CAG ने CPWD परियोजनाओं में अवास्तविक दरों और लागत अधिमूल्यन को चिह्नित कियाअर्थव्यवस्था और ऊर्जा

GS Paper 2 · 15 अगस्त 2026

CAG ने CPWD परियोजनाओं में अवास्तविक दरों और लागत अधिमूल्यन को चिह्नित किया

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने एक लेखा परीक्षा रिपोर्ट में केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) द्वारा अवास्तविक दरों और लागत के अधिक आकलन को उजागर किया है। निष्कर्ष सार्वजनिक धन के अकुशल उपयोग और कमजोर परियोजना अनुमान प्रक्रियाओं की ओर इशारा करते हैं। Article 148 के अंतर्गत एक संवैधानिक निकाय होने के नाते, CAG की टिप्पणियाँ वित्तीय जवाबदेही और संसदीय निगरानी के लिए महत्वपूर्ण हैं। रिपोर्ट सार्वजनिक अवसंरचना में खरीद सुधारों और सख्त लागत नियंत्रण तंत्र की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

यूपीएससी के लिए महत्व

प्राथमिक GS-2: CAG, सार्वजनिक वित्त पर जवाबदेही और नियंत्रण, संसदीय समितियाँ। द्वितीयक GS-3: अवसंरचना परियोजनाओं में लागत वृद्धि और आर्थिक दक्षता। GS-4: लोक प्रशासन में नैतिकता, सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी। स्थैतिक संबंध: Laxmikanth में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक पर अध्याय; Ramesh Singh में सार्वजनिक वित्त एवं बजट पर अध्याय।

इस खबर को कैसे पढ़ें

CAG की यह रिपोर्ट केवल एक विभागीय लेखा परीक्षा नहीं है; यह सार्वजनिक वित्त प्रबंधन की संरचनात्मक कमजोरी को उजागर करती है। अवास्तविक दरें और लागत अधिमूल्यन दो अलग-अलग समस्याएँ हैं—पहली अनुमान प्रक्रिया की तकनीकी विफलता है, दूसरी संभावित नैतिक चूक की ओर संकेत करती है। परीक्षा की दृष्टि से यह अंतर महत्वपूर्ण है: GS-2 में आप CAG की संवैधानिक भूमिका और संसदीय नियंत्रण के बीच संबंध बनाएँगे, जबकि GS-4 में प्रशासनिक ईमानदारी और सार्वजनिक धन के प्रति उत्तरदायित्व का प्रश्न उठेगा। Article 148 के अंतर्गत CAG की स्वतंत्रता का उद्देश्य ही यह है कि वह कार्यपालिका के वित्तीय निर्णयों की निष्पक्ष जाँच कर सके। CPWD जैसे तकनीकी विभाग में लागत अनुमानों की जाँच के लिए विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है—यही कारण है कि CAG की टिप्पणियाँ केवल लेखा परीक्षा नहीं, बल्कि प्रदर्शन लेखा परीक्षा (performance audit) का स्वरूप ले लेती हैं। मुख्य परीक्षा में इस मुद्दे को तीन स्तरों पर रखा जा सकता है: पहला, संवैधानिक—क्या CAG के पास पर्याप्त अधिकार और संसाधन हैं? दूसरा, प्रशासनिक—परियोजना अनुमान और खरीद प्रक्रिया में कौन से सुधार आवश्यक हैं? तीसरा, नैतिक—सार्वजनिक अवसंरचना में लागत वृद्धि का बोझ अंततः करदाता पर पड़ता है। उत्तर लिखते समय ध्यान रखें कि CAG की रिपोर्ट सलाहकारी होती है, बाध्यकारी नहीं। इसकी प्रभावशीलता लोक लेखा समिति (PAC) की सक्रियता पर निर्भर करती है। यही कारण है कि 2016 के PYQ में CAG को PAC का 'मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक' कहा गया था—यह संबंध संसदीय वित्तीय नियंत्रण की रीढ़ है।

पेपर का व्यापक संदर्भ

GS Paper 2 में आज का समूह संवैधानिक निकायों और नीति निदेशक तत्वों की परीक्षा है। सुप्रीम कोर्ट का प्रकाश सिंह निर्देशों की पुनः पुष्टि करना, CAG की रिपोर्ट और राजस्थान का UCC विधेयक—तीनों ही Article 148, Article 44 और संघीय ढाँचे के इर्द-गिर्द घूमते हैं। यहाँ सबसे बड़ा जाल है सतही उत्तर: केवल ‘सुप्रीम कोर्ट ने कहा’ या ‘CAG ने पाया’ लिखने के बजाय यह बताना होगा कि ये निर्णय शक्तियों के पृथक्करण और जवाबदेही की शृंखला में कहाँ बैठते हैं।

संभावित प्रश्न

CAG द्वारा CPWD परियोजनाओं में अवास्तविक दरों और लागत अधिमूल्यन का चिह्नित किया जाना सार्वजनिक वित्तीय जवाबदेही की किस कमजोर कड़ी को उजागर करता है? Article 148 के अंतर्गत CAG की टिप्पणियाँ संसदीय निगरानी को कैसे मजबूत कर सकती हैं?

त्वरित अभ्यास

  1. Q1

    CAG की रिपोर्ट में CPWD परियोजनाओं में किन दो प्रमुख समस्याओं को चिह्नित किया गया है?

    1. अवास्तविक दरें और लागत अधिमूल्यन
    2. विलंबित भुगतान और ठेकेदार विवाद
    3. पर्यावरणीय उल्लंघन और भूमि अधिग्रहण
    4. तकनीकी अक्षमता और भ्रष्टाचार
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: अवास्तविक दरें और लागत अधिमूल्यन

    रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से अवास्तविक दरों और लागत के अधिक आकलन को उजागर किया गया है, जो सार्वजनिक धन के अकुशल उपयोग की ओर इशारा करता है।

  2. Q2

    CAG की संवैधानिक स्थिति किस अनुच्छेद से निर्धारित होती है?

    1. Article 148
    2. स्रोत सामग्री के सत्यापित दायरे से बाहर का दावा
    3. स्रोत सामग्री के सत्यापित दायरे से बाहर का दावा
    4. स्रोत सामग्री के सत्यापित दायरे से बाहर का दावा
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: Article 148

    Article 148 के अंतर्गत CAG एक संवैधानिक निकाय है, जो संघ और राज्य सरकारों के लेखाओं की लेखा परीक्षा के लिए उत्तरदायी है।

संबंधित विगत वर्ष प्रश्न

  • GS-2 2016: ‘भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक लोक लेखा समिति का मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक है।’ चर्चा कीजिए।
  • GS-3 2014: भारत में अवसंरचना परियोजनाओं में लागत और समय वृद्धि के कारणों की चर्चा कीजिए।
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