जीएस पेपर 2 — राजव्यवस्था, शासन, अंतर्राष्ट्रीय संबंध
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 में अधिकारधारी व्यक्ति, उत्तरदायी संस्था और सहयोग तंत्र की पहचान करें; फिर देखें कि उचित प्रक्रिया, प्रतिनिधित्व, पारदर्शिता और शिकायत निवारण नीति के आशय को जवाबदेह सार्वजनिक मूल्य में बदलते हैं या नहीं।
केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण ने दत्तक ग्रहण जागरूकता 2026 का विषय जारी किया, जिसका उद्देश्य कानूनी, सुरक्षित, पारदर्शी और बाल-केंद्रित दत्तक ग्रहण को बढ़ावा देना तथा अवैध दत्तक ग्रहण रोकना है। राज्य और केंद्रशासित प्रदेश स्तर की कार्यशालाएं सितंबर 2026 से आरंभ होंगी, जिससे जागरूकता केवल नवंबर तक सीमित नहीं रहेगी। कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग, बाल कल्याण समितियां, जिला बाल संरक्षण इकाइयां, विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थाएं, बाल देखभाल संस्थान, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, न्यायपालिका, विधिक सेवा प्राधिकरण, अस्पताल, अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मी और नागरिक समाज शामिल होंगे। आधिकारिक विज्ञप्ति अभिभावक से अलग मिले बालक की समय पर सूचना, विधिसम्मत समर्पण, दत्तक ग्रहण के लिए कानूनी रूप से मुक्त घोषित करने और निर्धारित प्रक्रिया के पालन पर बल देती है। यह संस्थागत शृंखला इसलिए आवश्यक है क्योंकि दत्तक ग्रहण वयस्कों के बीच निजी व्यवस्था नहीं है। राज्य को पात्रता जांचते और उचित प्रक्रिया निभाते समय बालक की पहचान, सुरक्षा, गरिमा और सर्वोत्तम हित की रक्षा करनी होती है। जागरूकता अवैध रास्ते घटा सकती है, किंतु स्थायी सुधार के लिए प्रशिक्षित जिला संस्थाएं, पता लगाए जा सकने वाले निर्णय, शिकायत निवारण और समन्वित संरक्षण चाहिए।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 में इसे बाल अधिकार, सामाजिक न्याय, वैधानिक संस्थाएं, अंतर-विभागीय समन्वय, उचित प्रक्रिया और दत्तक ग्रहण में बालक के सर्वोत्तम हित के सिद्धांत से जोड़ें।
संभावित प्रश्न: दत्तक ग्रहण शासन में वयस्कों की पसंद से पहले बालक के सर्वोत्तम हित और कानूनी पहचान को क्यों रखा जाना चाहिए? आवश्यक संस्थागत सुरक्षा उपायों की चर्चा कीजिए।
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डिजिटल इंडिया BHASHINI प्रभाग, काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास और काठमांडू विश्वविद्यालय ने बहुभाषी तथा वाणी-आधारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की। यह पहल भाषा प्रौद्योगिकी और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना पर प्रभाग तथा विश्वविद्यालय के मौजूदा समझौते को आगे बढ़ाती है। सहयोग में साझा प्रौद्योगिकी, आंकड़ा-संग्रह और नेपाली, नेवारी, मैथिली तथा अन्य भाषाओं के लिए स्थानीय उपयोग शामिल हैं। प्रदर्शन में वाक् पहचान, तत्काल अनुवाद, वाणी-सक्षम संवाद और दस्तावेज प्रसंस्करण दिखाए गए, जबकि भाषादान सत्र ने वाणी, पाठ और चित्र आंकड़ों में समुदाय की भागीदारी रेखांकित की। आधिकारिक परिचय के अनुसार BHASHINI 36 भारतीय पाठ भाषाओं, 23 भारतीय वाणी भाषाओं और 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं का समर्थन करती है, 800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को सेवा देती है, 9 अरब से अधिक संचयी AI निष्पादन कर चुकी है और प्रतिदिन 24 मिलियन से अधिक निष्पादन संभालती है। किंतु पैमाना भाषायी न्याय का पर्याय नहीं है। सीमा-पार भाषा AI को प्रतिनिधिक आंकड़े, सूचित सामुदायिक भागीदारी, पक्षपात परीक्षण, आंकड़ा संरक्षण, स्थानीय शोध क्षमता और पारदर्शी मूल्यांकन चाहिए, ताकि साझा भाषाएं स्थानीय स्वायत्तता खोए बिना डिजिटल सेतु बनें।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 में इसे भारत-नेपाल संबंध, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, प्रौद्योगिकी कूटनीति, क्षेत्रीय सहयोग और समावेशी पहुंच से जोड़ें; प्रश्नपत्र 3 में AI आंकड़ों और भाषा प्रौद्योगिकी का परीक्षण करें।
संभावित प्रश्न: बहुभाषी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना तभी पड़ोसी कूटनीति गहरा सकती है जब सह-निर्माण भाषायी प्रतिनिधित्व और स्थानीय स्वायत्तता की रक्षा करे। चर्चा कीजिए।
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जीएस पेपर 3 — अर्थव्यवस्था, पर्यावरण, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, सुरक्षा
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 में स्वीकृति या डिजिटल परिणाम को परिचालन क्षमता से अलग करें और साक्ष्य गुणवत्ता, अंतर-संचालनीयता, जीवन-चक्र क्षमता, समावेशन, पारिस्थितिक सीमा तथा मापनीय परिणामों की जांच करें।
केंद्रीय कृषि मंत्रालय की समीक्षा में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के उन 100 जिलों की प्रगति देखी गई जिन्हें कम कृषि उत्पादकता, कम फसल सघनता और कम कृषि ऋण वितरण के आधार पर चुना गया है। योजना 11 मंत्रालयों और विभागों की 36 केंद्रीय योजनाओं को राज्य कार्यक्रमों तथा निजी भागीदारी के साथ जोड़ती है। निगरानी ढांचे में 121 संकेतक हैं, जिनमें 74 उत्पादन संकेतक और 47 परिणाम संकेतक शामिल हैं। छह उद्देश्यों पर जिलों का औसत अंक अप्रैल 2026 के 22.54 से बढ़कर जुलाई 2026 में 38.85 हुआ। सभी 100 जिलों ने जिला कार्ययोजना अपलोड की और निर्धारित निगरानी आंकड़े दिए। वित्तीय प्रगति मॉड्यूल 31 अगस्त 2026 को चालू हुआ तथा लाभार्थी प्रगति मॉड्यूल सितंबर के मध्य तक लागू करने का लक्ष्य रखा गया। जनवरी से जुलाई के बीच 6,90,530 किसानों और 88,961 प्रसार कर्मियों को कौशल प्रशिक्षण मिला; 2,20,683 किसानों और प्रसार कर्मियों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया गया। शासन की असली कसौटी यह होगी कि समन्वय और पटल के अंक केवल गतिविधि न गिनें, बल्कि उत्पादकता, लचीलापन, ऋण पहुंच और किसान कल्याण में सत्यापित सुधार दिखाएं।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 में PM-DDKY को कृषि उत्पादकता, फसल विविधीकरण, सिंचाई, कटाई-पश्चात अवसंरचना, संस्थागत ऋण, कृषि प्रसार, योजना समन्वय और परिणाम-आधारित सार्वजनिक व्यय से जोड़ें।
संभावित प्रश्न: साझा पटल जब योजना गतिविधि के बजाय लाभार्थी परिणाम मापते हैं, तभी समन्वय सार्वजनिक मूल्य बनता है। PM-DDKY के संदर्भ में परीक्षण कीजिए।
संबंधित विगत वर्ष प्रश्न: UPSC सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3: प्रमुख फसलें, सिंचाई, कृषि ऋण, भंडारण, विपणन और कृषि सहायता से संबंधित विषय
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नई दिल्ली में चौथे भारत-जर्मनी पर्यावरण मंच के दौरान दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों के संरक्षण और विवेकपूर्ण उपयोग पर आशय की संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर किए। मंच को दोनों देशों के बीच पर्यावरण नीति का सर्वोच्च द्विपक्षीय मंच बताया गया है और इसका आयोजन 2008 से होता रहा है। इसमें सरकार, उद्योग, विशेषज्ञ और नागरिक समाज ने जलवायु लचीलापन, जैव विविधता और संसाधन दक्षता पर विमर्श किया। घोषणा वैज्ञानिक समझ मजबूत करने, श्रेष्ठ पद्धतियों का आदान-प्रदान करने, पुनर्स्थापन उपाय विकसित करने और सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने का आधार देगी। व्यापक मंच में कम-कार्बन उद्योग, आर्द्रभूमि, पर्वत और वन जैव विविधता, चक्रीय अर्थव्यवस्था, सतत वित्त, हरित कौशल और निवेश जुटाने पर भी चर्चा हुई। जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता और चक्रीय अर्थव्यवस्था पर तीन संयुक्त कार्यसमूह वर्ष के दौरान मिले थे। यह दस्तावेज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आर्द्रभूमि पारिस्थितिक अवसंरचना की तरह जैव विविधता, जल नियमन, बाढ़ नियंत्रण, आजीविका और जलवायु लचीलेपन को सहारा देती है। कूटनीतिक आशय तभी विश्वसनीय बनेगा जब साझा विज्ञान स्थल-स्तरीय योजना में उतरे, स्थानीय उपयोगकर्ता शासन में भाग लें, पुनर्स्थापन के मापनीय आधार हों और संस्थाएं बैठकों के बजाय पारिस्थितिक परिवर्तन प्रकाशित करें।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 में घोषणा को भारत-जर्मनी पर्यावरण कूटनीति के उदाहरण के रूप में तथा प्रश्नपत्र 3 में आर्द्रभूमि, जैव विविधता, जलवायु अनुकूलन, पारिस्थितिकी सेवा, पुनर्स्थापन और समुदाय से जोड़ें।
संभावित प्रश्न: साझा ज्ञान जब स्थल-स्तरीय पारिस्थितिक जवाबदेही में बदलता है, तभी द्विपक्षीय पर्यावरण घोषणा मूल्य देती है। आर्द्रभूमि पुनर्स्थापन के संदर्भ में चर्चा कीजिए।
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भारतीय रेल ने उत्तर रेलवे के मुरादाबाद मंडल में शेष 712 मार्ग किलोमीटर पर Kavach Version 4.0 लगाने के लिए ₹170 करोड़ की स्वीकृति दी है। Kavach स्वदेशी स्वचालित रेल सुरक्षा प्रणाली है, जिसका उद्देश्य खतरे के संकेत को पार करने से रोकना, गंभीर दशा में गति नियंत्रित करना, आवश्यकता पर स्वतः ब्रेक लगाना और टक्कर का जोखिम घटाना है। यह स्वीकृति मंडल में नियोजित रेल सुरक्षा परत का विस्तार करती है और व्यापक संकेत आधुनिकीकरण से जुड़ी है। किंतु प्रशासनिक स्वीकृति और मार्ग किलोमीटर का लक्ष्य चालू सुरक्षा कवरेज के समान नहीं हैं। प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अनुकूल पटरी-पार्श्व तथा रेलयान उपकरण, भरोसेमंद रेडियो संपर्क, सटीक मानचित्रण, नियंत्रित स्थापना, स्वतंत्र परीक्षण, प्रशिक्षित चालक व रखरखाव कर्मी, अनुशासित परिवर्तन प्रबंधन और बाधित दशा के स्पष्ट नियम चाहिए। सुरक्षा पारंपरिक संकेत, पटरी की स्थिति, मानवीय कारक और दुर्घटना से सीखने पर भी निर्भर है; स्वचालित संरक्षण एक अतिरिक्त रक्षा परत है, पूरी प्रणाली का विकल्प नहीं। इसलिए स्वदेशी डिजाइन, खरीद, स्थापना, प्रमाणन और मापनीय परिचालन प्रदर्शन को अलग-अलग परखना चाहिए।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 में Kavach को अवसंरचना सुरक्षा, स्वदेशी प्रौद्योगिकी, रेल आधुनिकीकरण, प्रणाली अभियांत्रिकी, सार्वजनिक खरीद, मानकीकरण और संस्थागत दुर्घटना रोकथाम से जोड़ें।
संभावित प्रश्न: रेल सुरक्षा प्रौद्योगिकी तभी क्षमता बनती है जब खरीद को परीक्षित, अंतर-संचालनीय और अनुरक्षित परिचालन में बदला जाए। Kavach के संदर्भ में चर्चा कीजिए।
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विदेश व्यापार महानिदेशालय ने पात्र निर्यात आवेदनों के लिए अपने पोर्टल पर मुक्त बिक्री और वाणिज्य प्रमाणपत्र का स्वचालित निर्गमन आरंभ किया है। ये प्रमाणपत्र विदेश व्यापार नीति के अंतर्गत उन वस्तुओं के लिए जारी होते हैं जो Drugs and Cosmetics Act, 1940 के दायरे में नहीं आतीं। पहले क्षेत्रीय प्राधिकरण सामान्य रूप से आवेदनों की जांच और सत्यापन करते थे। नई व्यवस्था में पात्र मामले प्रचलित ढांचे के अनुसार स्वतः जारी हो सकते हैं, जबकि सत्यापन मांगने वाले या स्वचालित मानदंड पूरा न करने वाले आवेदन संबंधित प्राधिकरण को भेजे जाएंगे। कुछ स्वतः स्वीकृत आवेदन जोखिम-प्रबंधन मानदंडों के आधार पर बाद में समीक्षा के लिए चिह्नित किए जा सकते हैं। सुधार का उद्देश्य मानवीय हस्तक्षेप, प्रसंस्करण समय और अनुपालन बोझ घटाते हुए निर्णय को अधिक पूर्वानुमेय और पारदर्शी बनाना है। यह सार्वभौमिक पूर्व-जांच से नियम-आधारित प्रसंस्करण और चयनात्मक निगरानी की ओर व्यापक नियामकीय बदलाव दिखाता है। क्षमता तभी सुधरेगी जब पात्रता नियम स्पष्ट हों, आंकड़े विश्वसनीय हों, निर्णय का लेखा-पथ बचे, अपवाद समय पर निपटें, पश्चात समीक्षा आनुपातिक हो और निर्यातक को सुधार तथा अपील का सार्थक मार्ग मिले।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 में इसे विदेश व्यापार सुविधा, लेनदेन लागत, जोखिम-आधारित विनियमन, व्यवसाय सुगमता और निर्यात प्रतिस्पर्धा से जोड़ें; प्रश्नपत्र 2 में पारदर्शी डिजिटल प्रशासन का परीक्षण करें।
संभावित प्रश्न: नियम-आधारित स्वचालन तभी नियामकीय बोझ घटाता है जब अपवाद निपटान, लेखा-परीक्षण और अपील जवाबदेह रहें। निर्यात प्रमाणन के संदर्भ में परीक्षण कीजिए।
संबंधित विगत वर्ष प्रश्न: UPSC सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3: अर्थव्यवस्था पर उदारीकरण के प्रभाव तथा औद्योगिक नीति में परिवर्तन और औद्योगिक वृद्धि पर उनका प्रभाव
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