ऑनलाइन कट्टरपंथीकरण: रिपोर्ट कहती है कि पाकिस्तान के नए भर्ती भारतीय किशोर हैंआंतरिक सुरक्षा

GS Paper 3 · 17 अगस्त 2026

ऑनलाइन कट्टरपंथीकरण: रिपोर्ट कहती है कि पाकिस्तान के नए भर्ती भारतीय किशोर हैं

सीमा पार आतंकवाद की एक नई प्रवृत्ति में पाकिस्तान से जुड़ी संस्थाएँ भारतीय किशोरों को सीमा पार किए बिना ऑनलाइन भर्ती कर रही हैं। यह एक महत्वपूर्ण आंतरिक सुरक्षा चुनौती है क्योंकि कट्टरपंथीकरण सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से दूरस्थ रूप से हो सकता है। यह घटनाक्रम साइबर निगरानी, कट्टरपंथीकरण-रोधी कार्यक्रमों और अभिभावक जागरूकता की आवश्यकता को रेखांकित करता है। इससे डिजिटल सुरक्षा और कट्टरपंथीकरण-रोधी में नीतिगत बदलाव हो सकते हैं।

यूपीएससी के लिए महत्व

प्राथमिक GS-3 आंतरिक सुरक्षा (कट्टरपंथीकरण, साइबर सुरक्षा, सीमा पार आतंकवाद); द्वितीयक GS-2 शासन (साइबर विनियमन)। यह सोशल मीडिया के दुरुपयोग, युवाओं के कट्टरपंथीकरण और आंतरिक सुरक्षा में राज्यों की भूमिका से जुड़ता है। GS-3 आंतरिक सुरक्षा के आतंकवाद और साइबर खतरों पर अध्यायों से प्रासंगिक।

इस खबर को कैसे पढ़ें

यह रिपोर्ट आंतरिक सुरक्षा के पारंपरिक ढाँचे को चुनौती देती है। अब तक सीमा पार आतंकवाद का विश्लेषण घुसपैठ, हथियारों की तस्करी और सीमा प्रबंधन पर केंद्रित रहा है। नई प्रवृत्ति में भर्ती का स्थान ही बदल गया है—युद्धक्षेत्र नहीं, सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड प्लेटफ़ॉर्म। इसका अर्थ है कि खतरे का आकलन अब केवल सीमावर्ती ज़िलों तक सीमित नहीं रह सकता; कोई भी किशोर, किसी भी शहर में, बिना किसी पूर्व आपराधिक संपर्क के कट्टरपंथीकरण का शिकार हो सकता है। परीक्षा की दृष्टि से यह घटनाक्रम तीन स्तरों पर जुड़ता है। पहला, साइबर सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा का अभिसरण—एन्क्रिप्शन की तकनीकी चुनौती और निगरानी की कानूनी सीमाएँ एक साथ सामने आती हैं। दूसरा, कट्टरपंथीकरण-रोधी कार्यक्रमों की प्रकृति—क्या वे केवल सुरक्षा एजेंसियों का कार्य हैं या शिक्षा, परिवार और नागरिक समाज की साझा ज़िम्मेदारी? तीसरा, राज्यों की भूमिका—पुलिस और ख़ुफ़िया तंत्र का समन्वय, क्योंकि स्थानीय शिकायतों का दोहन भर्ती का एक माध्यम बन सकता है। मुख्य परीक्षा में उत्तर लिखते समय केवल खतरे का वर्णन पर्याप्त नहीं होगा; रणनीति में तकनीकी उपाय (साइबर गश्त, प्लेटफ़ॉर्म के साथ सहयोग), सामाजिक उपाय (अभिभावक जागरूकता, विद्यालय स्तर पर डिजिटल साक्षरता) और कानूनी उपाय (मौजूदा क़ानूनों की पर्याप्तता का आकलन) का संतुलन दिखाना होगा। ध्यान दें कि रिपोर्ट में 'राज्य-प्रायोजित साइबर हमले' को संभावित कारणों की सूची में रखा गया है, परंतु यह भर्ती की प्रक्रिया से भिन्न श्रेणी है—प्रारंभिक परीक्षा में ऐसे विकल्पों को पहचानने का अभ्यास आवश्यक है।

पेपर का व्यापक संदर्भ

GS-3 के चारों मद एक ही आर्थिक-सुरक्षा स्पेक्ट्रम पर हैं: उर्वरक सब्सिडी का वितरण संकट, सीमा पार डिजिटल भर्ती, और चंद्र चौकी में तकनीकी सहयोग। सामान्य गलती यह है कि अभ्यर्थी इन्हें अलग-अलग 'टॉपिक' मानकर रट लेते हैं, जबकि परीक्षक चाहता है कि आप आपूर्ति श्रृंखला, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष कूटनीति को एक ही राष्ट्रीय क्षमता निर्माण के आयाम के रूप में देखें।

संभावित प्रश्न

पाकिस्तान से जुड़ी संस्थाओं द्वारा भारतीय किशोरों की ऑनलाइन भर्ती यह दर्शाती है कि आंतरिक सुरक्षा का मोर्चा अब भौतिक सीमा से हटकर डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर है—क्या मौजूदा साइबर निगरानी और कट्टरपंथीकरण-रोधी कार्यक्रम इसके लिए पर्याप्त हैं?

त्वरित अभ्यास

  1. Q1

    रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान से जुड़ी संस्थाओं द्वारा भारतीय किशोरों की ऑनलाइन भर्ती की नई प्रवृत्ति की सबसे प्रमुख विशेषता क्या है?

    1. भर्ती के लिए सीमा पार करने की आवश्यकता नहीं होती
    2. भर्ती केवल सीमावर्ती ज़िलों में होती है
    3. भर्ती में केवल वयस्कों को लक्षित किया जाता है
    4. भर्ती के लिए प्रत्यक्ष आमने-सामने संपर्क अनिवार्य है
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: भर्ती के लिए सीमा पार करने की आवश्यकता नहीं होती

    रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि भर्ती सीमा पार किए बिना ऑनलाइन होती है, अर्थात भौगोलिक सीमा अब बाधा नहीं रही।

  2. Q2

    रिपोर्ट में भारतीय किशोरों के ऑनलाइन कट्टरपंथीकरण के संभावित कारणों में निम्नलिखित में से किसे शामिल किया गया है?

    1. एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग
    2. सीमा पर सैन्य तैनाती में कमी
    3. विदेशी मुद्रा विनिमय दर में उतार-चढ़ाव
    4. कृषि उत्पादकता में गिरावट
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग

    रिपोर्ट में एन्क्रिप्टेड प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से दूरस्थ कट्टरपंथीकरण को प्रमुख कारण बताया गया है; अन्य विकल्प स्रोत में उल्लिखित नहीं हैं।

संबंधित विगत वर्ष प्रश्न

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