अंतरराष्ट्रीय संबंधGS Paper 2 · 2 सितम्बर 2026
BHASHINI संगम ने भारत-नेपाल की साझा भाषाओं को समावेशी AI कूटनीति की कसौटी बनाया
डिजिटल इंडिया BHASHINI प्रभाग, काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास और काठमांडू विश्वविद्यालय ने बहुभाषी तथा वाणी-आधारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की। यह पहल भाषा प्रौद्योगिकी और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना पर प्रभाग तथा विश्वविद्यालय के मौजूदा समझौते को आगे बढ़ाती है। सहयोग में साझा प्रौद्योगिकी, आंकड़ा-संग्रह और नेपाली, नेवारी, मैथिली तथा अन्य भाषाओं के लिए स्थानीय उपयोग शामिल हैं। प्रदर्शन में वाक् पहचान, तत्काल अनुवाद, वाणी-सक्षम संवाद और दस्तावेज प्रसंस्करण दिखाए गए, जबकि भाषादान सत्र ने वाणी, पाठ और चित्र आंकड़ों में समुदाय की भागीदारी रेखांकित की। आधिकारिक परिचय के अनुसार BHASHINI 36 भारतीय पाठ भाषाओं, 23 भारतीय वाणी भाषाओं और 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं का समर्थन करती है, 800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को सेवा देती है, 9 अरब से अधिक संचयी AI निष्पादन कर चुकी है और प्रतिदिन 24 मिलियन से अधिक निष्पादन संभालती है। किंतु पैमाना भाषायी न्याय का पर्याय नहीं है। सीमा-पार भाषा AI को प्रतिनिधिक आंकड़े, सूचित सामुदायिक भागीदारी, पक्षपात परीक्षण, आंकड़ा संरक्षण, स्थानीय शोध क्षमता और पारदर्शी मूल्यांकन चाहिए, ताकि साझा भाषाएं स्थानीय स्वायत्तता खोए बिना डिजिटल सेतु बनें।
यूपीएससी के लिए महत्व
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 में इसे भारत-नेपाल संबंध, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, प्रौद्योगिकी कूटनीति, क्षेत्रीय सहयोग और समावेशी पहुंच से जोड़ें; प्रश्नपत्र 3 में AI आंकड़ों और भाषा प्रौद्योगिकी का परीक्षण करें।
इस खबर को कैसे पढ़ें
भाषा प्रौद्योगिकी तभी अवसंरचना है जब समुदाय उसे भरोसे से उपयोग कर सके और अपने प्रतिनिधित्व पर प्रभाव रखे। बड़ी भाषाओं में प्रचुर डिजिटल पाठ और वाणी मिलती है, जबकि छोटी या मौखिक भाषा सीमित नमूने, औपचारिक शैली या शहरी वक्ता से दर्ज हो सकती है। तब प्रणाली भाषा का नाम पहचानकर भी उच्चारण, मिश्रित भाषा, दिव्यांगता या सार्वजनिक सेवा शब्दावली में कमजोर रह सकती है। सह-निर्माण सामुदायिक सहमति, संग्रह के लिखित उद्देश्य, योगदान की न्यायसंगत शर्त और त्रुटि की स्थानीय समीक्षा से शुरू हो। आंकड़ा संरक्षण तय करे कि रिकॉर्डिंग का पुन: उपयोग, संयोजन या सीमा-पार हस्तांतरण कैसे होगा और सुधार या वापसी कैसे मांगी जाएगी। खुले मानक तथा अंतर-संचालनीय संपर्क सार्वजनिक मंच को बंद निर्भरता बनने से रोक सकते हैं। पारदर्शी कसौटी एक औसत अंक के बजाय प्रत्येक भाषा और कार्य का प्रदर्शन दिखाए। भारत-नेपाल सहयोग में साझा भाषा, शोध संस्था और सार्वजनिक सेवा आवश्यकता सीमा पार करती है, इसलिए कूटनीतिक मूल्य है। साथ ही आंकड़ा अधिकार-क्षेत्र, साइबर सुरक्षा और साझा बौद्धिक योगदान स्पष्ट होना चाहिए। श्रेष्ठ परिणाम केवल प्रदर्शन नहीं, बल्कि स्थानीय क्षमता है जो आंकड़ा बनाए, प्रणाली परखे, अनुप्रयोग संभाले और नागरिक की चुनी भाषा में सेवा दे।
पेपर का व्यापक संदर्भ
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 में अधिकारधारी व्यक्ति, उत्तरदायी संस्था और सहयोग तंत्र की पहचान करें; फिर देखें कि उचित प्रक्रिया, प्रतिनिधित्व, पारदर्शिता और शिकायत निवारण नीति के आशय को जवाबदेह सार्वजनिक मूल्य में बदलते हैं या नहीं।
संभावित प्रश्न
बहुभाषी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना तभी पड़ोसी कूटनीति गहरा सकती है जब सह-निर्माण भाषायी प्रतिनिधित्व और स्थानीय स्वायत्तता की रक्षा करे। चर्चा कीजिए।
त्वरित अभ्यास
Q1
भाषा आंकड़ा-संग्रह को प्रतिनिधिक क्या बनाता है?
- वक्ता, उच्चारण और वास्तविक कार्य की विविधता के साथ सहमति
- केवल बहुत बड़ा संचय
- एक औपचारिक शैली
- स्थानीय समीक्षा का अभाव
उत्तर देखें
सही उत्तर: वक्ता, उच्चारण और वास्तविक कार्य की विविधता के साथ सहमति
प्रतिनिधित्व कुल आकार से नहीं, शामिल लोगों और भाषायी उपयोग की विविधता से आता है।
Q2
सार्वजनिक भाषा अवसंरचना में खुले मानक क्यों जरूरी हैं?
- वे मूल्यांकन समाप्त करते हैं
- वे अंतर-संचालनीयता बढ़ाकर बंद निर्भरता घटाते हैं
- वे समुदाय रोकते हैं
- वे पूर्ण अनुवाद की गारंटी देते हैं
उत्तर देखें
सही उत्तर: वे अंतर-संचालनीयता बढ़ाकर बंद निर्भरता घटाते हैं
अंतर-संचालनीय मानक अनेक संस्था और अनुप्रयोग को सार्वजनिक मंच के साथ काम करने देते हैं।
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