर्क की अर्थव्यवस्था और स्वतंत्र निष्पादन रिपोर्टिंग का आकलन होना चाहिए। यह जोखिम-आधारित विनियमन का उदाहरण है, जिसमें प्रक्रिया सरल होती है, सुरक्षा उद्देश्य नहीं।
संभावित प्रश्न: जोखिम-आधारित विनियमन सुरक्षा को कमजोर किए बिना रसद दक्षता बढ़ा सकता है। वायु-माल ट्रांसशिपमेंट सुधार के संदर्भ में विश्लेषण कीजिए।
संबंधित विगत वर्ष प्रश्न: रसद सुधार नियामकीय और सुरक्षा उपाय सुरक्षित रखते हुए निर्यात प्रतिस्पर्धा कैसे बढ़ा सकते हैं?
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