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डूइट करेंट अफेयर्स डेस्क · 17 सितम्बर 2026

17 सितम्बर 2026 · 6 तथ्य

यूपीएससी करेंट अफेयर्स — 17 सितम्बर 2026

आज का संस्करण एक समान क्रियान्वयन समस्या का अध्ययन करता है: नीतिगत साधन तभी मूल्य बनाता है जब संस्था सूचना या सरल पहुँच को जवाबदेह परिणाम में बदले। ग्रामीण स्वच्छता को सामुदायिक सत्यापन और मरम्मत, छोटे निर्यातक को सुरक्षा बनाए रखते हुए अनुपातिक अनुपालन, व्यापार विश्लेषण को मूल्य शृंखला की गहराई, इलेक्ट्रिक गतिशीलता को प्रणालीगत तैयारी, बहुभाषी Edge AI को field assurance और जलवायु dashboard को विश्वसनीय disclosure चाहिए। हर समाचार में घोषणा, सहायक साधन और सत्यापित परिणाम अलग करें।

जीएस पेपर 2 — राजव्यवस्था, शासन, अंतर्राष्ट्रीय संबंध

GS 2 के लिए देखें कि स्थानीय विचार-विमर्श और डिजिटल प्रकटीकरण जवाबदेही कैसे बनाते हैं। कौन आँकड़ा देता है, कौन सत्यापन करता है, कौन सुधार माँग सकता है और नागरिक साक्ष्य समझ सकता है या नहीं, यह पहचानें। सूचना को जिम्मेदारी, उपचार और अनुवर्ती कार्रवाई से जोड़ने पर ही संस्था प्रभावी होती है।

स्वच्छ सेवा आकलन ने ग्रामीण स्वच्छता दावों को ग्राम सभा की जवाबदेही की कसौटी से जोड़ा

पेयजल और स्वच्छता विभाग ने 16 सितंबर 2026 को बताया कि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) 2.0 के लिए स्वच्छ सेवा आकलन शुरू किया गया है। यह ग्राम पंचायत स्तर का वार्षिक डिजिटल स्व-मूल्यांकन है। ODF प्लस (मॉडल) घोषित ग्राम पंचायतें, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियाँ और स्थानीय समुदाय ODF स्थिरता, दृश्य स्वच्छता, ठोस तथा तरल अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छता परिसंपत्तियों की कार्यक्षमता, संचालन तथा रखरखाव का आकलन करेंगे। संबंधित ग्राम सभा निष्कर्षों पर चर्चा करके उनका सत्यापन करेगी। जिला और राज्य या केंद्रशासित प्रदेश के प्राधिकरण फिर समीक्षा कर सुधार योजना बना सकेंगे। इस प्रकार ढाँचा स्थानीय आँकड़े, सामुदायिक जाँच और उच्च स्तर की सुधार कार्रवाई जोड़ता है। इसकी उपयोगिता ईमानदार सूचना, सुलभ साक्ष्य और पहचानी कमी पर समयबद्ध कार्रवाई पर निर्भर होगी। स्व-मूल्यांकन स्वतंत्र लेखा-परीक्षा नहीं है और घोषित स्थिति अपने-आप भरोसेमंद दैनिक सेवा सिद्ध नहीं करती। आधिकारिक विज्ञप्ति इसे 73वें संविधान संशोधन की सहभागी भावना से जोड़ती है।

यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS 2 के लिए यह लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण, ग्राम सभा पर्यवेक्षण और सार्वजनिक सेवा जवाबदेही को जोड़ता है। अभ्यर्थी जाँचें कि स्थानीय सत्यापन आँकड़ों की गुणवत्ता कैसे सुधारता है, जिला तथा राज्य समीक्षा सुधार कैसे कराती है और निर्माण या घोषणा संख्या से आगे परिणाम कैसे मापे जाएँ।

संभावित प्रश्न: स्व-प्रतिवेदित आँकड़ों की सीमाओं को संबोधित करते हुए समुदाय द्वारा सत्यापित डिजिटल स्व-मूल्यांकन ग्रामीण स्वच्छता शासन को कैसे मजबूत कर सकता है? विवेचना कीजिए।

संबंधित अभ्यास प्रश्न: अभ्यास संबंध: लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण और ग्राम सभा जवाबदेही; अभ्यास संबंध: ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रमों में सेवा वितरण

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नेट जीरो पोर्टल और NAPCC डैशबोर्ड ने जलवायु शासन को प्रकटीकरण और क्रियान्वयन की कसौटी पर रखा

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 16 सितंबर 2026 को भारत का Net Zero Portal और National Action Plan on Climate Change Dashboard शुरू किया। Net Zero Portal भारतीय संस्थाओं की स्वैच्छिक प्रतिबद्धता के पंजीकरण और सार्वजनिक प्रकटीकरण का केंद्रीय मंच है। भागीदार greenhouse-gas उत्सर्जन बता सकते हैं, लक्ष्य घोषित कर सकते हैं और वार्षिक प्रगति update दे सकते हैं। Scope 1 और Scope 2 उत्सर्जन की reporting को प्रोत्साहन है, जबकि Scope 3 reporting स्वैच्छिक है। NAPCC Dashboard राष्ट्रीय जलवायु मिशनों की सूचना और पहचाने गए संकेतक एक समेकित दृश्य में लाता है, जिससे मंत्रालय तथा विभाग व्यवस्थित निगरानी कर सकें। ये साधन दृश्यता और समन्वय सुधार सकते हैं, पर प्रकटीकरण को सत्यापित performance या कानूनी अनुपालन नहीं मानना चाहिए। विश्वसनीयता के लिए समान सीमा, पद्धति, आधार अवधि, प्रगति स्पष्टीकरण और offset या removal का स्पष्ट उपचार जरूरी है। सार्वजनिक आँकड़े संशोधन दिखाएँ और बिना क्रियान्वयन वाले बड़े दावे को पुरस्कार दिए बिना तुलना संभव करें। Mission dashboard संकेतक को जिम्मेदारी, समयरेखा और सुधार कार्रवाई से जोड़े, केवल गतिविधि न दिखाए। अवसर बिखरी प्रतिबद्धताओं को नीति, निवेश और जवाबदेही योग्य साक्ष्य में बदलना है।

यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS 3 और GS 2 के लिए यह जलवायु नीति को डिजिटल शासन, पारदर्शिता और अंतर-मंत्रालयी समन्वय से जोड़ता है। अभ्यर्थी स्वैच्छिक प्रकटीकरण तथा सत्यापन में अंतर करें, उत्सर्जन scope समझाएँ और देखें कि dashboard परिणाम का विकल्प बने बिना क्रियान्वयन कैसे सुधारता है।

संभावित प्रश्न: डिजिटल जलवायु पोर्टल पारदर्शिता बढ़ा सकते हैं, पर विश्वसनीय शासन को समान पद्धति, सत्यापन और सुधार कार्रवाई चाहिए। परीक्षण कीजिए।

संबंधित अभ्यास प्रश्न: अभ्यास संबंध: भारत की जलवायु शासन संरचना; अभ्यास संबंध: डिजिटल मंचों से पारदर्शिता और जवाबदेही

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जीएस पेपर 3 — अर्थव्यवस्था, पर्यावरण, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, सुरक्षा

GS 3 के लिए पूरी आर्थिक या तकनीकी प्रणाली का अनुसरण करें। प्रवेश नियम, व्यापार कुल, राज्य सूचकांक और prototype input हैं; प्रतिस्पर्धा, प्रत्यास्थता, समावेशन और पर्यावरण लाभ outcome हैं। जाँचें कि infrastructure, skill, standard, maintenance और safeguard साथ चलते हैं तथा आशाजनक तंत्र को मिले सार्वजनिक मूल्य से अलग रखें।

RCMC छूट ने छोटे निर्यात प्रेषण के लिए पहली अनुपालन बाधा घटाई

विदेश व्यापार महानिदेशालय ने विदेश व्यापार नीति, 2023 के पैरा 2.57 में संशोधन करके ₹3 लाख तक के Free-on-Board मूल्य वाले पात्र निर्यात प्रेषण को Registration-cum-Membership Certificate या Certificate of Registration की आवश्यकता से छूट दी है, जहाँ यह प्रमाणपत्र अन्यथा लागू होता। ₹3 लाख से अधिक के प्रेषण के लिए संबंधित प्रमाणपत्र की आवश्यकता बनी रहेगी। उपाय का उद्देश्य MSME, कारीगर और पहली बार या कभी-कभी निर्यात करने वाले उद्यम को डाक, कूरियर तथा उभरते माध्यमों से विदेशी माँग जाँचने का सरल मार्ग देना है। विज्ञप्ति में दिए आधिकारिक ऐतिहासिक आँकड़े बताते हैं कि de minimis नियम निर्यात मूल्य की निगरानी को बहुत बदले बिना अनेक लेनदेन आसान कर सकता है: USD 3,000 तक के प्रेषण बताई अवधि में shipping bills का 43% परंतु वस्तु निर्यात मूल्य का 0.86% थे। सुधार एक प्रारंभिक कदम हटाता है; सीमा शुल्क, उत्पाद, कर या गंतव्य बाजार दायित्व नहीं। व्यवसाय बढ़ने पर Export Promotion Council या Commodity Board की सदस्यता बाजार पहुँच तथा संस्थागत सहायता दे सकती है। मूल्यांकन नए भागीदार, अनुपालन गुणवत्ता और छोटे अवसरवादी निर्यात से टिकाऊ वृद्धि देखे।

यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS 3 के लिए यह जोखिम-आधारित विनियमन, व्यापार सुविधा और MSME औपचारिकीकरण का उदाहरण है। उत्तर को सीमित प्रमाणपत्र छूट और पूरी निर्यात शृंखला के विनियमन हटाने में अंतर करना चाहिए तथा देखना चाहिए कि सरल प्रवेश टिकाऊ और अनुपालक भागीदारी बनाता है या नहीं।

संभावित प्रश्न: उत्पाद, सीमा शुल्क और गंतव्य बाजार सुरक्षा को कमजोर किए बिना de minimis अनुपालन छूट निर्यात भागीदारी कैसे बढ़ा सकती है? चर्चा कीजिए।

संबंधित अभ्यास प्रश्न: अभ्यास संबंध: व्यवसाय सुगमता और MSME प्रतिस्पर्धा; अभ्यास संबंध: व्यापार सुविधा और निर्यात विविधीकरण

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ट्रेड वॉच क्वार्टरली ने धातु और अयस्क को मूल्य शृंखला प्रतिस्पर्धा की कसौटी बनाया

नीति आयोग ने FY27 की पहली तिमाही अर्थात अप्रैल से जून 2026 को समेटने वाला नौवाँ Trade Watch Quarterly जारी किया। आधिकारिक विज्ञप्ति भारत के प्रदर्शन को मजबूत पर अनिश्चित वैश्विक व्यापार परिस्थिति में रखती है। इसके अनुसार तिमाही में भारत का वस्तु और सेवा व्यापार $506.9 बिलियन रहा, जो वर्ष-दर-वर्ष 15.5% वृद्धि है। संस्करण का विशेष विषय धातु और अयस्क है, जो खनन तथा प्रसंस्करण को विनिर्माण, अवसंरचना, ऊर्जा संक्रमण और उन्नत उद्योग से जोड़ते हैं। कुल व्यापार बढ़ना उपयोगी संदर्भ है, लेकिन उससे अलग-अलग प्रवाह की संरचना, घरेलू मूल्य संवर्धन, आयात संकेंद्रण या पर्यावरण लागत नहीं पता चलती। रणनीतिक सामग्री के लिए नीति को संसाधन सुरक्षा के साथ beneficiation, पुनर्चक्रण, लॉजिस्टिक्स, मानक और भरोसेमंद व्यापार साझेदारी जोड़नी होगी। मुख्यतः अप्रसंस्कृत सामग्री पर आधारित निर्यात उच्च मूल्य चरण की तुलना में कम सीख और रोजगार दे सकता है। दूसरी ओर, अंधाधुंध आयात प्रतिस्थापन नीचे के उद्योग की लागत बढ़ा सकता है। इसलिए रिपोर्ट को केवल अंकतालिका नहीं, निदान साधन की तरह पढ़ना चाहिए। बाजार विविधता, मूल्य शृंखला की गहराई, मूल्य झटके का जोखिम, संसाधन दक्षता और गुणवत्ता तथा स्थिरता मानक पूरा करने की क्षमता उपयोगी कसौटियाँ हैं।

यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS 3 के लिए यह व्यापार संरचना, महत्त्वपूर्ण इनपुट और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा का विश्लेषण देती है। अभ्यर्थी शीर्षक वृद्धि से आगे जाकर धातु-अयस्क शृंखला में घरेलू मूल्य संवर्धन, आपूर्ति संकेंद्रण, नीचे के उद्योग की लागत और पर्यावरण शासन जाँचें।

संभावित प्रश्न: भारत की धातु और अयस्क व्यापार नीति को संसाधन सुरक्षा, घरेलू मूल्य संवर्धन, नीचे के उद्योग की प्रतिस्पर्धा और पर्यावरण सुरक्षा में संतुलन क्यों रखना चाहिए? विश्लेषण कीजिए।

संबंधित अभ्यास प्रश्न: अभ्यास संबंध: व्यापार नीति और विनिर्माण प्रतिस्पर्धा; अभ्यास संबंध: खनिज सुरक्षा और मूल्य शृंखला प्रत्यास्थता

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भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सूचकांक ने राज्य नीति बहस को अपनाने से प्रणालीगत तैयारी की ओर मोड़ा

नीति आयोग ने राज्य इलेक्ट्रिक वाहन नीतियों की कार्यशाला में India Electric Mobility Index का दूसरा संस्करण जारी किया। आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार भारत के 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में से 29 ने EV नीति अधिसूचित की है। सूचकांक अंकों में व्यापक सुधार बताया गया है: सर्वोच्च राज्य अंक 77 से 84 और मध्यिका 36 से 40 हुई। विज्ञप्ति भारत की लगभग 89% कच्चे तेल आयात निर्भरता भी बताती है और इलेक्ट्रिक गतिशीलता को आर्थिक, पर्यावरणीय तथा रणनीतिक चिंता से जोड़ती है। सूचकांक अंतर दिखा सकता है, पर ऊँचा अंक अपने-आप स्वच्छ यात्रा या भरोसेमंद चार्जिंग सिद्ध नहीं करता। राज्यों का औद्योगिक आधार, राजकोषीय क्षमता और भूगोल अलग है, इसलिए तुलना एक समान नीति थोपने के बजाय सीख बढ़ाए। सार्वजनिक परिवहन विद्युतीकरण, समान रूप से उपलब्ध भरोसेमंद चार्जिंग, अनुसंधान, कौशल और ग्रिड योजना साथ चलें। मूल्यांकन वाहन उपयोग, चार्जर कार्यशीलता, बिजली स्रोत, वहनीयता, बैटरी सुरक्षा और अंतिम जीवन प्रबंधन देखे। घोषित Unified Bharat e-Charge app चार्जर खोज आसान कर सकता है, लेकिन डिजिटल दृश्यता के पीछे कार्यशील अवसंरचना जरूरी है। नीतिगत कसौटी पूर्ण और न्यायपूर्ण गतिशीलता तंत्र है।

यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS 3 के लिए यह ऊर्जा सुरक्षा, शहरी वायु गुणवत्ता, संघीय नीति सीख और औद्योगिक संक्रमण जोड़ता है। अभ्यर्थी समझाएँ कि सूचकांक क्या दिखाता है, क्या सिद्ध नहीं करता और वाहन, चार्जिंग, ग्रिड, सार्वजनिक परिवहन, कौशल तथा बैटरी शासन में समन्वय क्यों जरूरी है।

संभावित प्रश्न: इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सूचकांक प्रतिस्पर्धी संघवाद का मार्गदर्शन कर सकता है, पर परिणाम वाहन बिक्री से आगे प्रणालीगत तैयारी पर निर्भर हैं। चर्चा कीजिए।

संबंधित अभ्यास प्रश्न: अभ्यास संबंध: इलेक्ट्रिक गतिशीलता और ऊर्जा सुरक्षा; अभ्यास संबंध: पर्यावरण नीति में सहकारी संघवाद

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VYOMA चुनौती ने बहुभाषी Edge AI को लोकहितकारी तैनाती की कसौटी बनाया

Digital India BHASHINI Division, Current AI और Kalpa Impact ने IIIT-Delhi में VYOMA Innovation Challenge का समापन किया। 10 अंतिम टीमों ने स्वास्थ्य, कृषि, कल्याण पहुँच, विधिक सेवा और सुगम्यता के लोकहितकारी उपयोग पर कार्यशील prototype दिखाए तथा 4 नवाचारों को मान्यता मिली। चुनौती ने Suno Sutra नामक open-source बहुभाषी handheld AI reference design के आधार पर अलग भारतीय परिस्थिति के लिए hardware और software अनुकूलन को बढ़ावा दिया। आधिकारिक विवरण बहुभाषी और Edge AI पर विशेष बल देता है। उपयोगकर्ता के पास processing निरंतर connectivity की निर्भरता घटा सकती है तथा latency या privacy सुधार सकती है, पर लाभ वास्तविक design पर निर्भर हैं। Prototype व्यवहार्यता का संकेत है; accuracy, safety, inclusion या सार्वजनिक तैनाती की तैयारी का प्रमाण नहीं। भाषा coverage को केवल समर्थित भाषाओं की सूची से नहीं, बोलियों, शोरयुक्त वाणी, code-switching और असमान dataset से जाँचना चाहिए। Open-source घटक निरीक्षण तथा अनुकूलन बढ़ा सकते हैं, फिर भी documentation, security update, testing और हानि की जवाबदेही जरूरी है। उच्च जोखिम अपनाने से पहले छोटी निगरानी वाली trial, सूचित उपयोगकर्ता और स्पष्ट मानवीय escalation होनी चाहिए। मुख्य प्रश्न स्थानीय नवाचार को भरोसेमंद तथा रखरखाव योग्य सार्वजनिक क्षमता बनाना है।

यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS 3 और GS 2 के लिए यह स्वदेशी नवाचार, डिजिटल समावेशन और जवाबदेह सार्वजनिक प्रौद्योगिकी जोड़ता है। अभ्यर्थी खुले design तथा प्रमाणित performance में अंतर करें और बहुभाषी मूल्यांकन, privacy, security, procurement, मानवीय पर्यवेक्षण तथा maintenance की चर्चा करें।

संभावित प्रश्न: भारत में बहुभाषी Edge AI को prototype प्रदर्शन से भरोसेमंद सार्वजनिक सेवा तैनाती तक ले जाने के लिए कौन से संस्थागत सुरक्षा उपाय आवश्यक हैं?

संबंधित अभ्यास प्रश्न: अभ्यास संबंध: उभरती प्रौद्योगिकी और समावेशी शासन; अभ्यास संबंध: सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना और जवाबदेही

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आज के पाँच प्रश्न

उत्तर देखने से पहले इन्हें हल करें। प्रत्येक व्याख्या बताती है कि आकर्षक गलत विकल्प क्यों विफल होता है।

  1. स्वच्छ सेवा आकलन में ग्राम पंचायत के स्व-मूल्यांकन का सत्यापन कौन करता है?

    1. Export Promotion Council
    2. संबंधित ग्राम सभा
    3. मौद्रिक प्राधिकरण
    4. निजी बीमाकर्ता
    उत्तर

    संबंधित ग्राम सभा

    आधिकारिक ढाँचे में स्व-मूल्यांकन पर चर्चा और सत्यापन संबंधित ग्राम सभा करती है।

  2. जहाँ प्रमाणपत्र अन्यथा लागू है, घोषित RCMC छूट किस निर्यात प्रेषण को मिलती है?

    1. ₹3 लाख तक FOB मूल्य वाले पात्र प्रेषण
    2. बिना मूल्य सीमा हर निर्यात
    3. केवल ₹3 लाख से ऊपर के प्रेषण
    4. केवल समुद्री आयात
    उत्तर

    ₹3 लाख तक FOB मूल्य वाले पात्र प्रेषण

    संशोधित प्रावधान ₹3 लाख तक FOB मूल्य वाले पात्र निर्यात प्रेषण को छूट देता है; इससे ऊपर आवश्यकता लागू रहती है।

  3. अधिसूचित राज्य EV नीति अपने-आप क्या स्थापित करती है?

    1. निश्चित स्वच्छ वायु परिणाम
    2. पूर्ण charger uptime
    3. संपूर्ण battery recycling
    4. अंतिम परिणाम के बजाय सहायक नीतिगत ढाँचा
    उत्तर

    अंतिम परिणाम के बजाय सहायक नीतिगत ढाँचा

    नीति अधिसूचना input है; भरोसेमंद charging, utilisation और पर्यावरण परिणाम क्रियान्वयन माँगते हैं।

  4. उच्च जोखिम सार्वजनिक सेवा में AI prototype उपयोग से पहले क्या स्थापित होना चाहिए?

    1. केवल मजबूत बाहरी ढाँचा
    2. केवल offline काम करना
    3. Accuracy, safety, inclusion और human escalation
    4. हर component का secret होना
    उत्तर

    Accuracy, safety, inclusion और human escalation

    उच्च जोखिम तैनाती से पहले prototype को field evidence, safety और जवाबदेह human escalation चाहिए।

  5. कुल व्यापार वृद्धि प्रतिस्पर्धा की अधूरी कसौटी क्यों है?

    1. व्यापार मूल्य कभी दर्ज नहीं होता
    2. यह संरचना, मूल्य संवर्धन या संकेंद्रण नहीं बताती
    3. यह हर क्षेत्र की विफलता सिद्ध करती है
    4. यह industrial policy की जरूरत समाप्त करती है
    उत्तर

    यह संरचना, मूल्य संवर्धन या संकेंद्रण नहीं बताती

    कुल वृद्धि के साथ भी मूल्य शृंखला की गहराई, घरेलू मूल्य संवर्धन और आपूर्ति संकेंद्रण कमजोर रह सकते हैं।

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