GS Paper 2 · 18 अगस्त 2026
भारत-बांग्लादेश संबंध: प्रधानमंत्री रहमान की यात्रा के लिए ढाका की शेख हसीना के प्रत्यर्पण की शर्त
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत की प्रस्तावित यात्रा से पहले, ढाका ने कथित तौर पर एक 'लाल रेखा' खींचते हुए मांग की है कि वर्तमान में भारत में रह रही पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को वापस भेजा जाए। यह शर्त 2024 में बांग्लादेश में हुए राजनीतिक परिवर्तन के बाद भारत-बांग्लादेश द्विपक्षीय संबंधों में तनाव को रेखांकित करती है। इस मुद्दे में भारत की प्रत्यर्पण संधि संबंधी बाध्यताएँ, शरण देने की प्रथाएँ और दक्षिण एशिया में व्यापक भू-राजनीतिक हित शामिल हैं, जिससे व्यापार, सुरक्षा और संपर्क सहयोग प्रभावित हो सकता है।
यूपीएससी के लिए महत्व
प्राथमिक GS-2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध: भारत और उसके पड़ोसी, बांग्लादेश के साथ द्विपक्षीय संबंध, प्रत्यर्पण संधियाँ)। द्वितीयक GS-3 (आंतरिक सुरक्षा: सीमा-पार निहितार्थ) और GS-2 (राजव्यवस्था: भारत का प्रत्यर्पण कानून)। यह भारत की नेबरहुड फर्स्ट नीति, 2013 भारत-बांग्लादेश प्रत्यर्पण संधि और क्षेत्रीय कूटनीति से जुड़ा है। पाठ्यपुस्तक संदर्भ: MEA करेंट अफेयर्स, IDSA/ORF विश्लेषण, और Laxmikanth का भारत की विदेश नीति पर अध्याय।
इस खबर को कैसे पढ़ें
यह समाचार केवल एक द्विपक्षीय तनाव नहीं, बल्कि भारत की विदेश नीति के तीन स्तरों—कानूनी, कूटनीतिक और क्षेत्रीय—की परीक्षा है। पहला, प्रत्यर्पण संधि का प्रश्न: भारत और बांग्लादेश के बीच 2013 में हुई संधि में राजनीतिक अपराधों के लिए अपवाद हो सकते हैं, परंतु यहाँ मामला आपराधिक आरोपों का है, जिससे भारत की कानूनी बाध्यता स्पष्ट नहीं है। दूसरा, शरण की प्रथा: भारत ने पड़ोसी देशों के राजनीतिक नेताओं को शरण देने का इतिहास रखा है, परंतु वर्तमान सरकार की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति में स्थिरता को प्राथमिकता दी गई है। तीसरा, क्षेत्रीय भू-राजनीति: बांग्लादेश में 2024 का राजनीतिक परिवर्तन चीन और पाकिस्तान के लिए अवसर बना सकता है; ऐसे में भारत को संबंध सुधारने और अपनी सुरक्षा चिंताओं के बीच संतुलन बनाना होगा। परीक्षा की दृष्टि से यह मुद्दा 'प्रत्यर्पण संधि बनाम शरण' के वैचारिक अंतर को समझने का अवसर देता है। छात्रों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रत्यर्पण एक संधि-आधारित कानूनी प्रक्रिया है, जबकि शरण एक संप्रभु राज्य का विवेकाधीन निर्णय है। इसके अतिरिक्त, भारत के घरेलू कानून (जैसे प्रत्यर्पण अधिनियम) और अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों के बीच समन्वय पर भी ध्यान देना चाहिए। मुख्य परीक्षा में उत्तर लिखते समय इस घटना को 'क्षेत्रीय स्थिरता बनाम मानवीय चिंता' के ढाँचे में रखकर विश्लेषण करें, और भारत के विकल्पों—जैसे मध्यस्थता, कानूनी प्रक्रिया का पालन, या कूटनीतिक विलंब—का मूल्यांकन करें।
पेपर का व्यापक संदर्भ
GS-2 के चारों मदों में एक ही धागा है: संस्थागत जवाबदेही और अधिकार-सीमा का संतुलन। बांग्लादेश का प्रत्यर्पण मुद्दा संधि-दायित्व बनाम शरण-प्रथा का द्वंद्व है, CAG की रिपोर्ट संवैधानिक लेखापरीक्षा की शक्ति दिखाती है, और CJI का वक्तव्य न्यायपालिका में प्रौद्योगिकी अपनाने की दिशा तय करता है। यहाँ मानक जाल है: हर मुद्दे को अलग-थलग पढ़ना। परीक्षक चाहता है कि आप प्रत्यर्पण संधि, CAG के अनुच्छेद और ई-कोर्ट परियोजना को एक ही शासन-ढाँचे में देखें।
संभावित प्रश्न
शेख हसीना के प्रत्यर्पण की माँग भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति और 2013 की प्रत्यर्पण संधि के बीच किस प्रकार तनाव पैदा करती है? क्या शरण देने की प्रथा संधि-दायित्व से ऊपर हो सकती है?
त्वरित अभ्यास
Q1
भारत-बांग्लादेश प्रत्यर्पण संधि के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह संधि 2013 में हस्ताक्षरित हुई थी। 2. संधि के तहत राजनीतिक अपराधों के लिए प्रत्यर्पण अनिवार्य है। उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 2
- 1 और 2 दोनों
- न तो 1 और न ही 2
उत्तर देखें
सही उत्तर: केवल 1
स्रोत में स्पष्ट है कि भारत-बांग्लादेश प्रत्यर्पण संधि 2013 में हुई थी, इसलिए कथन 1 सही है। कथन 2 गलत है क्योंकि स्रोत में राजनीतिक अपराधों के लिए अनिवार्य प्रत्यर्पण का उल्लेख नहीं है; प्रत्यर्पण संधियों में प्रायः राजनीतिक अपवाद होते हैं।
Q2
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की प्रस्तावित भारत यात्रा से पहले ढाका ने क्या शर्त रखी है?
- भारत से व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर
- शेख हसीना का प्रत्यर्पण
- सीमा विवाद का समाधान
- सैन्य अभ्यास में भागीदारी
उत्तर देखें
सही उत्तर: शेख हसीना का प्रत्यर्पण
स्रोत के अनुसार, ढाका ने यात्रा से पहले पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत से वापस भेजने की मांग की है, जो एक 'लाल रेखा' के रूप में प्रस्तुत की गई है।
संबंधित विगत वर्ष प्रश्न
- GS-2 2024: भारत-बांग्लादेश संबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा
- GS-2 2016: प्रत्यर्पण संधियाँ और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
- GS-2 2019: नेबरहुड फर्स्ट नीति