भारत-जर्मनी आर्द्रभूमि घोषणा ने हरित कूटनीति को पुनर्स्थापन संस्थाओं से जोड़ापर्यावरण और स्वास्थ्य

GS Paper 3 · 2 सितम्बर 2026

भारत-जर्मनी आर्द्रभूमि घोषणा ने हरित कूटनीति को पुनर्स्थापन संस्थाओं से जोड़ा

नई दिल्ली में चौथे भारत-जर्मनी पर्यावरण मंच के दौरान दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों के संरक्षण और विवेकपूर्ण उपयोग पर आशय की संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर किए। मंच को दोनों देशों के बीच पर्यावरण नीति का सर्वोच्च द्विपक्षीय मंच बताया गया है और इसका आयोजन 2008 से होता रहा है। इसमें सरकार, उद्योग, विशेषज्ञ और नागरिक समाज ने जलवायु लचीलापन, जैव विविधता और संसाधन दक्षता पर विमर्श किया। घोषणा वैज्ञानिक समझ मजबूत करने, श्रेष्ठ पद्धतियों का आदान-प्रदान करने, पुनर्स्थापन उपाय विकसित करने और सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने का आधार देगी। व्यापक मंच में कम-कार्बन उद्योग, आर्द्रभूमि, पर्वत और वन जैव विविधता, चक्रीय अर्थव्यवस्था, सतत वित्त, हरित कौशल और निवेश जुटाने पर भी चर्चा हुई। जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता और चक्रीय अर्थव्यवस्था पर तीन संयुक्त कार्यसमूह वर्ष के दौरान मिले थे। यह दस्तावेज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आर्द्रभूमि पारिस्थितिक अवसंरचना की तरह जैव विविधता, जल नियमन, बाढ़ नियंत्रण, आजीविका और जलवायु लचीलेपन को सहारा देती है। कूटनीतिक आशय तभी विश्वसनीय बनेगा जब साझा विज्ञान स्थल-स्तरीय योजना में उतरे, स्थानीय उपयोगकर्ता शासन में भाग लें, पुनर्स्थापन के मापनीय आधार हों और संस्थाएं बैठकों के बजाय पारिस्थितिक परिवर्तन प्रकाशित करें।

यूपीएससी के लिए महत्व

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 में घोषणा को भारत-जर्मनी पर्यावरण कूटनीति के उदाहरण के रूप में तथा प्रश्नपत्र 3 में आर्द्रभूमि, जैव विविधता, जलवायु अनुकूलन, पारिस्थितिकी सेवा, पुनर्स्थापन और समुदाय से जोड़ें।

इस खबर को कैसे पढ़ें

आर्द्रभूमि पुनर्स्थापन तब विफल होता है जब जीवित तंत्र को अलग जलखंड माना जाए। जल-विज्ञान किसी स्थल को जलग्रहण, भूजल, बाढ़भूमि और ऊपरी भूमि उपयोग से जोड़ता है। इसलिए प्रदूषण, अतिक्रमण या प्रवाह परिवर्तन स्थानीय रोपण और गाद हटाने का लाभ मिटा सकते हैं। उचित कार्यक्रम जल व्यवस्था, स्थानीय जैव विविधता, तलछट, जल गुणवत्ता, आजीविका और जलवायु जोखिम का पारिस्थितिक आधार तैयार करे। फिर क्षरण के कारण की पहचान कर ऐसा उपाय चुने जो कार्यक्षमता लौटाए, केवल सजावटी दृश्य न बनाए। सामुदायिक भागीदारी औपचारिक परामर्श नहीं है। मछुआरे, किसान, पशुपालक, स्थानीय निकाय और महिला उपयोगकर्ता संचालन ज्ञान रखते तथा पहुंच नियम की लागत उठाते हैं। उनके अधिकार और प्रोत्साहन प्रबंधन योजना में आएं। द्विपक्षीय सहयोग तुलनात्मक विज्ञान, पुनर्स्थापन तकनीक, वित्त रचना और पेशेवर प्रशिक्षण दे सकता है, किंतु बाहरी पद्धति को भारतीय जल-विज्ञान और संस्था के अनुरूप बनाना होगा। निगरानी अनेक मौसम में प्रवृत्ति प्रकाशित करे और अनिश्चितता स्वीकार करे। पर्यावरण, जल, कृषि और नगर एजेंसियों के अतिव्यापी अधिकार का समन्वय भी चाहिए। सफलता व्यय या घोषणा नहीं, पारिस्थितिक प्रक्रिया की वापसी, कम जोखिम और टिकाऊ आजीविका संगति है।

पेपर का व्यापक संदर्भ

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 में स्वीकृति या डिजिटल परिणाम को परिचालन क्षमता से अलग करें और साक्ष्य गुणवत्ता, अंतर-संचालनीयता, जीवन-चक्र क्षमता, समावेशन, पारिस्थितिक सीमा तथा मापनीय परिणामों की जांच करें।

संभावित प्रश्न

साझा ज्ञान जब स्थल-स्तरीय पारिस्थितिक जवाबदेही में बदलता है, तभी द्विपक्षीय पर्यावरण घोषणा मूल्य देती है। आर्द्रभूमि पुनर्स्थापन के संदर्भ में चर्चा कीजिए।

त्वरित अभ्यास

  1. Q1

    आर्द्रभूमि पुनर्स्थापन के आधार में क्या शामिल होना चाहिए?

    1. केवल पर्यटक संख्या
    2. केवल रोपा वनस्पति
    3. जल-विज्ञान, जैव विविधता, जल गुणवत्ता, आजीविका और दबाव
    4. औपचारिक घोषणा
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: जल-विज्ञान, जैव विविधता, जल गुणवत्ता, आजीविका और दबाव

    आधार को पारिस्थितिक कार्य और पुनर्स्थापन से प्रभावित मानवीय उपयोग दोनों बताने चाहिए।

  2. Q2

    आर्द्रभूमि प्रबंधन में जलग्रहण दशा क्यों शामिल हो?

    1. आर्द्रभूमि बंद टंकी है
    2. बहाव केवल अंतरराष्ट्रीय संस्था संभालती है
    3. जलग्रहण केवल पर्यटन के लिए है
    4. ऊपरी प्रवाह, प्रदूषण और भूमि उपयोग आर्द्रभूमि को आकार देते हैं
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: ऊपरी प्रवाह, प्रदूषण और भूमि उपयोग आर्द्रभूमि को आकार देते हैं

    जल और प्रदूषण का दबाव अक्सर दिखाई देने वाली आर्द्रभूमि सीमा के बाहर से आता है।

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