GS Paper 3 · 15 अगस्त 2026
चमोली सुरंग दुर्घटना ने हिमालयी अवसंरचना विकास के जोखिमों को उजागर किया
उत्तराखंड के चमोली में एक सुरंग दुर्घटना में पानी और मलबा संरचना में घुस जाने से छह लोगों की मृत्यु हो गई और चौदह घायल हो गए। यह घटना हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की नाजुकता और अनियोजित या खराब निगरानी वाली अवसंरचना परियोजनाओं के खतरों को रेखांकित करती है। यह पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यावरणीय प्रभाव आकलन, ढलान स्थिरता और आपदा तैयारियों पर प्रश्न उठाती है। यह त्रासदी चालू परियोजनाओं की समीक्षा और सुरक्षा मानदंडों के कड़े प्रवर्तन को प्रेरित कर सकती है।
यूपीएससी के लिए महत्व
प्राथमिक GS-3: आपदा प्रबंधन, हिमालयी पारिस्थितिकी, अवसंरचना सुरक्षा, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन। द्वितीयक GS-2: शासन, आपदा प्रतिक्रिया समन्वय, एजेंसियों की जवाबदेही। स्थैतिक संबंध: हिमालयी भूविज्ञान पर NCERT भूगोल; भूस्खलन और आकस्मिक बाढ़ जोखिम पर NDMA दिशानिर्देश; हिमालयी पारिस्थितिकी पर Shankar IAS Environment।
इस खबर को कैसे पढ़ें
चमोली सुरंग दुर्घटना को केवल एक स्थानीय त्रासदी मानकर नहीं देखा जाना चाहिए। यह घटना हिमालयी क्षेत्र में अवसंरचना विकास के उस मॉडल की विफलता को दर्शाती है जो पारिस्थितिकीय संवेदनशीलता को दरकिनार कर केवल इंजीनियरिंग समाधानों पर निर्भर रहता है। परीक्षा की दृष्टि से इस घटना को तीन स्तरों पर जोड़कर देखना चाहिए। पहला, यह आपदा प्रबंधन के 'रोकथाम' चरण की कमजोरी को उजागर करती है—यदि पर्यावरणीय प्रभाव आकलन और ढलान स्थिरता मानदंडों का कड़ाई से पालन होता तो जोखिम कम किया जा सकता था। दूसरा, यह शासन के प्रश्न उठाती है: क्या परियोजना की निगरानी करने वाली एजेंसियों के बीच समन्वय और जवाबदेही का अभाव है? तीसरा, यह स्थैतिक भूगोल से जुड़ती है—हिमालय की नवीन पर्वतमाला, भ्रंश रेखाएँ और मानसूनी वर्षा का संयोजन ऐसे क्षेत्रों को अत्यधिक संवेदनशील बनाता है। उत्तर लेखन में इस घटना को केस स्टडी के रूप में प्रयोग करते हुए सुझाव देने चाहिए: नदी तलों और मलबे के पंखों पर निर्माण से बचना, सुरंग निर्माण के दौरान वास्तविक समय निगरानी, स्थानीय समुदायों को आपदा तैयारियों में शामिल करना, और परियोजना अनुमोदन से पहले स्वतंत्र भूवैज्ञानिक आकलन अनिवार्य करना। यह घटना यह भी दर्शाती है कि विकास और पर्यावरण का द्वंद्व वास्तविक नहीं है—असुरक्षित अवसंरचना दीर्घकाल में विकास को ही क्षति पहुँचाती है।
पेपर का व्यापक संदर्भ
GS Paper 3 के तीन आइटम—चमोली सुरंग दुर्घटना, वन अधिकार समीक्षा और El Niño—आपदा, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के अंतर्संबंध को उजागर करते हैं। परीक्षक यहाँ ‘विकास बनाम संरक्षण’ के द्वंद्व से आगे बढ़कर संस्थागत विफलता और नियामक कमजोरी की परतें खोलना चाहता है। हिमालयी पारिस्थितिकी की नाजुकता, Forest Rights Act का क्रियान्वयन और जलवायु पूर्वानुमान का कृषि नीति से जुड़ाव—इन्हें एक साथ पढ़ने पर ही पूरा चित्र बनता है।
संभावित प्रश्न
चमोली सुरंग दुर्घटना हिमालयी अवसंरचना परियोजनाओं में पर्यावरणीय प्रभाव आकलन और ढलान स्थिरता मानदंडों की कमजोर निगरानी को कैसे दर्शाती है? क्या मौजूदा आपदा प्रबंधन ढाँचा ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने में सक्षम है?
त्वरित अभ्यास
Q1
चमोली सुरंग दुर्घटना के संदर्भ में, हिमालयी क्षेत्रों में अवसंरचना परियोजनाओं के जोखिम को कम करने के लिए निम्नलिखित में से कौन सा उपाय सबसे उपयुक्त है?
- सभी अवसंरचना परियोजनाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना
- पर्यावरणीय प्रभाव आकलन और ढलान स्थिरता मानदंडों का कड़ा प्रवर्तन
- केवल सुरंग निर्माण तकनीक में सुधार करना
- आपदा के बाद राहत कार्यों पर अधिक ध्यान केंद्रित करना
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सही उत्तर: पर्यावरणीय प्रभाव आकलन और ढलान स्थिरता मानदंडों का कड़ा प्रवर्तन
स्रोत में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यह घटना पर्यावरणीय प्रभाव आकलन, ढलान स्थिरता और आपदा तैयारियों पर प्रश्न उठाती है। इसलिए इन मानदंडों का कड़ा प्रवर्तन सबसे उपयुक्त उपाय है, जबकि पूर्ण प्रतिबंध व्यावहारिक नहीं है और केवल तकनीकी सुधार या राहत कार्य पर्याप्त नहीं हैं।
Q2
चमोली सुरंग दुर्घटना के आधार पर, हिमालयी क्षेत्र में आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- हिमालयी क्षेत्र भूवैज्ञानिक रूप से स्थिर है, इसलिए दुर्घटनाएँ केवल मानवीय त्रुटि से होती हैं
- नदी तलों और मलबे के पंखों पर निर्माण से बचना चाहिए
- पर्यावरणीय प्रभाव आकलन केवल बड़ी परियोजनाओं के लिए आवश्यक है
- आपदा तैयारियों का अवसंरचना सुरक्षा से कोई संबंध नहीं है
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सही उत्तर: नदी तलों और मलबे के पंखों पर निर्माण से बचना चाहिए
स्रोत में दिए गए संभावित प्रश्न में स्पष्ट रूप से 'नदी तलों और मलबे के पंखों पर निर्माण से बचना' को जोखिम न्यूनीकरण का उपयुक्त उपाय बताया गया है। हिमालयी क्षेत्र भूवैज्ञानिक रूप से संवेदनशील है, और पर्यावरणीय प्रभाव आकलन सभी परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
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