राजव्यवस्था और शासनGS Paper 2 · 2 सितम्बर 2026
CARA के वर्षभर कानूनी दत्तक ग्रहण अभियान में निजी हस्तांतरण नहीं, बालक केंद्र में है
केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण ने दत्तक ग्रहण जागरूकता 2026 का विषय जारी किया, जिसका उद्देश्य कानूनी, सुरक्षित, पारदर्शी और बाल-केंद्रित दत्तक ग्रहण को बढ़ावा देना तथा अवैध दत्तक ग्रहण रोकना है। राज्य और केंद्रशासित प्रदेश स्तर की कार्यशालाएं सितंबर 2026 से आरंभ होंगी, जिससे जागरूकता केवल नवंबर तक सीमित नहीं रहेगी। कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग, बाल कल्याण समितियां, जिला बाल संरक्षण इकाइयां, विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थाएं, बाल देखभाल संस्थान, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, न्यायपालिका, विधिक सेवा प्राधिकरण, अस्पताल, अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मी और नागरिक समाज शामिल होंगे। आधिकारिक विज्ञप्ति अभिभावक से अलग मिले बालक की समय पर सूचना, विधिसम्मत समर्पण, दत्तक ग्रहण के लिए कानूनी रूप से मुक्त घोषित करने और निर्धारित प्रक्रिया के पालन पर बल देती है। यह संस्थागत शृंखला इसलिए आवश्यक है क्योंकि दत्तक ग्रहण वयस्कों के बीच निजी व्यवस्था नहीं है। राज्य को पात्रता जांचते और उचित प्रक्रिया निभाते समय बालक की पहचान, सुरक्षा, गरिमा और सर्वोत्तम हित की रक्षा करनी होती है। जागरूकता अवैध रास्ते घटा सकती है, किंतु स्थायी सुधार के लिए प्रशिक्षित जिला संस्थाएं, पता लगाए जा सकने वाले निर्णय, शिकायत निवारण और समन्वित संरक्षण चाहिए।
यूपीएससी के लिए महत्व
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 में इसे बाल अधिकार, सामाजिक न्याय, वैधानिक संस्थाएं, अंतर-विभागीय समन्वय, उचित प्रक्रिया और दत्तक ग्रहण में बालक के सर्वोत्तम हित के सिद्धांत से जोड़ें।
इस खबर को कैसे पढ़ें
अधिकार-आधारित दत्तक ग्रहण व्यवस्था वयस्क की मांग से नहीं, बालक की स्थिति से आरंभ होती है। संरक्षण में आए बालक को दत्तक ग्रहण पर विचार से पहले परिवार का पता लगाने, परिवार सहायता, विधिसम्मत समर्पण, पुनर्वास या अन्य सुरक्षा की आवश्यकता हो सकती है। सक्षम निकाय को प्रत्येक निर्णय दर्ज कर वैधानिक प्रक्रिया में लेना चाहिए, ताकि अनौपचारिक हस्तांतरण से पहचान और कानूनी स्थिति न मिटे। समन्वय आवश्यक है, क्योंकि अस्पताल, पुलिस, बाल संरक्षण इकाई, समिति, विशिष्ट संस्था और न्यायालय एक ही मामले के अलग भाग देख सकते हैं। इनके बीच रिक्ति से दबाव, तस्करी, दस्तावेज धोखाधड़ी या विलंब का अवसर बनता है। जागरूकता बताए कि असुरक्षित बालक की सूचना कहां देनी है और सीधी निजी व्यवस्था क्यों असुरक्षित है। संस्थाओं को प्रशिक्षित कर्मी, गोपनीयता, कारणयुक्त निर्णय, निरीक्षण और सुलभ शिकायत भी चाहिए। भावी अभिभावक को पूर्वानुमेय प्रक्रिया मिलनी चाहिए, किंतु गति सुरक्षा का विकल्प नहीं है; अनावश्यक विलंब और लापरवाह तेजी दोनों हानिकारक हैं। दत्तक ग्रहण के बाद परामर्श और सेवा मिल सकती है, पर बालक को स्थायी निगरानी की वस्तु नहीं बनाना चाहिए। संवैधानिक कसौटी गरिमा, समानता और संरक्षण है; सफलता प्रचार या संख्या नहीं, विधिसम्मत, स्थिर और बाल-केंद्रित परिणाम है।
पेपर का व्यापक संदर्भ
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 में अधिकारधारी व्यक्ति, उत्तरदायी संस्था और सहयोग तंत्र की पहचान करें; फिर देखें कि उचित प्रक्रिया, प्रतिनिधित्व, पारदर्शिता और शिकायत निवारण नीति के आशय को जवाबदेह सार्वजनिक मूल्य में बदलते हैं या नहीं।
संभावित प्रश्न
दत्तक ग्रहण शासन में वयस्कों की पसंद से पहले बालक के सर्वोत्तम हित और कानूनी पहचान को क्यों रखा जाना चाहिए? आवश्यक संस्थागत सुरक्षा उपायों की चर्चा कीजिए।
त्वरित अभ्यास
Q1
विधिसम्मत दत्तक ग्रहण का प्रधान सिद्धांत क्या है?
- मध्यस्थ की सुविधा
- वयस्कों की निजी व्यवस्था
- बालक का सर्वोत्तम हित और कानूनी पहचान
- प्रचार लक्ष्य
उत्तर देखें
सही उत्तर: बालक का सर्वोत्तम हित और कानूनी पहचान
वैधानिक प्रक्रिया बालक की गरिमा, पहचान, सुरक्षा और सर्वोत्तम हित बचाती है।
Q2
कौन-सी व्यवस्था बाल संरक्षण की संस्थागत रिक्ति सबसे सीधे घटाती है?
- अस्पताल को प्रक्रिया से बाहर रखना
- बिना दस्तावेज हस्तांतरण
- शिकायत हटाना
- पता लगाए जा सकने वाले निर्णय के साथ सक्षम एजेंसियों का समन्वय
उत्तर देखें
सही उत्तर: पता लगाए जा सकने वाले निर्णय के साथ सक्षम एजेंसियों का समन्वय
दर्ज समन्वय अलग संस्थाओं को बिना अनियंत्रित रिक्ति के एक ही बालक की रक्षा करने देता है।
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