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Dooit UPSC Current Affairs edition for 29 August 2026 covering governance, economy, infrastructure, science and technology

डूइट करेंट अफेयर्स डेस्क · 29 अगस्त 2026

29 अगस्त 2026 · 6 तथ्य

यूपीएससी करेंट अफेयर्स — 29 अगस्त 2026

आज का संस्करण बताता है कि सार्वजनिक प्रणालियां बड़े पैमाने को भरोसेमंद क्षमता में कैसे बदलती हैं। दूरसंचार, रक्षा निर्यात, कल्याण, उद्योग, परमाणु ऊर्जा और चिकित्सा नवाचार को चार कसौटियों पर पढ़ें—शीर्षक संकेतक वास्तव में क्या मापता है, अगला कदम किस संस्था का है, त्रुटि या जोखिम सुधारने का उपाय क्या है और कौन-सा परिणाम नीति की सफलता सिद्ध करेगा।

जीएस पेपर 2 — राजव्यवस्था, शासन, अंतर्राष्ट्रीय संबंध

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 में कल्याण वितरण को उत्तरदायित्व शृंखला मानें। आवंटन, डिजिटल अंतरण और व्यय महत्वपूर्ण हैं, पर वास्तविक समानता जागरूकता, सहायक पहुंच, सही पात्रता, समय पर भुगतान, सामाजिक अंकेक्षण और बहिष्करण के प्रभावी उपचार पर निर्भर है।

अनुसूचित जाति कल्याण समीक्षा ने आवंटन से समयबद्ध वितरण पर ध्यान केंद्रित किया

सामाजिक न्याय मंत्रालय ने अनुसूचित जाति कल्याण योजनाओं की ऐसी वितरण शृंखला बताई, जिसमें छात्रवृत्ति, आवासीय शिक्षा, कोचिंग, आजीविका, कौशल और उद्यम सहायता शामिल हैं। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को धन जारी करना पूर्ण प्रस्ताव, उपयोगिता प्रमाणपत्र, योजना मानकों और जहां लागू हो वहां SNA-SPARSH से जुड़ने पर निर्भर है। छात्रवृत्ति सहायता मुख्यतः प्रत्यक्ष लाभ अंतरण से दी जाती है, जबकि क्रियान्वयन की जांच के लिए आंतरिक समीक्षा, तृतीय-पक्ष मूल्यांकन और सामाजिक अंकेक्षण किए जाते हैं। मासिक और तिमाही व्यय लक्ष्य देरी पहचान सकते हैं, पर केवल व्यय यह नहीं बताता कि प्रत्येक पात्र व्यक्ति को सही सहायता समय पर मिली या नहीं। प्रभावी सामाजिक न्याय के लिए जागरूकता, सुगम आवेदन, सही पात्रता निर्णय, शीघ्र अंतरण, अस्वीकृत या विफल मामलों में सुधार का मार्ग और शिक्षा अथवा आजीविका परिणामों का मूल्यांकन चाहिए। डिजिटल निधि प्रबंधन पता लगाने की क्षमता बढ़ा सकता है, किंतु सहायक पहुंच और शिकायत निवारण के बिना कमजोर दस्तावेज या प्रमाणीकरण बहिष्करण भी दोहरा सकते हैं।

यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 में अनुसूचित जाति कल्याण को वास्तविक समानता, केंद्र-राज्य समन्वय, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, सामाजिक अंकेक्षण, परिणाम बजट और शिकायत निवारण से जोड़ें। वित्तीय उपयोग और लाभार्थी-स्तरीय प्रभाव में अंतर करें।

संभावित प्रश्न: समय पर निधि उपयोग सामाजिक न्याय के लिए आवश्यक है, किंतु पर्याप्त नहीं। अनुसूचित जाति कल्याण वितरण को निगरानी, सामाजिक अंकेक्षण और शिकायत निवारण कैसे सुधार सकते हैं? परीक्षण कीजिए।

संबंधित विगत वर्ष प्रश्न: UPSC सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2: कमजोर वर्गों के लिए कल्याण योजनाएं और इन योजनाओं का प्रदर्शन

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जीएस पेपर 3 — अर्थव्यवस्था, पर्यावरण, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, सुरक्षा

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 में क्षमता और शीर्षक पैमाने में अंतर करें। ग्राहक संख्या, निर्यात अनुमति, IIP वृद्धि, रिएक्टर क्षमता और प्रौद्योगिकी तत्परता तभी अर्थपूर्ण हैं जब मापन, जोखिम नियंत्रण, क्रियान्वयन क्षमता और अंतिम परिणाम साथ जांचे जाएं।

दूरसंचार वृद्धि के आंकड़ों ने ग्राहक संख्या के पीछे अंतिम-मील अंतर को उजागर किया

जुलाई 2026 के दूरसंचार आंकड़ों में टेलीफोन ग्राहकों की संख्या 1,354.28 मिलियन और सेलुलर मशीन-टू-मशीन कनेक्शन सहित ब्रॉडबैंड सदस्यताएं 1,094.48 मिलियन दर्ज हुईं। यही विज्ञप्ति बताती है कि कुल पैमाने को सार्वभौमिक पहुंच नहीं माना जा सकता। ग्रामीण टेली-घनत्व 61.05% था, जबकि शहरी टेली-घनत्व 154.12% था; वायरलाइन ग्राहकों में ग्रामीण हिस्सा केवल 10.81% रहा। पीक विजिटर लोकेशन रजिस्टर पर सक्रिय वायरलेस ग्राहक 1,204.01 मिलियन थे, जो कुल वायरलेस आधार से कम हैं। सदस्यता, जनसंख्या-सापेक्ष पहुंच, स्थिर कनेक्टिविटी और सक्रिय उपयोग अलग-अलग संकेतक हैं। इसलिए नीति का लक्ष्य केवल नए कनेक्शन जोड़ना नहीं, बल्कि वंचित क्षेत्रों में सस्ती सेवा, गुणवत्ता, उपकरण उपलब्धता, डिजिटल क्षमता और भरोसेमंद बैकहॉल सुधारना होना चाहिए। परिभाषाएं भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि मशीन कनेक्शन जोड़ने से ब्रॉडबैंड संख्या बढ़ती है, पर उससे कोई अतिरिक्त व्यक्ति ऑनलाइन नहीं आता।

यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 में दूरसंचार अवसंरचना को समावेशी विकास, ग्रामीण-शहरी डिजिटल अंतर, ब्रॉडबैंड गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धा और मापन से जोड़ें। निष्कर्ष से पहले सदस्यता, टेली-घनत्व और सक्रिय उपयोग में अंतर करें।

संभावित प्रश्न: ग्राहकों की बड़ी संख्या अपने आप सार्वभौमिक डिजिटल पहुंच सिद्ध नहीं करती। भारत के अंतिम-मील संपर्क अंतर को घटाने के लिए आवश्यक संकेतकों और नीति विकल्पों का परीक्षण कीजिए।

संबंधित विगत वर्ष प्रश्न: UPSC सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3: अवसंरचना—ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेल और संचार

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रक्षा निर्यात अनुमति बार-बार स्वीकृति से जोखिम-आधारित सुविधा की ओर बढ़ी

रक्षा उत्पादन विभाग ने रक्षा निर्यात मानक संचालन प्रक्रिया को सरल बनाया और तीन अलग खुली सामान्य निर्यात अनुज्ञप्ति प्रक्रियाओं को एक ढांचे में समेकित किया। OGEL एक स्थायी अनुमति है, जिसके अंतर्गत पात्र निर्यातक निर्दिष्ट वस्तुओं की अनेक खेपों के लिए स्वयं निर्यात प्राधिकरण बना सकते हैं। इसकी वैधता दो से बढ़ाकर तीन वर्ष की गई है और देश-आवरण 41 गंतव्यों से बढ़ाकर सभी देशों तक किया गया है, पर नकारात्मक या संवेदनशील देश तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंध या हथियार निषेध वाले देश बाहर रहेंगे। गैर-घातक वस्तुओं और अंतरराष्ट्रीय निविदाओं या प्रदर्शनियों के लिए परामर्श घटाया गया है, जबकि संवेदनशील गंतव्यों, प्रौद्योगिकियों और वस्तुओं पर सुरक्षा बनी रहेगी। उद्देश्य MSME सहित निर्माताओं को तेज बाजार पहुंच देना है, न कि सुविधा के नाम पर विनियमन हटाना। मुख्य प्रश्न यह है कि नियमित लेनदेन लागत घटने के साथ जोखिम वर्गीकरण, पता लगाने योग्य अभिलेख, अंतिम उपयोग आश्वासन और प्रवर्तन कितने मजबूत रहते हैं।

यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 में रक्षा आत्मनिर्भरता और निर्यात को रणनीतिक स्वायत्तता, MSME भागीदारी, निर्यात नियंत्रण, प्रौद्योगिकी सुरक्षा और व्यवसाय सुगमता से जोड़ें। स्पष्ट करें कि सुविधा जोखिम-आधारित और लेखापरीक्षण योग्य क्यों रहनी चाहिए।

संभावित प्रश्न: परिपक्व रक्षा निर्यात व्यवस्था को रणनीतिक व्यापार नियंत्रण कमजोर किए बिना दोहरावपूर्ण अनुपालन घटाना चाहिए। संशोधित OGEL ढांचे के संदर्भ में चर्चा कीजिए।

संबंधित विगत वर्ष प्रश्न: UPSC सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीय उपलब्धियां; प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण और नई प्रौद्योगिकी का विकास

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जुलाई की औद्योगिक वृद्धि प्रमुख क्षेत्रों में व्यापक, पर असमान रही

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के त्वरित अनुमान में जुलाई 2026 के लिए 6.7% वार्षिक वृद्धि दर्ज हुई, जबकि जून का त्वरित अनुमान 7.3% था। विनिर्माण 7.3%, बिजली और गैस आपूर्ति 8.7% तथा जल आपूर्ति, सीवरेज और अपशिष्ट प्रबंधन 7.4% बढ़े, पर खनन और उत्खनन में 0.9% संकुचन हुआ। 2022-23 आधार वर्ष पर समग्र सूचकांक जुलाई 2025 के 117.0 की तुलना में 124.8 रहा। विज्ञप्ति यह भी स्पष्ट करती है कि स्रोत एजेंसियों से अद्यतन उत्पादन आंकड़े मिलने पर त्वरित अनुमान संशोधित होते हैं। इसलिए शीर्षक वृद्धि दर निदान का आरंभ है, पूर्ण निष्कर्ष नहीं। विश्लेषण में क्षेत्रों और उपयोग-आधारित वर्गों की व्यापकता, सूचकांक स्तर और वृद्धि दर का अंतर, संशोधन तथा उत्पादन का रोजगार, क्षमता उपयोग, मांग और स्थिरता से संबंध देखना चाहिए। मजबूत विनिर्माण और बिजली आंकड़ों के साथ संसाधन क्षेत्र की कमजोरी रह सकती है; अतः नीति को समान गति मानने के बजाय विशिष्ट बाधाओं पर प्रतिक्रिया करनी चाहिए।

यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 में IIP का उपयोग औद्योगिक वृद्धि, क्षेत्रीय संरचना, उच्च-आवृत्ति संकेतक और साक्ष्य-आधारित नीति के लिए करें। आधार वर्ष, वार्षिक तुलना, संशोधन और एक समग्र आंकड़े की सीमाएं स्पष्ट करें।

संभावित प्रश्न: समग्र औद्योगिक वृद्धि क्षेत्रीय विचलन और सांख्यिकीय अनिश्चितता छिपा सकती है। नीति के लिए औद्योगिक उत्पादन सूचकांक की व्याख्या कैसे की जानी चाहिए? चर्चा कीजिए।

संबंधित विगत वर्ष प्रश्न: UPSC सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा नियोजन, संसाधन जुटाने, वृद्धि, विकास और रोजगार से जुड़े मुद्दे

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भारत की त्रि-चरणीय परमाणु रणनीति आधारभार बिजली को थोरियम आत्मनिर्भरता से जोड़ती है

PIB की पृष्ठभूमि सामग्री ने भारत के त्रि-चरणीय परमाणु कार्यक्रम को निम्न-कार्बन आधारभार बिजली, ईंधन सुरक्षा और प्रौद्योगिकीय आत्मनिर्भरता के संदर्भ में रखा। भारत 8.78 गीगावाट स्थापित क्षमता वाले 24 रिएक्टर संचालित करता है और कुल 7.5 गीगावाट की नौ इकाइयां निर्माणाधीन हैं। कार्यक्रम प्राकृतिक यूरेनियम वाले दाबित भारी जल रिएक्टरों से शुरू होता है, पुनर्प्राप्त प्लूटोनियम का उपयोग फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों में करता है और अंततः उर्वर थोरियम-232 से उत्पन्न यूरेनियम-233 के उपयोग का लक्ष्य रखता है। कलपक्कम के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने अप्रैल 2026 में प्रथम क्रिटिकलिटी प्राप्त की, जो दूसरे चरण की ओर प्रगति है; इसके लगभग 90% उपकरण और प्रणालियां घरेलू रूप से बनीं। 2047 तक 100 गीगावाट का दीर्घकालिक लक्ष्य महत्वाकांक्षी है और उसका आकलन सुरक्षा, लागत, निर्माण समय, अपशिष्ट प्रबंधन, नियामकीय स्वतंत्रता, ईंधन-चक्र क्षमता और जनविश्वास से होना चाहिए। थोरियम की प्रचुरता रणनीतिक संभावना है, तत्काल उपलब्ध रिएक्टर ईंधन नहीं; प्रत्येक चरण कठिन तकनीकी और संस्थागत संक्रमण पर निर्भर है।

यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 में परमाणु प्रौद्योगिकी को ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु शमन, स्वदेशी क्षमता, ब्रीडर रिएक्टर, थोरियम और परमाणु सुरक्षा से जोड़ें। आधारभार उपयोगिता को लागत, अपशिष्ट और विनियमन के विश्लेषण का विकल्प न बनाएं।

संभावित प्रश्न: भारत का त्रि-चरणीय परमाणु कार्यक्रम ऊर्जा रणनीति भी है और दीर्घ तकनीकी संक्रमण भी। इसकी संभावनाओं और शासन आवश्यकताओं का परीक्षण कीजिए।

संबंधित विगत वर्ष प्रश्न: UPSC सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी—विकास, अनुप्रयोग और दैनिक जीवन पर प्रभाव

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PRIP की दूसरी आमंत्रण प्रक्रिया ने प्रयोगशाला से बाजार तक मील-पत्थर आधारित मार्ग बनाया

औषध विभाग ने ₹5,000 करोड़ की फार्मा और चिकित्सा-प्रौद्योगिकी अनुसंधान एवं नवाचार प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत दूसरा आवेदन आमंत्रण खोला। स्टार्टअप और MSME की प्रारंभिक परियोजनाएं प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर 1, 2 या 3 से अधिकतम TRL 5 तक बढ़ने के लिए प्रति परियोजना ₹5 करोड़ तक सहायता पा सकती हैं। TRL 4, 5 या 6 वाली बाद के चरण की परियोजनाएं ₹100 करोड़ तक सहायता मांग सकती हैं, जो स्वीकृत लागत के 35% तक सीमित होगी; शेष राशि आवेदक सह-वित्तपोषित करेगा। दो-मार्गी रचना मानती है कि खोज, सत्यापन और पैमाना-वृद्धि में अलग जोखिम होते हैं। इसलिए सार्वजनिक धन तकनीकी रूप से सार्थक मील-पत्थर, स्वतंत्र समीक्षा, रोगी सुरक्षा, बौद्धिक संपदा रणनीति और विनिर्माण अथवा अपनाने के विश्वसनीय मार्ग से जुड़ना चाहिए। TRL किसी पाइपलाइन को व्यवस्थित करता है, पर नैदानिक मूल्य या वहनीयता सिद्ध नहीं करता। सफलता का माप उपयोगी उत्पाद, नियामकीय साक्ष्य, घरेलू क्षमता और सार्वजनिक स्वास्थ्य पहुंच होना चाहिए, केवल स्वीकृत आवेदनों या वितरित धन की संख्या नहीं।

यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 में औषध नवाचार को अनुसंधान वित्त, स्टार्टअप, MSME, प्रौद्योगिकी तत्परता, व्यावसायीकरण और आत्मनिर्भरता से जोड़ें। प्रश्नपत्र 2 में स्वास्थ्य-तंत्र की जरूरत, सुरक्षा और वहनीयता देखें।

संभावित प्रश्न: सार्वजनिक अनुसंधान सहायता को प्रौद्योगिकी तत्परता को जन-स्वास्थ्य मूल्य समझे बिना प्रयोगशाला से बाजार के अंतर को पाटना चाहिए। PRIP योजना के संदर्भ में चर्चा कीजिए।

संबंधित विगत वर्ष प्रश्न: UPSC सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3: प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण और नई प्रौद्योगिकी का विकास

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आज के पाँच प्रश्न

उत्तर देखने से पहले इन्हें हल करें। प्रत्येक व्याख्या बताती है कि आकर्षक गलत विकल्प क्यों विफल होता है।

  1. कौन-सा युग्म सही सुमेलित है?

    1. टेली-घनत्व—जनसंख्या के सापेक्ष सदस्यता
    2. OGEL—हर गंतव्य के लिए स्वतः अनुमति
    3. IIP—परिवार की संपत्ति का माप
    4. TRL—नैदानिक वहनीयता का प्रमाण
    उत्तर

    टेली-घनत्व—जनसंख्या के सापेक्ष सदस्यता

    टेली-घनत्व सदस्यता को जनसंख्या से जोड़ता है; अन्य विकल्प अपने संकेतकों का अर्थ बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं।

  2. कल्याण DBT और दूरसंचार सदस्यता आंकड़ों को कौन-सा साझा सिद्धांत जोड़ता है?

    1. कुल पंजीकरण प्रभावी पहुंच सिद्ध करता है
    2. समावेशन का दावा करने से पहले परिभाषा और अंतिम-मील परिणाम जांचें
    3. डिजिटल प्रणाली हर शिकायत हटाती है
    4. केवल व्यय महत्वपूर्ण है
    उत्तर

    समावेशन का दावा करने से पहले परिभाषा और अंतिम-मील परिणाम जांचें

    बड़े पैमाने के बावजूद व्यक्ति विफल अंतरण, कमजोर सेवा या पहुंच बाधा झेल सकता है।

  3. रक्षा निर्यात में जोखिम-आधारित सुविधा का लक्ष्य क्या है?

    1. हर कम और अधिक जोखिम मामले पर समान जांच
    2. अनुमति के बाद कोई अभिलेख नहीं
    3. नियमित बोझ घटाकर संवेदनशील मामलों पर सुरक्षा केंद्रित करना
    4. राष्ट्रीय नियंत्रण को कंपनी की पसंद से बदलना
    उत्तर

    नियमित बोझ घटाकर संवेदनशील मामलों पर सुरक्षा केंद्रित करना

    जोखिम-आधारित व्यवस्था वैध कम-जोखिम व्यापार सरल करती है और संवेदनशील मामलों पर कठोर नियंत्रण रखती है।

  4. IIP और परमाणु क्षमता लक्ष्य की सर्वोत्तम तुलना क्या है?

    1. दोनों अंतिम कल्याण परिणाम हैं
    2. दोनों उपयोगी संकेतक हैं, जिन्हें संरचना, क्रियान्वयन और परिणाम विश्लेषण चाहिए
    3. दोनों मापे नहीं जा सकते
    4. दोनों संस्थागत जांच हटाते हैं
    उत्तर

    दोनों उपयोगी संकेतक हैं, जिन्हें संरचना, क्रियान्वयन और परिणाम विश्लेषण चाहिए

    औद्योगिक सूचकांक और क्षमता लक्ष्य साक्ष्य व्यवस्थित करते हैं, पर टिकाऊ, सुरक्षित या समावेशी विकास स्वयं सिद्ध नहीं करते।

  5. सभी छह कथाओं पर कौन-सा मूल्यांकन ढांचा लागू होता है?

    1. केवल शीर्षक पैमाना
    2. उत्तरदायी संस्था, स्पष्ट परिभाषा, जोखिम या सुधार उपाय और मापनीय अंतिम परिणाम
    3. बिना निगरानी प्रौद्योगिकी
    4. लाभार्थी साक्ष्य के बिना व्यय
    उत्तर

    उत्तरदायी संस्था, स्पष्ट परिभाषा, जोखिम या सुधार उपाय और मापनीय अंतिम परिणाम

    हर कथा का प्रश्न यही है कि मापा गया पैमाना उत्तरदायी और सत्यापन योग्य क्षमता में बदलता है या नहीं।

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