अंतरराष्ट्रीय संबंधGS Paper 2 · 27 अगस्त 2026
भारत-वियतनाम तटरक्षक संवाद ने समुद्री साझेदारी को परिचालन सहयोग में बदला
भारतीय तटरक्षक और वियतनाम तटरक्षक की 7वीं उच्चस्तरीय बैठक 2015 के सहयोग समझौते के अंतर्गत 25 अगस्त को चेन्नई में हुई। दोनों सेवाओं ने पेशेवर आदान-प्रदान और पोत यात्राओं की समीक्षा की तथा समुद्री खोज-बचाव, कानून प्रवर्तन, समुद्री प्रदूषण प्रतिक्रिया और क्षमता निर्माण पर ध्यान दिया। उन्होंने नियमित संस्थागत संवाद, प्रशिक्षण और परिचालन अनुभव साझा करने पर भी बल दिया। बैठक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हिंद महासागर और हिंद-प्रशांत के अनेक जोखिम सीमा-पार हैं। समुद्र में संकट, अवैध गतिविधि और प्रदूषण को केवल एक अधिकार-क्षेत्र प्रभावी ढंग से नहीं संभाल सकता। तटरक्षक सहयोग सैन्य गठबंधन से अलग है। यह मानवीय, पर्यावरणीय और समुद्री कानून संबंधी दायित्वों के लिए व्यावहारिक अंतर-संचालन बनाता है और भारत-वियतनाम विश्वास को मजबूत करता है। टिकाऊ सहयोग के लिए स्पष्ट कानूनी अधिकार, संचार व्यवस्था, संगत प्रक्रिया और अभ्यास या वास्तविक घटना के बाद मूल्यांकन आवश्यक है।
यूपीएससी के लिए महत्व
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 में भारत-वियतनाम संबंध को एक्ट ईस्ट नीति और संस्थागत समुद्री सहयोग से जोड़ें। प्रश्नपत्र 3 में अंतर-संचालन को तटीय सुरक्षा, आपदा प्रतिक्रिया और समुद्री प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित करें।
इस खबर को कैसे पढ़ें
समुद्री सुरक्षा को प्रायः युद्धपोत और प्रतिरोध से समझाया जाता है, किंतु रोजमर्रा की सुरक्षा तटरक्षक जैसी नागरिक-कानून प्रवर्तन संस्थाओं पर अधिक निर्भर है। तटरक्षक पोत की जांच, बचाव समन्वय, उल्लंघन की पड़ताल और प्रदूषण नियंत्रण घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के अंतर्गत करते हैं। इसलिए सहयोग के लिए केवल राजनयिक सद्भाव पर्याप्त नहीं। संकट संदेश ज्ञात संपर्क बिंदु तक पहुंचे, दल साझा शब्दावली और संगत संचार अपनाएं तथा बचाए गए व्यक्ति या साक्ष्य सौंपने के नियम स्पष्ट हों। प्रशिक्षण और पोत यात्रा परिचय बढ़ाते हैं, पर अंतर-संचालन को प्रतिक्रिया समय, समन्वय त्रुटि और प्रक्रिया में शामिल सीख से मापना चाहिए। भारत और वियतनाम अलग परिचालन अनुभव लाते हैं, इसलिए संबंध एकतरफा सहायता नहीं, पारस्परिक सीख बने। कानूनी सीमा भी जरूरी है। समुद्री प्रवर्तन अधिकार-क्षेत्र, मानव अधिकार, मत्स्य नियम और पर्यावरण दायित्व का सम्मान करे। सूचना साझा करते समय संवेदनशील परिचालन आंकड़ों की सुरक्षा हो। प्रदूषण प्रतिक्रिया सार्वजनिक वस्तु का उदाहरण है, क्योंकि समुद्री धाराएं सीमा नहीं मानतीं और शीघ्र सूचना पारिस्थितिक तथा आजीविका हानि घटा सकती है। अंतिम लाभार्थी तटीय समुदाय और नाविक हैं, इसलिए नागरिक विभाग भी जुड़ें। UPSC में इसे एक्ट ईस्ट, नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था और गैर-पारंपरिक सुरक्षा से जोड़ें। हर संवाद को किसी तीसरे देश के विरुद्ध संकेत न मानें।
पेपर का व्यापक संदर्भ
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 में देखें कि आयोग, कार्य समूह और तटरक्षक संवाद राजनयिक इच्छा को नियम, प्रक्रिया और मापनीय सहयोग में कैसे बदलते हैं। संस्थागत क्षमता को औपचारिक संकेत से अलग करें।
संभावित प्रश्न
तटरक्षक साझेदारी सैन्य गठबंधन बने बिना क्षेत्रीय सुरक्षा गहरी कर सकती है। समुद्री कानून प्रवर्तन, मानवीय प्रतिक्रिया और पर्यावरण संरक्षण में इसकी भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
त्वरित अभ्यास
Q1
7वीं भारत-वियतनाम तटरक्षक बैठक किस ढांचे के अंतर्गत हुई?
- 2015 का सहयोग समझौता
- सीमा शुल्क संघ
- पारस्परिक रक्षा संधि
- मत्स्य सब्सिडी समझौता
उत्तर देखें
सही उत्तर: 2015 का सहयोग समझौता
आधिकारिक विज्ञप्ति बैठक को 2015 के तटरक्षक सहयोग समझौते के अंतर्गत रखती है।
Q2
कौन-सी गतिविधि सैन्य गठबंधन के बजाय तटरक्षक सहयोग को दर्शाती है?
- परमाणु प्रतिरोध
- क्षेत्रीय विलय
- सामूहिक युद्ध योजना
- खोज-बचाव और प्रदूषण प्रतिक्रिया
उत्तर देखें
सही उत्तर: खोज-बचाव और प्रदूषण प्रतिक्रिया
खोज-बचाव, कानून प्रवर्तन और प्रदूषण नियंत्रण तटरक्षक के प्रमुख मानवीय तथा नियामक कार्य हैं।
संबंधित विगत वर्ष प्रश्न
- UPSC सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2: भारत और पड़ोस; भारत के हितों को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय और क्षेत्रीय समूह