राजव्यवस्था और शासनGS Paper 2 · 28 अगस्त 2026
भारत-अफ्रीका संवाद ने परस्पर-संचालनीय भूमि अभिलेखों को डिजिटल शासन के केंद्र में रखा
अफ्रीकी संघ आयोग, अफ्रीकी देशों के प्रतिनिधियों और UNDP से जुड़े एक प्रतिनिधिमंडल ने भूमि शासन के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना मॉडल पर भारत के भूमि संसाधन विभाग से संवाद किया। तकनीकी चर्चा में डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम, भू-आधार अथवा ULPIN, राष्ट्रीय सामान्य दस्तावेज पंजीकरण प्रणाली, भारत लैंड स्टैक और NAKSHA शहरी मानचित्रण पायलट शामिल थे। कंप्यूटरीकृत अभिलेख, डिजिटीकृत भू-नक्शे और परस्पर-संचालनीय पहचानकर्ता पारदर्शी तथा सुलभ भूमि प्रशासन के साधन हैं। परंतु तकनीक स्वयं स्वामित्व विवाद नहीं सुलझाती, पुरानी त्रुटियां नहीं सुधारती और कमजोर कब्जाधारकों की रक्षा सुनिश्चित नहीं करती। साझा मानक, सत्यापन योग्य अद्यतन और सेवाओं का एकीकरण उपयोगी हैं, किंतु प्रत्येक व्यवस्था को विधिसम्मत निर्णय, निजता सुरक्षा, स्थानीय भाषा में पहुंच और स्पष्ट सुधार प्रक्रिया बनाए रखनी होगी। यह यात्रा दक्षिण-दक्षिण सहयोग का उदाहरण है, जिसमें घरेलू डिजिटल प्रणाली को तैयार निर्यात मॉडल नहीं बल्कि संस्थागत सीख के विषय के रूप में देखा जाता है।
यूपीएससी के लिए महत्व
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 में भूमि प्रशासन को डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, सहकारी संघवाद, उचित प्रक्रिया, डेटा संरक्षण और दक्षिण-दक्षिण सहयोग से जोड़ें। सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 में स्वच्छ अभिलेखों का ऋण, निवेश और शहरी नियोजन से संबंध देखें।
इस खबर को कैसे पढ़ें
भूमि सूचना अत्यंत संवेदनशील है, क्योंकि एक डिजिटल प्रविष्टि कब्जे, ऋण, कर, नियोजन और मुकदमे को प्रभावित कर सकती है। परस्पर-संचालनीयता तब उपयोगी है जब सर्वेक्षण नक्शे, स्वामित्व अभिलेख और पंजीकरण घटनाएं अलग विभागीय फाइलों में बंद रहने के बजाय एक-दूसरे से जांची जा सकें। विशिष्ट भूखंड पहचानकर्ता अस्पष्टता घटा सकता है और साझा पंजीकरण सॉफ्टवेयर लेनदेन का पता रखना आसान कर सकता है। परंतु गलत प्रविष्टि सभी प्रणालियों में सहजता से पहुंचे तो डिजिटलीकरण त्रुटि का विस्तार भी करता है। इसलिए व्यवस्था को स्रोत-क्रम सुरक्षित रखना चाहिए—किसने, किस अधिकार से, किस दस्तावेज के आधार पर परिवर्तन किया और प्रभावित व्यक्ति को कैसी सूचना मिली। सुधार का रास्ता ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों हो, स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध हो तथा कारणयुक्त निर्णय पर आधारित हो। भूमि प्रशासन में राज्यों की प्रमुख भूमिका के कारण संघीय विविधता महत्वपूर्ण है; साझा मानक वैधानिक भिन्नताओं को मिटाए बिना आदान-प्रदान सक्षम करें। भारत-अफ्रीका संवाद साझा प्रशासनिक समस्याओं पर आधारित दक्षिण-दक्षिण सहयोग का उदाहरण है। सफलता किसी मंच की हूबहू नकल में नहीं, खुले मानक, मॉड्यूलर सेवाएं, सत्यापित अद्यतन और नागरिक उपचार जैसे सिद्धांतों के स्थानीय अनुकूलन में है। दक्षता को अधिकारों से संतुलित करें। सर्वोत्तम डिजिटल भूमि प्रणाली वही है जिसके अभिलेख तेज होने के साथ वैधानिक, समझने योग्य और सुधार योग्य हों।
पेपर का व्यापक संदर्भ
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 में योजना के उद्देश्य से अधिक क्रियान्वयन तंत्र की तुलना करें। जिला स्वास्थ्य क्षमता, डिजिटल भूमि अभिलेख और पथ विक्रेता सहायता—तीनों में स्पष्ट जिम्मेदारी, शासन के विभिन्न स्तरों का समन्वय और छूटे पात्र व्यक्ति के लिए प्रभावी उपचार चाहिए।
संभावित प्रश्न
डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना भूमि प्रशासन को तभी सुधार सकती है जब परस्पर-संचालनीयता के साथ उचित प्रक्रिया, सुधार का अधिकार और स्थानीय संस्थागत क्षमता उपलब्ध हो। भारत-अफ्रीका सहयोग के संदर्भ में चर्चा कीजिए।
त्वरित अभ्यास
Q1
भारत-अफ्रीका संवाद में चर्चा की गई कौन-सी पहल भूखंड को विशिष्ट पहचान देती है?
- NAKSHA
- भू-आधार अथवा ULPIN
- PM SVANidhi
- RuPay
उत्तर देखें
सही उत्तर: भू-आधार अथवा ULPIN
भू-आधार अथवा ULPIN भूखंड की पहचान करता है; अन्य विकल्प शहरी मानचित्रण, पथ विक्रेता सहायता या भुगतान से जुड़े हैं।
Q2
परस्पर-संचालनीय भूमि अभिलेख में पुरानी त्रुटि हो तो सबसे मजबूत सुरक्षा क्या है?
- प्रविष्टि को तुरंत सभी प्रणालियों में दोहराना
- सभी पंजीकरण सेवाएं बंद करना
- स्वामित्व कानून की परवाह किए बिना डेटाबेस को अंतिम मानना
- स्रोत-क्रम सुरक्षित रखना, सूचना देना और विधिसम्मत सुधार मार्ग प्रदान करना
उत्तर देखें
सही उत्तर: स्रोत-क्रम सुरक्षित रखना, सूचना देना और विधिसम्मत सुधार मार्ग प्रदान करना
परस्पर-संचालनीयता त्रुटि फैला सकती है, इसलिए पता लगाए जा सकने वाले परिवर्तन, सूचना और सुलभ वैधानिक सुधार जरूरी हैं।
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