गहरे समुद्र में खनन की आकांक्षा को नियम, साक्ष्य और पर्यावरणीय वैधता की प्रतीक्षा करनी चाहिएपर्यावरण और स्वास्थ्य

GS Paper 3 · 9 सितम्बर 2026

गहरे समुद्र में खनन की आकांक्षा को नियम, साक्ष्य और पर्यावरणीय वैधता की प्रतीक्षा करनी चाहिए

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान ने गहरे समुद्र में खनन तथा महत्वपूर्ण खनिजों पर उद्योग कार्यशाला आयोजित की। सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार भारत के पास मध्य हिंद महासागर बेसिन में 75,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का अंतरराष्ट्रीय समुद्रतल प्राधिकरण अन्वेषण अनुबंध है, जहाँ बहुधात्विक पिंडों का अनुमान लगभग 366 से 380 मिलियन टन है। ₹4,077 करोड़ के गहरे महासागर मिशन के अंतर्गत स्वदेशी क्रॉलर प्रणाली का 5,000 मीटर से अधिक गहराई पर प्रदर्शन हुआ है। विज्ञप्ति एक महत्त्वपूर्ण वैधानिक सीमा भी स्वीकार करती है: अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में वाणिज्यिक खनन प्राधिकरण की दोहन संहिता बनने के बाद ही आरंभ हो सकता है। अतः अन्वेषण क्षमता खनन की अनुमति नहीं है। पर्यावरणीय आधाररेखा, निगरानी, दायित्व, लाभ-साझेदारी और वैज्ञानिक अनिश्चितता को किसी भी वाणिज्यिक परिवर्तन का आधार बनना चाहिए।

यूपीएससी के लिए महत्व

GS प्रश्नपत्र 3 के लिए यह महत्वपूर्ण खनिज, नीली अर्थव्यवस्था, स्वदेशी प्रौद्योगिकी और पर्यावरण शासन को जोड़ता है। यह समुद्री कानून और वैश्विक साझा क्षेत्रों की संस्थाओं से भी संबंधित है। उत्तर में अन्वेषण और दोहन को अलग करना, गहरे महासागर के अनिश्चित पारिस्थितिक प्रभाव स्वीकार करना तथा सावधानीपूर्ण, पारदर्शी और अंतरराष्ट्रीय रूप से वैध निर्णय-प्रक्रिया सुझाना आवश्यक है।

इस खबर को कैसे पढ़ें

गहरे महासागर के खनिज आकर्षक हैं क्योंकि स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण की आपूर्ति शृंखलाएँ केंद्रित तथा भू-राजनीतिक जोखिम से प्रभावित हैं। फिर भी समुद्रतल खाली भंडार नहीं है। बहुधात्विक पिंड बहुत लंबे समय में बनते हैं और ऐसे आवास सहारा दे सकते हैं जिन्हें विज्ञान अभी आंशिक रूप से समझता है। व्यवधान से तलछट के बादल, ध्वनि और सीमा-पार पारिस्थितिक प्रभाव हो सकते हैं, जिनका कारण तय करना और पुनर्स्थापन कठिन है। इसी कारण तकनीकी क्षमता और कानूनी अनुमति अलग रहनी चाहिए। दोहन से पहले विश्वसनीय पर्यावरणीय आधाररेखा, पारदर्शी डेटा, संचयी प्रभाव आकलन, निगरानी मानक, दायित्व नियम और गतिविधि रोकने की लागू कसौटी चाहिए। अंतरराष्ट्रीय प्राधिकरण को साझा विरासत सिद्धांत, लाभ-साझेदारी और वाणिज्यिक प्रोत्साहन में संतुलन बनाना होगा। भारत की स्वदेशी अभियांत्रिकी किसी खनन निर्णय से पहले भी मानचित्रण, अवलोकन और वैज्ञानिक ज्ञान बढ़ा सकती है। औद्योगिक भागीदारी अनुसंधान मिशन को निष्कर्ष-पूर्व दोहन धारणा में न बदले। रणनीतिक स्वायत्तता के लिए पुनर्चक्रण, सामग्री दक्षता, विविध व्यापार और जिम्मेदार अन्वेषण का संयुक्त मार्ग बेहतर है। UPSC उत्तर में खनिज सुरक्षा स्वीकार कर सावधानी सिद्धांत और वैश्विक साझा क्षेत्र शासन लागू करें।

पेपर का व्यापक संदर्भ

GS प्रश्नपत्र 3 की कथाओं को जोखिम शासन से पढ़ें: प्रारंभिक संकेत को अंतिम परिणाम से, तकनीकी क्षमता को कानूनी अनुमति से और परिचालन लक्ष्य को स्वतंत्र रूप से सत्यापित सार्वजनिक मूल्य से अलग करें।

संभावित प्रश्न

भारत की गहरे समुद्र में खनन क्षमता रणनीतिक अवसर देती है, किंतु वाणिज्यिक वैधता पर्यावरणीय साक्ष्य और अंतरराष्ट्रीय नियमों पर निर्भर है। चर्चा कीजिए।

त्वरित अभ्यास

  1. Q1

    गहरे समुद्र के अन्वेषण और दोहन को कौन-सा कथन सही अलग करता है?

    1. अन्वेषण स्वतः वाणिज्यिक खनन अधिकार देता है
    2. घरेलू तकनीक अंतरराष्ट्रीय नियमों का स्थान लेती है
    3. दोहन से पहले पर्यावरणीय साक्ष्य अनावश्यक है
    4. अन्वेषण क्षमता स्वयं वाणिज्यिक खनन की अनुमति नहीं है
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: अन्वेषण क्षमता स्वयं वाणिज्यिक खनन की अनुमति नहीं है

    अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र की वाणिज्यिक गतिविधि अंतरराष्ट्रीय दोहन ढाँचे के अधीन रहती है।

  2. Q2

    पारिस्थितिक अनिश्चितता में कौन-सी महत्वपूर्ण खनिज रणनीति उचित है?

    1. जिम्मेदार अन्वेषण को पुनर्चक्रण, दक्षता और विविध आपूर्ति से जोड़ना
    2. हर अनुमानित संसाधन को निकालने योग्य भंडार मानना
    3. आधाररेखा अध्ययन से पहले दोहन आरंभ करना
    4. परियोजना अभिकल्प से दायित्व हटाना
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: हर अनुमानित संसाधन को निकालने योग्य भंडार मानना

    संयुक्त मार्ग रणनीतिक प्रत्यास्थता बढ़ाता है और अनिश्चित समुद्रतलीय दोहन को पूर्वनिर्धारित नहीं करता।

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