अंतरराष्ट्रीय संबंधGS Paper 2 · 23 अगस्त 2026
भारत और ब्रिटेन ने विजन 2035 रूपरेखा के अंतर्गत रक्षा सहयोग बढ़ाया
भारत और ब्रिटेन ने नई दिल्ली में 25वीं रक्षा परामर्श समूह बैठक की और संयुक्त अभ्यास, पेशेवर प्रशिक्षण, अनुसंधान एवं विकास, समुद्री सहयोग तथा रक्षा-उद्योग साझेदारी बढ़ाने पर सहमति जताई। चर्चा को भारत-ब्रिटेन विजन 2035 और दस-वर्षीय रक्षा औद्योगिक कार्ययोजना से जोड़ा गया। बैठक का संकेत है कि दोनों देश रणनीतिक साझेदारी को अवसरवादी खरीद घोषणाओं तक सीमित न रखकर नियमित सैन्य संपर्क, प्रौद्योगिकी सहयोग और उद्योग संबंधों में बदलना चाहते हैं।
यूपीएससी के लिए महत्व
GS Paper 2 में रणनीतिक साझेदारी, समुद्री सुरक्षा और रक्षा कूटनीति का विश्लेषण करें। राजनीतिक मंशा को परिचालन अंतःक्रियाशीलता, प्रौद्योगिकी परिणाम और टिकाऊ औद्योगिक सहयोग से अलग मापें तथा रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखें।
इस खबर को कैसे पढ़ें
25वीं रक्षा परामर्श समूह बैठक भारत-ब्रिटेन संबंधों को संस्थागत निरंतरता देती है। संयुक्त अभ्यास और प्रशिक्षण सेनाओं की परिचालन समझ बढ़ा सकते हैं, जबकि समुद्री सहयोग साझा समुद्री मार्गों में समन्वय मजबूत करता है। अनुसंधान तथा औद्योगिक साझेदारी आपूर्ति शृंखला विविध बना सकती है, किंतु व्यापक कार्ययोजना अपने आप प्रौद्योगिकी हस्तांतरण या घरेलू मूल्य नहीं देती। परियोजना में मील के पत्थर, बौद्धिक संपदा व्यवस्था, सुरक्षा जांच, निर्यात अनुमति और उत्पादन-रखरखाव की स्पष्टता जरूरी है। भारत को सहयोग का मूल्यांकन घोषणाओं की संख्या के बजाय तैयारी, सीख और टिकाऊ क्षमता से करना चाहिए। रणनीतिक स्वायत्तता का अर्थ विकल्प बढ़ाना है, किसी एक आपूर्तिकर्ता पर नई निर्भरता बनाना नहीं। दस-वर्षीय कार्ययोजना और विजन 2035 नियमित समीक्षा से ही अनुमानित बनेंगे। UPSC में रक्षा कूटनीति, परिचालन अंतःक्रियाशीलता और औद्योगिक साझेदारी का अंतर रखें। इनके संस्थान और जोखिम अलग हैं। राजनीतिक निकटता के बावजूद संसदीय निगरानी, खरीद की शुचिता और संवेदनशील सूचना की सुरक्षा आवश्यक है। अंतिम कसौटी बेहतर सुरक्षा और घरेलू क्षमता के साथ संप्रभु निर्णय-क्षमता का संरक्षण है। छोटे उद्यमों और शोध संस्थानों को सहयोग में निष्पक्ष अवसर मिलना चाहिए ताकि लाभ केवल बड़े ठेकेदारों तक सीमित न रहे। संयुक्त मूल्यांकन परिचालन सीख, देरी और घरेलू कौशल निर्माण दर्ज करे। इससे प्रतीकात्मक कूटनीति और उपयोगी क्षमता का अंतर स्पष्ट रहेगा और संस्थागत जवाबदेही भी बढ़ेगी।
पेपर का व्यापक संदर्भ
GS-2 की खबरों को संस्थागत विश्वास से पढ़ें। स्वास्थ्य चेतावनी को प्रभावी संचार, लोक अदालत को वास्तविक सहमति और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को निरंतर अनुवर्ती कार्रवाई चाहिए। घोषणा साधन है; सुरक्षा, न्यायपूर्ण समाधान और टिकाऊ सहयोग परिणाम हैं।
संभावित प्रश्न
कूटनीतिक मंशा जब निरंतर परिचालन और औद्योगिक क्षमता बनाती है, तभी रक्षा साझेदारी रणनीतिक मूल्य पाती है। चर्चा कीजिए।
त्वरित अभ्यास
Q1
परिचालन रक्षा सहयोग का स्पष्ट प्रमाण क्या है?
- मूल्यांकन सहित संयुक्त अभ्यास
- बिना गतिविधि नारा
- असंबंधित मेला
- सेनाओं में संपर्क न होना
उत्तर देखें
सही उत्तर: मूल्यांकन सहित संयुक्त अभ्यास
दोहराए जा सकने वाले अभ्यास अंतःक्रियाशीलता बनाते हैं।
Q2
औद्योगिक कार्ययोजना को मील के पत्थर क्यों चाहिए?
- सुरक्षा जांच हटाने हेतु
- मंशा को जवाबदेह क्रियान्वयन बनाने हेतु
- अनुसंधान रोकने हेतु
- खरीद शुचिता हटाने हेतु
उत्तर देखें
सही उत्तर: मंशा को जवाबदेह क्रियान्वयन बनाने हेतु
मील के पत्थर क्षमता संबंधी प्रतिबद्धता मापते हैं।
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