करेंट अफेयर्स / आपदा प्रबंधन

आपदा प्रबंधन

खतरों, तैयारी, प्रतिक्रिया और पुनर्वास को उन संस्थाओं और सिद्धांतों से जोड़ने वाला करेंट अफेयर्स संग्रह जिन्हें UPSC में जानना जरूरी है।

  1. 15 सितम्बर 2026 · GS Paper 2

    नेपाल को भारत की आपात बिजली सहायता पड़ोस कूटनीति को ग्रिड प्रत्यास्थता से जोड़ती है

    भारत के विद्युत मंत्रालय ने नेपाल विद्युत प्राधिकरण को 13 सितंबर से 31 दिसंबर 2026 तक प्रतिदिन 18 घंटे, मध्यरात्रि से शाम 18:00 बजे तक, बिजली निर्यात की मंजूरी दी। मुजफ्फरपुर-ढलकेबर 400 किलोवोल्ट डबल-सर्किट लाइन से अधिकतम 600 मेगावाट और टनकपुर-महेंद्रनगर 132 किलोवोल्ट सिंगल-सर्किट लाइन से अधिकतम 54 मेगावाट भेजने की अनुमति है। जनवरी 2027 के बाद की मात्रा की समीक्षा दिसंबर में होगी। तात्कालिक कारण नेपाल की जलविद्युत अवसंरचना को बाढ़ से पहुँची क्षति है, जिससे घरेलू उत्पादन घटा और अतिरिक्त बिजली की आवश्यकता बनी। निर्णय दिखाता है कि सीमा-पार ग्रिड जलवायु-संबंधित व्यवधान में क्षेत्रीय प्रत्यास्थता अवसंरचना बन सकता है। इसका अर्थ यह नहीं कि हर घंटे पूरी स्वीकृत क्षमता बहेगी; वास्तविक आपूर्ति प्रणाली दशा, वाणिज्यिक व्यवस्था और पारेषण उपलब्धता पर निर्भर करेगी। टिकाऊ सहयोग में पारदर्शी समय-सारणी, ग्रिड अनुशासन, क्षतिग्रस्त परिसंपत्ति की बहाली और विविध उत्पादन चाहिए, ताकि आपात सहायता नेपाल की दीर्घकालीन ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करे, उसका विकल्प न बने।

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  2. 15 सितम्बर 2026 · GS Paper 3

    नई पीढ़ी की 1033 हेल्पलाइन राजमार्ग सुरक्षा को प्रेषण और जवाबदेही की समस्या बनाती है

    NHAI ने 1033 राष्ट्रीय राजमार्ग हेल्पलाइन को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, वास्तविक समय स्थान-पहचान और अधिक सक्षम आपात प्रेषण से उन्नत करने की योजना बनाई है, जबकि निर्णय-प्रधान परिस्थिति में मानव परिचालक बने रहेंगे। 2018 में शुरू हुई चौबीसों घंटे की सेवा चिकित्सा आपातकाल, वाहन खराबी, एम्बुलेंस, क्रेन, गश्ती वाहन, टोल प्लाजा और FASTag समस्या में सहायता देती है। यह 1.46 लाख किलोमीटर से अधिक राष्ट्रीय राजमार्ग को कवर करती है और प्रतिदिन लगभग 15,000 कॉल पाती है। प्रस्तावित मंच का लक्ष्य कॉलर का स्थान जल्दी पहचानना, अनेक भारतीय भाषाएँ समझना, उपयुक्त वाहन भेजना, अग्रिम चेतावनी देना और हेल्पलाइन, आपात सेवा तथा राजमार्ग संचालन दल में समन्वय करना है। IHMCL ने डिजाइन, तैनाती, संचालन और रखरखाव के लिए अभिरुचि पत्र माँगे हैं। तकनीक खोज और हस्तांतरण की देरी घटा सकती है, पर खरीद में स्थान-सहमति, न्यूनतम आँकड़ा संग्रह, लेखा-पथ, सेवा उपलब्धता और वैकल्पिक चैनल आवश्यक हैं। सफलता AI सुविधाओं की संख्या से नहीं, सत्यापित प्रतिक्रिया समय, सही प्रेषण, समाधान और समान बहुभाषी पहुँच से मापी जानी चाहिए।

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  3. 6 सितम्बर 2026 · GS Paper 3

    IMD की वर्षा चेतावनी दिखाती है कि पूर्वानुमान सार्वजनिक जोखिम प्रबंधन कैसे बनता है

    भारत मौसम विज्ञान विभाग की 5 सितंबर 2026 की विज्ञप्ति ने पिछली अवलोकन अवधि में पूर्वी राजस्थान, पश्चिमी मध्य प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश के कुछ भागों में 12-20 सेमी अति भारी वर्षा तथा कई अन्य क्षेत्रों में 7-11 सेमी भारी वर्षा दर्ज की। निम्न दबाव क्षेत्र के प्रभाव में उस दिन पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश में कहीं-कहीं भारी से अति भारी वर्षा का अनुमान था। बुलेटिन ने केवल मौसम नहीं बताया; उसने फसल, कमजोर संरचना, सड़क, रेल, निचली बस्ती और दृश्यता के जोखिम पहचाने तथा नागरिकों, पर्यटन, परिवहन, खेत, पशुधन और मत्स्य क्षेत्र के लिए कार्रवाई-सुझाव दिए। उसमें जिला-उन्मुख सूचना और आकस्मिक बाढ़ मार्गदर्शन भी था, साथ ही अधिक अग्रिम अवधि पर पूर्वानुमान की शुद्धता घटने की चेतावनी दी गई। यह प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान है, जिसमें वैज्ञानिक संभावना को प्रशासन और परिवार के निर्णय में बदला जाता है। इसका मूल्य अंतिम छोर तक संचार, स्थानीय विश्वसनीय सीमा, सुगम चेतावनी, अंतर-एजेंसी प्रक्रिया और क्षति घटने पर प्रतिक्रिया से तय होगा।

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  4. 30 अगस्त 2026 · GS Paper 3

    PMFBY के पैमाने ने दावा-गुणवत्ता को कृषि लचीलेपन की अगली कसौटी बनाया

    नए PMFBY पृष्ठभूमि-पत्र के अनुसार खरीफ 2016 से रबी 2025-26 तक 92.46 करोड़ से अधिक किसान आवेदनों का बीमा हुआ और 26.33 करोड़ से अधिक आवेदनों को ₹2.06 लाख करोड़ से अधिक के दावे मिले। केंद्रीय बजट में 2026-27 के लिए ₹12,200 करोड़ आवंटित हैं। किसान खरीफ खाद्यान्न और तिलहन फसलों के लिए अधिकतम 2%, रबी खाद्यान्न और तिलहन के लिए 1.5% तथा वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के लिए 5% प्रीमियम देते हैं; शेष राशि सरकारें वहन करती हैं। 27 अगस्त 2026 तक खरीफ कवरेज 241.38 लाख किसान और 278.12 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा। योजना रोकी गई बुवाई, खड़ी फसल, स्थानीय आपदा और सीमित कटाई-पश्चात अवधि के निर्दिष्ट जोखिमों को समेटती है। YES-TECH और WINDS जैसी प्रणालियां उपज तथा मौसम साक्ष्य सुधारने के लिए हैं। फिर भी पैमाना प्रदर्शन सिद्ध नहीं करता। किसानों को स्पष्ट सूचना, सही नामांकन, विश्वसनीय नुकसान आकलन, समय पर दावा, सुलभ शिकायत निवारण और पारदर्शी राज्यवार आंकड़े चाहिए। बीमा को सिंचाई, विस्तार सेवा और जलवायु-लचीली खेती का स्थान नहीं लेना चाहिए।

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  5. 25 अगस्त 2026 · GS Paper 3

    UNCCD COP17 ने भूमि पुनर्स्थापन को प्रमुख आर्थिक निवेश के रूप में रखा

    उलानबटार में UNCCD COP17 के 24 अगस्त 2026 के वित्त दिवस का केंद्र स्वस्थ भूमि और सूखा-सहनशीलता के लिए नवाचारी वित्त था। UNCCD के आकलन में 2025 से 2030 के बीच प्रतिवर्ष लगभग USD 355 अरब की आवश्यकता और मौजूदा निवेश लगभग USD 77 अरब बताया गया है, जिससे वार्षिक अंतर लगभग USD 278 अरब है। निष्क्रियता की वार्षिक लागत USD 878 अरब और आवश्यक निवेश से संभावित वार्षिक लाभ USD 1.8 ट्रिलियन आंका गया है। मंत्रिस्तरीय संवाद में रियायती संसाधन, गारंटी, बीमा, पर्यावरण कर, भूमि-क्षरण शुल्क और स्थिरता-संबद्ध वित्तीय साधन शामिल थे। उद्देश्य पुनर्स्थापन को सीमित पर्यावरणीय खर्च के स्थान पर अर्थव्यवस्था, भोजन, जल और सामाजिक सहनशीलता की योजना में लाना है, साथ ही यह स्वीकार करना कि अकेला सार्वजनिक वित्त अंतर पूरा नहीं कर सकता।

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  6. 24 अगस्त 2026 · GS Paper 2

    NGT ने संशोधित गंगा बाढ़-मैदान नियमों पर केंद्र से जवाब मांगा

    राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने गंगा संरक्षण ढांचे में संशोधन को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा है। याचिका में आरोप है कि नदी और उसकी सहायक नदियों के किनारे निर्माण-निषेध सुरक्षा हटाई गई तथा सक्रिय बाढ़-मैदान को 5 वर्ष में 1 बार आने वाली बाढ़ की वापसी-अवधि से परिभाषित किया गया, जिसका अर्थ किसी वर्ष में 20 प्रतिशत संभावना है। पीठ ने इन आरोपों को दर्ज किया है, उनके गुण-दोष पर निर्णय नहीं दिया। याचिका में पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, पुराने न्यायिक निर्णय और मूल अधिसूचना का उल्लेख है। अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को होगी।

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  7. 18 अगस्त 2026 · GS Paper 3

    बिहार मंदिर भगदड़ में सात की मौत: धार्मिक आयोजनों में आपदा प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण की विफलताएँ

    बिहार के लखीसराय स्थित Ashok Dham मंदिर में हुई भगदड़ में सात श्रद्धालुओं, जिनमें अधिकांश महिलाएँ थीं, की मृत्यु हो गई। यह घटना तब हुई जब दो ट्रेनों में आए श्रद्धालु भगवान शिव को पवित्र जल अर्पित करने के लिए एक साथ आगे बढ़े। यह भारत में धार्मिक स्थलों पर होने वाली भगदड़ की पुनरावृत्तियों की शृंखला का नवीनतम मामला है, जो भीड़ प्रबंधन, जोखिम आकलन और आपातकालीन प्रत्युत्तर में गंभीर कमियों को उजागर करता है। यह सामूहिक आयोजनों में भीड़ नियंत्रण पर NDMA दिशा-निर्देशों के कठोर अनुपालन और धार्मिक संरचनाओं के आसपास बेहतर आधारभूत अवसंरचना नियोजन की आवश्यकता को रेखांकित करता है। यह त्रासदी रेलवे, ज़िला प्रशासन और मंदिर प्राधिकरणों के बीच अंतर-एजेंसी समन्वय पर भी प्रश्न खड़े करती है।

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  8. 16 अगस्त 2026 · GS Paper 3

    MSC Elsa 3 जलपोत दुर्घटना: NCSCM शोध में कोई महत्वपूर्ण पर्यावरणीय प्रभाव नहीं मिला, पर लक्षद्वीप के पारिस्थितिकी तंत्र की संवेदनशीलता उजागर हुई

    राष्ट्रीय सतत तटीय प्रबंधन केंद्र (NCSCM) द्वारा किए गए शोध ने निष्कर्ष निकाला कि MSC Elsa 3 जलपोत दुर्घटना से लक्षद्वीप द्वीपसमूह और तटीय क्षेत्रों को कोई महत्वपूर्ण पर्यावरणीय क्षति नहीं हुई है। हालाँकि, रिपोर्ट में दूरस्थ द्वीपीय पारिस्थितिकी तंत्रों की समुद्री दुर्घटनाओं के प्रति अंतर्निहित संवेदनशीलता को रेखांकित किया गया। यह घटना भारत के द्वीपीय क्षेत्रों के लिए मजबूत समुद्री सुरक्षा और पर्यावरणीय अनुक्रिया तंत्र की आवश्यकता को उजागर करती है।

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  9. 15 अगस्त 2026 · GS Paper 3

    चमोली सुरंग दुर्घटना ने हिमालयी अवसंरचना विकास के जोखिमों को उजागर किया

    उत्तराखंड के चमोली में एक सुरंग दुर्घटना में पानी और मलबा संरचना में घुस जाने से छह लोगों की मृत्यु हो गई और चौदह घायल हो गए। यह घटना हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की नाजुकता और अनियोजित या खराब निगरानी वाली अवसंरचना परियोजनाओं के खतरों को रेखांकित करती है। यह पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यावरणीय प्रभाव आकलन, ढलान स्थिरता और आपदा तैयारियों पर प्रश्न उठाती है। यह त्रासदी चालू परियोजनाओं की समीक्षा और सुरक्षा मानदंडों के कड़े प्रवर्तन को प्रेरित कर सकती है।

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  10. 15 अगस्त 2026 · GS Paper 1

    दशकों में सबसे मजबूत El Niño वर्ष के अंत तक संभव: भारत के लिए निहितार्थ

    US National Oceanic and Atmospheric Administration (NOAA) ने 2026 के अंत तक एक मजबूत El Niño विकसित होने की उच्च संभावना का पूर्वानुमान लगाया है, जो संभवतः दशकों में सबसे मजबूत हो सकता है। El Niño आम तौर पर भारतीय मानसून को कमजोर करता है, जिससे सूखा, कृषि संकट, जल की कमी और उच्च खाद्य मुद्रास्फीति होती है। यह चरम मौसमी घटनाओं की आवृत्ति भी बढ़ाता है, जो आपदा प्रबंधन और ग्रामीण आजीविका के लिए चुनौतियाँ उत्पन्न करता है।

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  11. 14 अगस्त 2026 · GS Paper 3

    चमोली सुरंग हादसा: बचाव से आगे जोखिम शासन तक उत्तर ले जाएं

    13 अगस्त को चमोली में निर्माणाधीन जलविद्युत परियोजना की सुरंग में पानी और मलबा घुसने से सात लोगों की मृत्यु हुई और 14 घायल हुए। बचाव में सेना, ITBP, NDRF, SDRF, जिला दल, पुलिस और CISF कर्मियों ने भाग लिया।

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