सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा DGP चयन के लिए UPSC बैठक पर रोक लगाई; प्रकाश सिंह निर्देशों की पुनः पुष्टि कीआंतरिक सुरक्षा

GS Paper 2 · 15 अगस्त 2026

सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा DGP चयन के लिए UPSC बैठक पर रोक लगाई; प्रकाश सिंह निर्देशों की पुनः पुष्टि की

सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा पुलिस महानिदेशक के चयन के लिए UPSC की बैठक को 18 अगस्त तक स्थगित कर दिया है, जो प्रकाश सिंह मामले (2006) से जुड़ा मामला है। उस मामले ने पुलिस सुधारों के लिए निर्देश दिए थे, जिनमें UPSC-तैयार पैनल से DGP का चयन और निर्धारित दो वर्ष का कार्यकाल शामिल है। न्यायालय का हस्तक्षेप कुछ राज्यों द्वारा निरंतर अनुपालन न करने और राजनीतिक हस्तक्षेप से पुलिस की स्वतंत्रता की आवश्यकता को रेखांकित करता है। परिणाम नियुक्ति प्रक्रिया और पुलिस प्रशासन में संघीय संतुलन को आकार देगा।

यूपीएससी के लिए महत्व

प्राथमिक GS-2: पुलिस सुधार, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय, संघवाद, UPSC की भूमिका, सिविल सेवाएँ। द्वितीयक GS-3: आंतरिक सुरक्षा, पुलिस प्रशासन, कानून-व्यवस्था। स्थैतिक संबंध: UPSC और राज्य लोक सेवा आयोगों पर Laxmikanth अध्याय; शासन में नैतिकता पर ARC द्वितीय रिपोर्ट; प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ, 2006।

इस खबर को कैसे पढ़ें

यह मामला केवल एक राज्य की नियुक्ति प्रक्रिया का विवाद नहीं है, बल्कि पुलिस सुधारों के संवैधानिक ढांचे और संघीय संतुलन की परीक्षा है। प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक के चयन के लिए UPSC द्वारा तैयार पैनल का निर्देश दिया था, जिसका उद्देश्य राजनीतिक हस्तक्षेप को सीमित करना और पुलिस प्रशासन को स्वतंत्रता देना था। ओडिशा में UPSC बैठक पर रोक लगाने का न्यायालय का निर्णय यह दर्शाता है कि कई राज्य अभी भी इन निर्देशों का पूर्ण अनुपालन नहीं कर रहे हैं। यह स्थिति संघीय ढांचे में केंद्र-राज्य संबंधों के तनाव को भी उजागर करती है, क्योंकि UPSC एक केंद्रीय संवैधानिक निकाय है और राज्य पुलिस बल राज्य सूची का विषय है। न्यायालय का हस्तक्षेप यह स्पष्ट करता है कि पुलिस सुधारों को लागू करने में न्यायपालिका की सक्रिय भूमिका बनी हुई है। साथ ही, यह प्रश्न उठता है कि क्या पुलिस सुधारों के लिए केंद्रीय कानून की आवश्यकता है या राज्यों को स्वायत्तता दी जानी चाहिए। न्यायालय का यह कदम पुलिस प्रशासन में जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग को भी रेखांकित करता है, जो सुशासन का मूल तत्व है।

पेपर का व्यापक संदर्भ

GS Paper 2 में आज का समूह संवैधानिक निकायों और नीति निदेशक तत्वों की परीक्षा है। सुप्रीम कोर्ट का प्रकाश सिंह निर्देशों की पुनः पुष्टि करना, CAG की रिपोर्ट और राजस्थान का UCC विधेयक—तीनों ही Article 148, Article 44 और संघीय ढाँचे के इर्द-गिर्द घूमते हैं। यहाँ सबसे बड़ा जाल है सतही उत्तर: केवल ‘सुप्रीम कोर्ट ने कहा’ या ‘CAG ने पाया’ लिखने के बजाय यह बताना होगा कि ये निर्णय शक्तियों के पृथक्करण और जवाबदेही की शृंखला में कहाँ बैठते हैं।

संभावित प्रश्न

प्रकाश सिंह मामले (2006) के निर्देशों के बावजूद राज्य DGP चयन में राजनीतिक हस्तक्षेप क्यों बना हुआ है? सुप्रीम कोर्ट का वर्तमान हस्तक्षेप संघीय संतुलन और पुलिस स्वतंत्रता के बीच किस तनाव को उजागर करता है?

त्वरित अभ्यास

  1. Q1

    प्रकाश सिंह मामले (2006) में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक के चयन के लिए किस निकाय द्वारा तैयार पैनल का निर्देश दिया था?

    1. गृह मंत्रालय
    2. संघ लोक सेवा आयोग
    3. राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद
    4. राज्य लोक सेवा आयोग
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: संघ लोक सेवा आयोग

    प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि पुलिस महानिदेशक का चयन UPSC द्वारा तैयार पैनल से किया जाना चाहिए, ताकि राजनीतिक हस्तक्षेप कम हो और पुलिस की स्वतंत्रता सुनिश्चित हो।

  2. Q2

    सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा पुलिस महानिदेशक के चयन के लिए UPSC की बैठक को किस तिथि तक स्थगित कर दिया है?

    1. स्रोत सामग्री के सत्यापित दायरे से बाहर का दावा
    2. स्रोत सामग्री के सत्यापित दायरे से बाहर का दावा
    3. स्रोत सामग्री के सत्यापित दायरे से बाहर का दावा
    4. 18 अगस्त
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: 18 अगस्त

    सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा पुलिस महानिदेशक के चयन के लिए UPSC की बैठक को 18 अगस्त तक स्थगित कर दिया है, जो प्रकाश सिंह मामले के निर्देशों के अनुपालन से जुड़ा मामला है।

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