सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 में देखें कि प्रोत्साहन व्यवहार कैसे बदलते हैं। ऊर्जा मूल्य सहायता, अनुसंधान वित्त और फसल बीमा को जोखिम न्यायसंगत रूप से बांटना, स्पष्ट बाजार-विफलता सुधारना और गुणवत्ता, अपनाव तथा दावा-निपटान के आधार पर लेखापरीक्षण योग्य रहना चाहिए।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने GOBARdhan के अंतर्गत संपीडित जैव-गैस की संशोधित मूल्य व्यवस्था स्पष्ट की। उत्पादक खरीद मूल्य ₹2,110 प्रति MMBtu तय है, जबकि पहले का मानक लगभग ₹1,478 प्रति MMBtu था। 95% मीथेन वाली गैस के लिए ₹10 प्रति किलोग्राम, अर्थात लगभग ₹215 प्रति MMBtu की सरकारी वहनीयता सहायता के बाद गैस पूल से वसूली जाने वाली प्रभावी राशि करीब ₹1,895 प्रति MMBtu रहती है। यह पहले के मानक से लगभग 28% अधिक है, न कि दोनों शीर्ष खरीद मूल्यों के बीच दिखने वाला 43% अंतर। लागत को पहले की तुलना में लगभग 2.5 से 3 गुना बड़े घरेलू गैस आधार पर फैलाया जाएगा। रचना दो बाजार-विफलताओं को संबोधित करती है। जैविक अपशिष्ट से गैस बनाने वाले संयंत्रों को अनुमानित आय चाहिए और उपभोक्ताओं को केंद्रित मूल्य झटके से सुरक्षा चाहिए। व्यवस्था की विश्वसनीयता पारदर्शी राजकोषीय प्रावधान, सत्यापित गैस गुणवत्ता, समय पर भुगतान, टिकाऊ फीडस्टॉक और वास्तविक पूल मूल्य प्रभाव के सार्वजनिक प्रकटीकरण पर निर्भर करेगी।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 में CBG को चक्रीय अर्थव्यवस्था, अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छ ऊर्जा, मूल्य पूलिंग और राजकोषीय सहायता से जोड़ें। जांचें कि जोखिम कौन वहन करता है और प्रोत्साहन सत्यापित पर्यावरणीय परिणाम देते हैं या नहीं।
संभावित प्रश्न: मूल्य सहायता स्वच्छ ऊर्जा बाजार को गति दे सकती है, किंतु पारदर्शी जोखिम-वितरण ही उसे टिकाऊ बनाता है। संशोधित संपीडित जैव-गैस मूल्य ढांचे के संदर्भ में परीक्षण कीजिए।
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मूल स्रोत
वस्त्र मंत्रालय ने वस्त्र अनुसंधान संघों की दूसरी समन्वय बैठक आयोजित कर अनुसंधान को उद्योग की जरूरत और मापनीय परिणामों से जोड़ने पर बल दिया। चर्चा में प्रौद्योगिकी विकास, व्यावसायीकरण, उद्योग संपर्क, संस्थागत क्षमता, स्टार्टअप, बाहरी वित्त, कौशल और राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन की परियोजनाएं शामिल थीं। i-TRAMS पोर्टल की डिजिटल सूचना, उत्कृष्टता केंद्र, नई पीढ़ी के रेशे, साझा इलेक्ट्रॉनिक पुस्तकालय और संरचित प्रौद्योगिकी तत्परता ढांचा भी समीक्षा का हिस्सा रहे। नीति का मुख्य प्रश्न ज्ञान को उपयोगी क्षमता में बदलना है। प्रयोगशाला शोधपत्र या प्रोटोटाइप बना सकती है, फिर भी विशेषकर MSME के पास परीक्षण सुविधा, मानक सहायता, वित्त या तकनीक अपनाने का भरोसा न हो। परिणाम-केंद्रित शासन के लिए शोध प्रश्न तय करते समय उद्योग भागीदारी, साझा सुविधाएं, पारदर्शी मील-पत्थर, स्वतंत्र सत्यापन, प्रसार-सक्षम बौद्धिक संपदा नियम और प्रदर्शन अथवा खरीद के मार्ग चाहिए। प्रदर्शन संकेतक केवल व्यय या पेटेंट नहीं, बल्कि सुरक्षित व्यावसायिक अपनाने, आयात प्रतिस्थापन और टिकाऊ उत्पादन लाभ को महत्व दें।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 में वस्त्र अनुसंधान को तकनीकी वस्त्र, विनिर्माण प्रतिस्पर्धा, MSME प्रौद्योगिकी अपनाने, मानकीकरण, व्यावसायीकरण और टिकाऊ उत्पादन से जोड़ें। अनुसंधान निर्गत और औद्योगिक परिणाम में अंतर करें।
संभावित प्रश्न: भारत की अनुसंधान संस्थाएं तभी सार्वजनिक मूल्य बनाती हैं जब विश्वसनीय ज्ञान सुरक्षित और व्यापक रूप से अपनाई गई उत्पादन क्षमता में बदले। वस्त्र क्षेत्र के संदर्भ में चर्चा कीजिए।
संबंधित विगत वर्ष प्रश्न: UPSC सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3: प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण और नई प्रौद्योगिकी का विकास
मूल स्रोत
नए PMFBY पृष्ठभूमि-पत्र के अनुसार खरीफ 2016 से रबी 2025-26 तक 92.46 करोड़ से अधिक किसान आवेदनों का बीमा हुआ और 26.33 करोड़ से अधिक आवेदनों को ₹2.06 लाख करोड़ से अधिक के दावे मिले। केंद्रीय बजट में 2026-27 के लिए ₹12,200 करोड़ आवंटित हैं। किसान खरीफ खाद्यान्न और तिलहन फसलों के लिए अधिकतम 2%, रबी खाद्यान्न और तिलहन के लिए 1.5% तथा वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के लिए 5% प्रीमियम देते हैं; शेष राशि सरकारें वहन करती हैं। 27 अगस्त 2026 तक खरीफ कवरेज 241.38 लाख किसान और 278.12 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा। योजना रोकी गई बुवाई, खड़ी फसल, स्थानीय आपदा और सीमित कटाई-पश्चात अवधि के निर्दिष्ट जोखिमों को समेटती है। YES-TECH और WINDS जैसी प्रणालियां उपज तथा मौसम साक्ष्य सुधारने के लिए हैं। फिर भी पैमाना प्रदर्शन सिद्ध नहीं करता। किसानों को स्पष्ट सूचना, सही नामांकन, विश्वसनीय नुकसान आकलन, समय पर दावा, सुलभ शिकायत निवारण और पारदर्शी राज्यवार आंकड़े चाहिए। बीमा को सिंचाई, विस्तार सेवा और जलवायु-लचीली खेती का स्थान नहीं लेना चाहिए।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 में फसल बीमा को कृषि जोखिम, जलवायु अनुकूलन, राजकोषीय संघवाद, प्रौद्योगिकी-आधारित उपज आकलन और किसान आय स्थिरता से जोड़ें। नामांकन के साथ दावा निपटान की गुणवत्ता परखें।
संभावित प्रश्न: फसल बीमा का बड़ा नामांकन तभी सार्थक है जब दावे सही, समयबद्ध और सुलभ हों। जलवायु जोखिम शासन के साधन के रूप में PMFBY का मूल्यांकन कीजिए।
संबंधित विगत वर्ष प्रश्न: UPSC सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3: प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कृषि सहायता, न्यूनतम समर्थन मूल्य तथा किसानों की सहायता में ई-प्रौद्योगिकी
मूल स्रोत