आंतरिक सुरक्षाGS Paper 3 · 25 अगस्त 2026
राष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन ने खुफिया समेकन और समन्वित क्रियान्वयन पर बल दिया
9वां 2 दिवसीय राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन 24 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में मिश्रित माध्यम से आरंभ हुआ, जिसमें 850 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए। पहले दिन आतंकवाद-रोधी कार्रवाई, बहु-एजेंसी केंद्र के माध्यम से खुफिया समेकन, मादक पदार्थ नियंत्रण, अवैध प्रवासन, साइबर अपराध और छद्म युद्ध पर चर्चा हुई। गृह मंत्री ने प्रहार योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण, उपलब्ध अनुपस्थिति-विचारण प्रावधानों सहित तेज सुनवाई, गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम मामलों की समेकित जांच और मानक परिचालन प्रक्रिया बनाने हेतु बहु-एजेंसी केंद्र की सूचना के कृत्रिम बुद्धिमत्ता विश्लेषण पर बल दिया। अगले दिन निम्न-आकाशीय प्रणालियों के खतरे, नीली अर्थव्यवस्था की सुरक्षा, सूचना युद्ध और जैव-सुरक्षा ढांचे पर विचार निर्धारित था। वरिष्ठ नेतृत्व, क्षेत्रीय अनुभव और विशेषज्ञता जोड़ने के लिए सम्मेलन 2021 से प्रतिवर्ष मिश्रित माध्यम से आयोजित होता है।
यूपीएससी के लिए महत्व
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 में विधिकता, संघीय जवाबदेही और प्रमाण मानक बनाए रखते हुए समग्र-सरकार सुरक्षा दृष्टिकोण का परीक्षण करें। खुफिया समेकन तभी उपयोगी है जब सूचना की गुणवत्ता, मानवीय समीक्षा और परिचालन उत्तरदायित्व स्पष्ट हों।
इस खबर को कैसे पढ़ें
आधुनिक सुरक्षा खतरे विभागीय सीमा पार करते हैं। एक साइबर घुसपैठ में वित्तीय धोखाधड़ी, विदेशी अवसंरचना, कूटित संचार और स्थानीय पुलिसिंग एक साथ जुड़ सकते हैं। खुफिया समेकन अलग-अलग सामान्य दिखने वाले संकेत जोड़ सकता है, पर आंकड़ा केंद्रीकरण अपने-आप समझ नहीं बनाता। सूचना अधूरी, दोहराई हुई, पक्षपाती या किसी अन्य उद्देश्य के लिए एकत्र हो सकती है। मानवीय विश्लेषक संदर्भ देखें, विश्वास स्तर दर्ज करें और सूचना से कार्रवाई तक जांच योग्य क्रम रखें। कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रारूप पहचान और खोज भार घटा सकती है, किंतु गलत संकेत निर्दोष लोगों की ओर दमनकारी शक्ति मोड़ सकते हैं। इसलिए विधिक अधिकार, आवश्यकता, आनुपातिकता, स्वतंत्र समीक्षा और आंकड़ा-अवधि सीमा जरूरी हैं। संघीय समन्वय में भी स्पष्टता चाहिए—पुलिस राज्य का मुख्य विषय है, जबकि केंद्रीय एजेंसियों के पास विशेष और सीमा-पार क्षमता है। सम्मेलन प्राथमिकता मिला सकता है, लेकिन वास्तविक सफलता के लिए परस्पर कार्यशील मानक, प्रशिक्षित जांचकर्ता, न्यायवैज्ञानिक क्षमता और संयुक्त अभ्यास चाहिए। तेज सुनवाई में निष्पक्ष प्रक्रिया और प्रमाण की अखंडता बनी रहे। UPSC में राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावशीलता और संवैधानिक शासन दोनों मानें। संचालन में गोपनीयता जरूरी हो सकती है, फिर भी समेकित प्रदर्शन, निरीक्षण और शिकायत व्यवस्था जवाबदेह रह सकती है। सही कसौटी एकत्र आंकड़े नहीं, बल्कि समय पर उपयोगी सूचना, नुकसान की रोकथाम, विफलता से सीख और असाधारण शक्ति का सीमित प्रयोग है। तकनीक पेशेवर निर्णय मजबूत करे, उत्तरदायित्व का अपारदर्शी विकल्प न बने।
पेपर का व्यापक संदर्भ
सुरक्षा, पर्यावरण और कृषि को मापनीय सहनशीलता से समझें। खुफिया समेकन में विधिकता और मानवीय समीक्षा, पुनर्स्थापन वित्त में वास्तविक पारिस्थितिक अतिरिक्तता, तथा बीज नवाचार में पारदर्शी परीक्षण और न्यायपूर्ण किसान अनुबंध चाहिए। क्षमता का अर्थ तनाव में भी अधिकार और सार्वजनिक संसाधन बचाते हुए बार-बार प्रदर्शन करना है।
संभावित प्रश्न
प्रौद्योगिकी-सक्षम खुफिया समेकन राष्ट्रीय सुरक्षा समन्वय सुधार सकता है, पर इसके लिए मजबूत विधिक और संस्थागत सुरक्षा उपाय भी चाहिए। विश्लेषण कीजिए।
त्वरित अभ्यास
Q1
खुफिया समेकन में मानवीय समीक्षा क्यों जरूरी है?
- आंकड़े और संकेत को संदर्भ तथा विश्वास आकलन चाहिए
- यह हर सूचना साझेदारी रोकती है
- यह विधिक अधिकार अनावश्यक बनाती है
- यह त्रुटि असंभव करती है
उत्तर देखें
सही उत्तर: आंकड़े और संकेत को संदर्भ तथा विश्वास आकलन चाहिए
विश्लेषक अनिश्चित सूचना का संदर्भ समझते और निर्णय के लिए उत्तरदायी रहते हैं।
Q2
प्रौद्योगिकी-सक्षम सुरक्षा कार्रवाई का मार्गदर्शक सिद्धांत क्या हो?
- असीमित भंडारण
- बिना समीक्षा गुप्त मानक
- आवश्यकता और आनुपातिकता
- हर संकेत पर स्वचालित दमन
उत्तर देखें
सही उत्तर: आवश्यकता और आनुपातिकता
कार्रवाई विधिक, आवश्यक और खतरे के अनुपात में होनी चाहिए।
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