GS-2 की खबरों को संस्थागत विश्वास से पढ़ें। स्वास्थ्य चेतावनी को प्रभावी संचार, लोक अदालत को वास्तविक सहमति और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को निरंतर अनुवर्ती कार्रवाई चाहिए। घोषणा साधन है; सुरक्षा, न्यायपूर्ण समाधान और टिकाऊ सहयोग परिणाम हैं।
केंद्र सरकार ने क्लोरफेनिरामाइन मेलिएट और फिनाइलएफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड वाले नियत-मात्रा संयोजन पर यह चेतावनी लिखना अनिवार्य किया है कि चार वर्ष से कम आयु के बच्चों में इसका उपयोग न किया जाए। चेतावनी लेबल, पैकेज के भीतर दिए निर्देश और प्रचार सामग्री में भी होगी। यह निर्णय विशेषज्ञ समिति तथा औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड की संस्तुति के बाद लिया गया। इसका उद्देश्य उस जोखिम को घटाना है जिसमें परिचित खांसी-सर्दी की दवा को छोटे बच्चों के लिए बिना पर्याप्त सावधानी के सामान्य घरेलू उपचार मान लिया जाता है।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS Paper 2 में यह विषय जन-स्वास्थ्य, औषधि विनियमन और सूचित सहमति से जुड़ता है। तकनीकी सलाह बाध्यकारी लेबल में कैसे बदलती है, चिकित्सक और विक्रेता जोखिम कैसे समझाते हैं तथा औषधि-सतर्कता क्यों जरूरी है—इसे स्पष्ट करें।
संभावित प्रश्न: तकनीकी मानक स्पष्ट सूचना और जिम्मेदार व्यवहार बनें, तभी औषधि-सुरक्षा विनियमन सफल होता है। चर्चा कीजिए।
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सर्वोच्च न्यायालय का समाधान समारोह 21 से 23 अगस्त 2026 तक विशेष लोक अदालत के रूप में संपन्न हो रहा है। पहल 21 अप्रैल को शुरू हुई थी और स्वैच्छिक समझौते के योग्य लंबित मामलों की पहचान की गई। इसमें वैवाहिक, श्रम, सेवा, भूमि अधिग्रहण, क्षतिपूर्ति, वाणिज्यिक तथा समझौता-योग्य आपराधिक विवाद शामिल हैं। लोक अदालत विवादित निर्णय थोपती नहीं; समाधान पक्षों की सहमति पर निर्भर है। इसलिए यह लंबित मामलों के प्रबंधन को सहभागी न्याय से जोड़ती है।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS Paper 2 में इसे न्याय तक पहुंच, वैकल्पिक विवाद समाधान और न्यायिक लंबितता से जोड़ें। गति और कम लागत के साथ सूचित सहमति, विधिक सहायता तथा कमजोर पक्ष पर दबाव रोकने वाले उपाय आवश्यक हैं।
संभावित प्रश्न: लोक अदालत न्याय तक पहुंच सुधार सकती है, पर निपटारे की संख्या अकेले निष्पक्षता सिद्ध नहीं करती। परीक्षण कीजिए।
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भारत और ब्रिटेन ने नई दिल्ली में 25वीं रक्षा परामर्श समूह बैठक की और संयुक्त अभ्यास, पेशेवर प्रशिक्षण, अनुसंधान एवं विकास, समुद्री सहयोग तथा रक्षा-उद्योग साझेदारी बढ़ाने पर सहमति जताई। चर्चा को भारत-ब्रिटेन विजन 2035 और दस-वर्षीय रक्षा औद्योगिक कार्ययोजना से जोड़ा गया। बैठक का संकेत है कि दोनों देश रणनीतिक साझेदारी को अवसरवादी खरीद घोषणाओं तक सीमित न रखकर नियमित सैन्य संपर्क, प्रौद्योगिकी सहयोग और उद्योग संबंधों में बदलना चाहते हैं।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS Paper 2 में रणनीतिक साझेदारी, समुद्री सुरक्षा और रक्षा कूटनीति का विश्लेषण करें। राजनीतिक मंशा को परिचालन अंतःक्रियाशीलता, प्रौद्योगिकी परिणाम और टिकाऊ औद्योगिक सहयोग से अलग मापें तथा रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखें।
संभावित प्रश्न: कूटनीतिक मंशा जब निरंतर परिचालन और औद्योगिक क्षमता बनाती है, तभी रक्षा साझेदारी रणनीतिक मूल्य पाती है। चर्चा कीजिए।
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नौ ब्रिक्स सदस्य देशों के पर्यटन मंत्रियों ने चार प्राथमिकताओं वाली जयपुर घोषणा अपनाई—डिजिटल परिवर्तन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सतत एवं आपदा-सह पर्यटन, कौशल एवं क्षमता निर्माण और निर्बाध यात्रा। घोषणा पर्यटन को आर्थिक तथा सांस्कृतिक सेतु मानती है और स्वीकार करती है कि प्रतिस्पर्धा अब डिजिटल प्रणालियों, प्रशिक्षित कर्मियों, गंतव्य की सहनक्षमता और सरल आवागमन पर निर्भर है। इसका वास्तविक मूल्य तभी होगा जब सहयोग साझा मानक, परस्पर सीख और स्थानीय समुदायों के लिए मापनीय लाभ दे।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS Paper 2 में ब्रिक्स सहयोग को बहुपक्षीय संस्थाओं और जन-संपर्क से जोड़ें; GS Paper 3 में पर्यटन को रोजगार और सतत विकास से संबंधित करें। प्रौद्योगिकी का मूल्यांकन सुलभता, निजता और स्थानीय आजीविका के परिणामों से करें।
संभावित प्रश्न: पर्यटन सहयोग को डिजिटल नवाचार और सरल यात्रा के साथ सतत स्थानीय विकास जोड़ना चाहिए। विश्लेषण कीजिए।
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