भारत की त्रि-चरणीय परमाणु रणनीति आधारभार बिजली को थोरियम आत्मनिर्भरता से जोड़ती हैविज्ञान और प्रौद्योगिकी

GS Paper 3 · 29 अगस्त 2026

भारत की त्रि-चरणीय परमाणु रणनीति आधारभार बिजली को थोरियम आत्मनिर्भरता से जोड़ती है

PIB की पृष्ठभूमि सामग्री ने भारत के त्रि-चरणीय परमाणु कार्यक्रम को निम्न-कार्बन आधारभार बिजली, ईंधन सुरक्षा और प्रौद्योगिकीय आत्मनिर्भरता के संदर्भ में रखा। भारत 8.78 गीगावाट स्थापित क्षमता वाले 24 रिएक्टर संचालित करता है और कुल 7.5 गीगावाट की नौ इकाइयां निर्माणाधीन हैं। कार्यक्रम प्राकृतिक यूरेनियम वाले दाबित भारी जल रिएक्टरों से शुरू होता है, पुनर्प्राप्त प्लूटोनियम का उपयोग फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों में करता है और अंततः उर्वर थोरियम-232 से उत्पन्न यूरेनियम-233 के उपयोग का लक्ष्य रखता है। कलपक्कम के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने अप्रैल 2026 में प्रथम क्रिटिकलिटी प्राप्त की, जो दूसरे चरण की ओर प्रगति है; इसके लगभग 90% उपकरण और प्रणालियां घरेलू रूप से बनीं। 2047 तक 100 गीगावाट का दीर्घकालिक लक्ष्य महत्वाकांक्षी है और उसका आकलन सुरक्षा, लागत, निर्माण समय, अपशिष्ट प्रबंधन, नियामकीय स्वतंत्रता, ईंधन-चक्र क्षमता और जनविश्वास से होना चाहिए। थोरियम की प्रचुरता रणनीतिक संभावना है, तत्काल उपलब्ध रिएक्टर ईंधन नहीं; प्रत्येक चरण कठिन तकनीकी और संस्थागत संक्रमण पर निर्भर है।

यूपीएससी के लिए महत्व

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 में परमाणु प्रौद्योगिकी को ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु शमन, स्वदेशी क्षमता, ब्रीडर रिएक्टर, थोरियम और परमाणु सुरक्षा से जोड़ें। आधारभार उपयोगिता को लागत, अपशिष्ट और विनियमन के विश्लेषण का विकल्प न बनाएं।

इस खबर को कैसे पढ़ें

त्रि-चरणीय कार्यक्रम भारत की संसाधन संरचना का उत्तर है। प्राकृतिक यूरेनियम पहले चरण को सहारा देता है; पुनर्प्रसंस्कृत प्लूटोनियम दूसरे चरण के फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों में ईंधन बनता है; थोरियम का विकिरण तीसरे चरण के लिए विखंडनीय यूरेनियम-233 बना सकता है। यह क्रम घरेलू थोरियम के अधिक उपयोग की संभावना देता है, पर लंबे समय तक पुनर्प्रसंस्करण, ब्रीडर संचालन, सामग्री विज्ञान, दूरस्थ प्रबंधन और अपशिष्ट शासन पर महारत मांगता है। प्रथम क्रिटिकलिटी महत्वपूर्ण अभियांत्रिकी मील-पत्थर है, निरंतर वाणिज्यिक उत्पादन के समान नहीं। परमाणु बिजली कम परिचालन कार्बन उत्सर्जन और स्थिर उत्पादन से परिवर्तनीय नवीकरणीय ऊर्जा को पूरक कर सकती है, फिर भी परियोजनाओं की पूंजी लागत, निर्माण जोखिम, शीतलन जल, दायित्व, निष्क्रियकरण और दीर्घजीवी अपशिष्ट पर जांच होनी चाहिए। घरेलू विनिर्माण गुणवत्ता आश्वासन से समझौता किए बिना रणनीतिक स्वायत्तता बढ़ा सकता है। कम संभावना वाली दुर्घटना के बड़े परिणाम होने से स्वतंत्र विनियमन और पारदर्शी घटना रिपोर्टिंग आवश्यक हैं। संतुलित निष्कर्ष है कि थोरियम भारत के दीर्घकालीन ऊर्जा विकल्प बढ़ाता है, पर विश्वसनीय विस्तार हर चरण में सिद्ध सुरक्षा, आर्थिक प्रदर्शन और संस्थागत विश्वास पर निर्भर है।

पेपर का व्यापक संदर्भ

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 में क्षमता और शीर्षक पैमाने में अंतर करें। ग्राहक संख्या, निर्यात अनुमति, IIP वृद्धि, रिएक्टर क्षमता और प्रौद्योगिकी तत्परता तभी अर्थपूर्ण हैं जब मापन, जोखिम नियंत्रण, क्रियान्वयन क्षमता और अंतिम परिणाम साथ जांचे जाएं।

संभावित प्रश्न

भारत का त्रि-चरणीय परमाणु कार्यक्रम ऊर्जा रणनीति भी है और दीर्घ तकनीकी संक्रमण भी। इसकी संभावनाओं और शासन आवश्यकताओं का परीक्षण कीजिए।

त्वरित अभ्यास

  1. Q1

    भारत के त्रि-चरणीय कार्यक्रम में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की भूमिका क्या है?

    1. केवल आयातित गैस उपयोग करना
    2. प्लूटोनियम उपयोग कर अतिरिक्त विखंडनीय पदार्थ उत्पन्न करना और यूरेनियम-233 निर्माण का आधार देना
    3. सारा रेडियोधर्मी अपशिष्ट समाप्त करना
    4. बिजली को सीधे थोरियम में बदलना
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: प्लूटोनियम उपयोग कर अतिरिक्त विखंडनीय पदार्थ उत्पन्न करना और यूरेनियम-233 निर्माण का आधार देना

    दूसरा चरण प्लूटोनियम वाले ब्रीडर रिएक्टर से अतिरिक्त विखंडनीय पदार्थ और आगे के थोरियम उपयोग का आधार बनाता है।

  2. Q2

    थोरियम को तैयार ईंधन के बजाय रणनीतिक संभावना क्यों कहा जाता है?

    1. ईंधन चक्र से उसे विखंडनीय यूरेनियम-233 में बदलना पड़ता है
    2. समुद्री रेत में वह पहले से विखंडनीय है
    3. वह किसी परमाणु प्रक्रिया में उपयोग नहीं हो सकता
    4. वह सुरक्षा विनियमन बदल देता है
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: ईंधन चक्र से उसे विखंडनीय यूरेनियम-233 में बदलना पड़ता है

    थोरियम-232 उर्वर पदार्थ है; बिजली उत्पादन के लिए पहले विखंडनीय यूरेनियम-233 उत्पन्न करना पड़ता है।

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