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UPSC current affairs for 7 September 2026 on border development, biodiversity institutions, vulture recovery, innovation, tax data and world-map projections

डूइट करेंट अफेयर्स डेस्क · 7 सितम्बर 2026

7 सितम्बर 2026 · 6 तथ्य

यूपीएससी करेंट अफेयर्स — 7 सितम्बर 2026

आज का संस्करण रूपांतरण की कसौटी रखता है: योजना से सीमावर्ती आजीविका, वैश्विक जैवविविधता लक्ष्य से स्थानीय संस्था, बंदी प्रजनन से वन्य पुनर्बहाली, प्रयोगशाला ज्ञान से उपयोगी उत्पाद, लेनदेन अभिलेख से निष्पक्ष शासन और गणितीय मानचित्र प्रक्षेप से कूटनीतिक भाषा। UPSC उत्तर में घोषित उद्देश्य, कार्यकारी संस्था और अंतिम परिणाम अलग करें। पूछें कि कौन-सा आंकड़ा लिया गया, त्रुटि कौन सुधार सकता है, लागत किस समुदाय पर है, सफलता कैसे मापी जाती है और तकनीकी साधन को अधिकार या स्थानीय संदर्भ पर हावी होने से कौन-सा सुरक्षा उपाय रोकता है।

जीएस पेपर 1 — विरासत, इतिहास, भूगोल, समाज

प्रक्षेप चुनाव से भौतिक भूगोल और प्रतिनिधित्व जोड़ें। पहले गणितीय समझौता बताएं, फिर क्षेत्रफल सुधार को क्षेत्रीय सीमा के अनुमोदन से अलग रखते हुए राजनीतिक प्रभाव समझाएं।

सम-क्षेत्र मानचित्र पर भारत के UN मत ने चित्रण समानता को सीमा अनुमोदन से अलग रखा

आकाशवाणी ने 6 सितंबर 2026 को बताया कि भारत ने 4 सितंबर को स्वीकृत UN महासभा प्रस्ताव 'Correct the Map: Rebalancing Global Cartographic Representation and Promoting Equitable Representation of the World's Regions, Particularly Africa' के पक्ष में मतदान किया। प्रस्ताव ऐसे सम-क्षेत्र प्रक्षेप को प्रोत्साहित करता है, जो महाद्वीपीय भूभागों के सापेक्ष आकार सुरक्षित रखते हैं। भारत के मत-स्पष्टीकरण ने इस मूल सिद्धांत का समर्थन किया, पर कहा कि प्रस्ताव किसी विशेष प्रक्षेप, मानचित्र या राष्ट्रीय सीमाओं के चित्रण का अनुमोदन नहीं है। विदेश मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्रशासित प्रदेशों सहित भारत का संप्रभु क्षेत्र भारत के आधिकारिक मानचित्र के अनुसार दिखना चाहिए। यह विषय भूगोल और कूटनीति का स्पष्ट संगम है। प्रत्येक समतल विश्व मानचित्र गोल पृथ्वी को रूपांतरित करता है और कोई प्रक्षेप क्षेत्रफल, आकृति, दूरी तथा दिशा सभी को एक साथ पूर्णतः सुरक्षित नहीं रख सकता। प्रचलित Mercator प्रक्षेप नौवहन में उपयोगी है, पर ऊंचे अक्षांश के क्षेत्रों को बड़ा दिखाता है। सम-क्षेत्र प्रक्षेप सापेक्ष क्षेत्रफल सुधारते हैं, किंतु आकृति बदलते हैं। इसलिए प्रक्षेप का चुनाव सार्वजनिक धारणा प्रभावित करता है, जबकि सीमा चित्रण अलग वैधानिक और राजनीतिक प्रश्न है। मानचित्र साक्षरता में गणितीय समझ और संप्रभु संवेदनशीलता दोनों चाहिए।

यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS पेपर 1 में यह मानचित्र प्रक्षेप, विकृति और अनुरूप तथा सम-क्षेत्र प्रयोजनों का अंतर समझाता है। GS पेपर 2 में यह दिखाता है कि बहुपक्षीय मत में सिद्धांत का समर्थन और औपचारिक राष्ट्रीय आरक्षण साथ हो सकते हैं। यह दावा न करें कि UN ने एक बाध्यकारी राजनीतिक मानचित्र अपनाया। प्रक्षेप समझौते, अफ्रीका की प्रतिनिधित्व चिंता, विशेष सीमा के गैर-अनुमोदन और भारत की आधिकारिक मानचित्र स्थिति स्पष्ट करें।

संभावित प्रश्न: मानचित्र प्रक्षेप तकनीकी चुनाव हैं जिनके राजनीतिक प्रभाव होते हैं, पर प्रक्षेप सुधार क्षेत्रीय सीमाएं तय नहीं करता। सम-क्षेत्र मानचित्रण और भारत के UN मत के संदर्भ में समझाइए।

संबंधित अभ्यास प्रश्न: सभी समतल मानचित्र पृथ्वी को विकृत क्यों करते हैं और प्रक्षेप का चुनाव उद्देश्य के अनुसार कैसे होना चाहिए?; कोई राज्य संप्रभुता पर औपचारिक स्थिति सुरक्षित रखते हुए बहुपक्षीय सिद्धांत का समर्थन कैसे कर सकता है?

मूल स्रोत

जीएस पेपर 2 — राजव्यवस्था, शासन, अंतर्राष्ट्रीय संबंध

आंकड़ा विनिमय को प्रशासनिक शक्ति की तरह पढ़ें। वैधानिक उद्देश्य, जवाबदेह विभाग, गुणवत्ता नियंत्रण, नागरिक सुधार और अपील पहचानें। उचित प्रक्रिया के बिना दक्षता अधूरा शासन है।

कर और पंजीकरण विभागों ने जोखिम-आधारित शासन के केंद्र में आंकड़ा गुणवत्ता रखी

आयकर निदेशालय (आसूचना एवं आपराधिक अन्वेषण), मुंबई और महाराष्ट्र के मुद्रांक शुल्क एवं पंजीकरण विभाग ने 6 सितंबर 2026 को मुंबई नगर तथा उपनगरीय जिलों के 200 से अधिक उप-पंजीयक अधिकारियों के लिए पहुंच कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें वित्तीय लेनदेन विवरण, आयकर अधिनियम 2025 के अंतर्गत Form 165, सही PAN रिपोर्टिंग, लेनदेन तथा मुद्रांक मूल्य, आंकड़ा सत्यापन और रिपोर्टिंग त्रुटि सुधार शामिल थे। आधिकारिक विज्ञप्ति ने पंजीकरण कार्यालय को केवल मुद्रांक शुल्क संग्राहक नहीं, बल्कि विश्वसनीय आर्थिक सूचना का संरक्षक माना। गुणवत्तापूर्ण रिपोर्टिंग स्वैच्छिक अनुपालन, जोखिम विश्लेषण और कर आधार बढ़ा सकती है, किंतु आंकड़ा-आधारित प्रशासन अपने आप निष्पक्ष या सही नहीं हो जाता। कमजोर पहचान, दोहरी प्रविष्टि, मूल्यांकन त्रुटि या खराब सुधार मार्ग दक्षता साधन को मनमानी जांच में बदल सकते हैं। इसलिए विभागीय आदान-प्रदान में स्पष्ट वैधानिक उद्देश्य, न्यूनतम आवश्यक क्षेत्र, सत्यापित मानक, पहुंच नियंत्रण, लेखापरीक्षा क्रम, अवधारण सीमा और नागरिक के लिए व्यावहारिक त्रुटि-सुधार प्रक्रिया चाहिए। जोखिम मॉडल आनुपातिक सत्यापन को दिशा दें, मानवीय विवेक और उचित प्रक्रिया का स्थान न लें। नीति का सबक है कि डिजिटल शासन तब सफल होता है, जब आंकड़ा गुणवत्ता, अधिकार और संस्थागत जवाबदेही साथ आगे बढ़ें।

यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS पेपर 2 में यह ई-शासन, विभागीय समन्वय, प्रशासनिक जवाबदेही और नागरिक अधिकार का उदाहरण है। GS पेपर 3 में इसका संबंध कर अनुपालन और औपचारिकीकरण से है। संतुलित उत्तर विश्वसनीय लेनदेन आंकड़ों का मूल्य स्वीकार करे, पर उद्देश्य सीमा, आंकड़ा न्यूनतमकरण, सुरक्षा, त्रुटि सुधार, व्याख्येयता, भेदभाव निषेध और अपील भी जोड़े। आंकड़ा-राज्य की गुणवत्ता संग्रहित मात्रा से अधिक महत्वपूर्ण है।

संभावित प्रश्न: आंकड़ा-आधारित कर प्रशासन अनुपालन सुधार सकता है, पर उसकी वैधता आंकड़ों की गुणवत्ता और उचित प्रक्रिया की गुणवत्ता पर निर्भर है। चर्चा कीजिए।

संबंधित अभ्यास प्रश्न: लोक प्रशासन में अंतर-विभागीय आंकड़ा साझाकरण से उत्पन्न अवसरों और जोखिमों का परीक्षण कीजिए।; जोखिम-आधारित शासन प्रक्रियात्मक निष्पक्षता कमजोर किए बिना अनुपालन कैसे सुधार सकता है?

मूल स्रोत

जीएस पेपर 3 — अर्थव्यवस्था, पर्यावरण, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, सुरक्षा

सीमावर्ती विकास, जैवविविधता, प्रजाति पुनर्बहाली और नवाचार को आयोजन नहीं, व्यवस्था मानें। वित्त और अवसंरचना को स्थानीय संस्था, पारिस्थितिक सुरक्षा, क्षमता, रखरखाव और मापनीय परिणाम से जोड़ें।

वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम ने सीमावर्ती समुदायों को विकास और सुरक्षा का साझेदार माना

6 सितंबर 2026 के PIB पृष्ठभूमि-विवरण ने वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम को भारत की स्थलीय सीमाओं के गांवों के लिए विकास और सुरक्षा के संयुक्त ढांचे के रूप में प्रस्तुत किया। VVP-I और VVP-II का कुल परिव्यय ₹11,639 करोड़ है। VVP-II के लिए 2028-29 तक ₹6,839 करोड़ निर्धारित हैं और यह 15 राज्यों तथा 2 केंद्रशासित प्रदेशों के 334 सीमावर्ती खंडों में 1,954 गांवों को शामिल करता है; VVP-I में पहले से सम्मिलित उत्तरी सीमा के खंड दोहराव से बचाने के लिए बाहर हैं। कार्यक्रम में सड़क, दूरसंचार, स्वास्थ्य, शिक्षा, वित्तीय समावेशन, कौशल, पर्यटन, SMART कक्षाएं और सहकारी संस्थाओं तथा स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका मूल्य-श्रृंखलाएं सम्मिलित हैं। विवरण के अनुसार 31 जुलाई 2026 तक 8,800 से अधिक पहुंच और सेवा गतिविधियां हुईं। 2026 के युवा कार्यक्रम में 400 से अधिक स्वयंसेवकों ने लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के 74 सीमावर्ती गांवों का भ्रमण किया। नीति का तर्क है कि आबाद और आत्मविश्वासी सीमावर्ती बस्तियां स्थानीय कल्याण के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूत करती हैं। असली कसौटी यह है कि अभिसरित व्यय स्थायी सेवा और आजीविका बनाए, केवल बिखरी परिसंपत्तियां या अल्पकालीन अभियान नहीं।

यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS पेपर 3 के लिए VVP सीमा प्रबंधन, आंतरिक सुरक्षा, अवसंरचना और लचीली आजीविका को जोड़ता है। यह सहकारी संघवाद और अंतिम छोर की सेवा पर GS पेपर 2 में भी उपयोगी है। उत्तर में निवासी को केवल सुरक्षा साधन न मानें; अधिकार, स्थानीय सहमति, पारिस्थितिक सीमा और संस्कृति-संगत आजीविका भी केंद्रीय हैं। अभिसरण को स्वीकृत प्रकल्पों से नहीं, सेवा विश्वसनीयता, पलायन, बाजार पहुंच, स्थानीय भागीदारी और रखरखाव से जांचें।

संभावित प्रश्न: सीमावर्ती विकास तभी सुरक्षा मजबूत कर सकता है, जब स्थानीय समुदाय निष्क्रिय लाभार्थी नहीं बल्कि अधिकार-संपन्न साझेदार हों। वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम के संदर्भ में चर्चा कीजिए।

संबंधित अभ्यास प्रश्न: भारत में प्रभावी सीमा प्रबंधन के विकासात्मक आयामों का परीक्षण कीजिए।; दूरस्थ सीमावर्ती क्षेत्रों की संवेदनशीलता घटाने में अवसंरचना और आजीविका नीति कैसे सहायक हो सकती है?

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राज्य जैवविविधता बैठक ने संरक्षण को राष्ट्रीय लक्ष्य से स्थानीय संस्था तक पहुंचाया

राज्य जैवविविधता बोर्डों और केंद्रशासित प्रदेश जैवविविधता परिषदों की 16वीं राष्ट्रीय बैठक 6 सितंबर 2026 को चंडीगढ़ में आरंभ हुई। राष्ट्रीय जैवविविधता प्राधिकरण ने दो दिवसीय बैठक इसलिए बुलाई कि राज्य नियम, संस्थाएं और कार्यान्वयन संशोधित राष्ट्रीय जैवविविधता शासन-ढांचे से मेल खाएं। आधिकारिक विज्ञप्ति ने गतिशील स्थानीय योजना, बेहतर लोक जैवविविधता पंजिका, मजबूत जैवविविधता प्रबंधन समितियां और पारितंत्र पुनर्स्थापन, प्रजाति तथा आवास संरक्षण, कृषि-जैवविविधता और जलवायु-सहिष्णु परिदृश्य में मापनीय परिणामों पर बल दिया। इसमें 2024-2030 की अद्यतन राष्ट्रीय जैवविविधता रणनीति और कार्ययोजना तथा कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैवविविधता ढांचे से उसका सामंजस्य बताया गया। केंद्रीय मंत्री ने राज्य और स्थानीय कार्यान्वयन को वैश्विक 30-by-30 संरक्षण लक्ष्य से भी जोड़ा और कहा कि पहुंच एवं लाभ-साझाकरण के माध्यम से किसानों, समुदायों, स्थानीय समितियों, राज्य बोर्डों, केंद्रशासित परिषदों और अनुसंधान संस्थानों को ₹200 करोड़ से अधिक बांटे गए हैं। मुख्य शासन प्रश्न ऊर्ध्वाधर रूपांतरण का है: वैश्विक प्रतिबद्धता और केंद्रीय कानून तभी परिणाम देते हैं, जब स्थानीय अभिलेख सही हों, सामुदायिक ज्ञान का सम्मान हो, संस्थागत क्षमता हो और लाभ-साझाकरण से दिखाई देने वाला संरक्षण तथा आजीविका लाभ मिले।

यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS पेपर 3 में यह बैठक जैवविविधता अधिनियम, संघीय पर्यावरण शासन, पहुंच एवं लाभ-साझाकरण, पारंपरिक ज्ञान और भारत की वैश्विक प्रतिबद्धताओं को जोड़ती है। GS पेपर 2 में यह राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय संस्थाओं के बहुस्तरीय कार्यान्वयन का उदाहरण है। उत्तर में पंजिका और जीवंत शासन का अंतर रखें; आंकड़ों की गुणवत्ता, समुदाय भागीदारी, सहमति, निधि उपयोग, क्षमता और मापनीय पारिस्थितिक सुधार वास्तविक विकेंद्रीकरण तय करते हैं।

संभावित प्रश्न: भारत की जैवविविधता प्रतिबद्धताएं स्थानीय स्तर पर ही साकार होंगी। राष्ट्रीय नीति को संरक्षण परिणामों में बदलने में राज्य जैवविविधता बोर्डों और जैवविविधता प्रबंधन समितियों की संस्थागत भूमिका का परीक्षण कीजिए।

संबंधित अभ्यास प्रश्न: जैवविविधता और पारंपरिक ज्ञान संरक्षण में स्थानीय संस्थाओं की भूमिका पर चर्चा कीजिए।; पहुंच एवं लाभ-साझाकरण जैव संसाधनों के वाणिज्यिक उपयोग को समानता और संरक्षण से कैसे जोड़ सकता है?

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गिद्ध पुनर्बहाली रणनीति ने बंदी प्रजनन से सुरक्षित वन्य आबादी की ओर कसौटी बदली

भारत ने 6 सितंबर को पंचकूला में अंतरराष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस 2026 मनाया और 'संकट से पुनर्बहाली—भारत के गिद्धों का संरक्षण' विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की। आधिकारिक विज्ञप्ति ने गिद्ध सुरक्षित क्षेत्र निरंतर बनाने और वन्य पुनर्बहाली के लिए तकनीकी क्षमता मजबूत करने का आह्वान किया। उसने मूल्यांकन का महत्वपूर्ण अंतर रखा: संरक्षण प्रजनन को केवल बंदी अवस्था में जन्मे पक्षियों की संख्या से नहीं, बल्कि स्वस्थ और आनुवंशिक रूप से प्रबंधित आबादी, उपयोगी वैज्ञानिक ज्ञान, प्रशिक्षित क्षमता और व्यवहार्य वन्य आबादी में योगदान से मापना चाहिए। भारत में गिद्धों की गिरावट दिखाती है कि पशु-चिकित्सा दवा की बाहरी लागत पारितंत्र सेवा को कैसे बाधित कर सकती है, क्योंकि गिद्ध शव शीघ्र हटाते हैं और रोग जोखिम सीमित करने में सहायता करते हैं। इसलिए पुनर्बहाली प्रजनन केंद्र से आगे जाती है। इसके लिए सुरक्षित पशु-चिकित्सा व्यवहार, विषैले पदार्थों की निगरानी, पर्याप्त आहार परिदृश्य, घोंसले और बसेरे का संरक्षण, सावधान विमोचन नियम और दीर्घकालीन अनुश्रवण आवश्यक हैं। कार्यशाला का नीति महत्व प्रजाति गणना से हटकर जोखिम घटाने, आवास शासन और मापी गई पुनर्प्रविष्टि की व्यवस्था बनाना है। वन्यजीव, पशुधन, औषधि विनियमन और स्थानीय शासन संस्थाओं का समन्वय अनिवार्य है।

यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS पेपर 3 में गिद्ध पुनर्बहाली जैवविविधता, पारितंत्र सेवा, One Health, पशु-चिकित्सा विनियमन और प्रजाति पुनर्प्रविष्टि को जोड़ती है। यह सावधानी सिद्धांत का अच्छा उदाहरण है, जहां छोटी नियामक विफलता बड़ा पारिस्थितिक प्रभाव बना सकती है। उत्तर में बाह्य-स्थल प्रजनन और प्राकृतिक आवास में पुनर्बहाली अलग करें तथा दवा निगरानी, सुरक्षित क्षेत्र, आनुवंशिक प्रबंधन, आवास संरक्षण, शव उपलब्धता, सामुदायिक प्रोत्साहन और विमोचन-पश्चात अनुश्रवण को एक व्यवस्था के रूप में रखें।

संभावित प्रश्न: प्रजाति पुनर्बहाली में संरक्षण प्रजनन सेतु है, अंतिम लक्ष्य नहीं। भारत में गिद्धों की सफल पुनर्स्थापना के लिए आवश्यक संस्थागत और पारिस्थितिक दशाओं की चर्चा कीजिए।

संबंधित अभ्यास प्रश्न: अपमार्जक प्रजातियों की हानि पारितंत्र और सार्वजनिक स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित कर सकती है?; बाह्य-स्थल संरक्षण सफलता और वन्य अवस्था में प्रजाति पुनर्बहाली का अंतर स्पष्ट कीजिए।

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RISE सम्मेलन ने गैर-महानगरीय नवाचार की प्रयोगशाला से बाजार तक पहुंच को कसौटी बनाया

6वां RISE सम्मेलन 6 सितंबर 2026 को कोलकाता के CSIR-IICB में आरंभ हुआ, ताकि अनुसंधान संस्थान, स्टार्टअप, उद्योग, निवेशक और सरकार जुड़ सकें। चार सहभागी CSIR प्रयोगशालाओं ने कार्यक्रम को Minerals, Medicine, Materials और Machines के ढांचे में आयोजित किया। आधिकारिक विज्ञप्ति में 8 समझौता ज्ञापन, 4 प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, 2 उत्पाद विमोचन, 1 सुविधा उद्घाटन और 8 परिचर्चाओं में 67 विशेषज्ञ दर्ज हैं। इसमें यह भी कहा गया कि भारत के 50-60% से अधिक स्टार्टअप महानगरों के बाहर हैं, इसलिए Tier-2 और Tier-3 नगर नवाचार के महत्वपूर्ण भूगोल हैं। कार्यक्रम ने इस भूगोल को बड़ी नीति चुनौती से जोड़ा: प्रयोगशाला ज्ञान बना सकती है, पर विस्तार के लिए उत्पाद सत्यापन, विनिर्माण क्षमता, वित्त, खरीद मार्ग, बौद्धिक संपदा की स्पष्टता, मानक और ग्राहक चाहिए। विज्ञप्ति ने उच्च जोखिम अनुसंधान और सहयोग के लिए ₹1 लाख करोड़ के Research, Development and Innovation Fund तथा अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन का उल्लेख किया। आयोजन की गणना संकेत है, परिणाम नहीं। वास्तविक कसौटी यह है कि समझौते लाइसेंस प्राप्त प्रौद्योगिकी, व्यवहार्य उद्यम, विश्वसनीय उत्पाद, रोजगार और सम्मेलन से बाहर सामाजिक उपयोग में बदलें।

यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS पेपर 3 में RISE विज्ञान नीति, स्टार्टअप, महत्वपूर्ण खनिज, चिकित्सा प्रौद्योगिकी, उन्नत सामग्री, विनिर्माण और क्षेत्रीय विकास को जोड़ता है। यह भारतीय प्रयोगशाला-से-बाजार अंतर और सार्वजनिक अनुसंधान संस्था की भूमिका समझाता है। आगत, मध्यवर्ती उत्पादन और अंतिम परिणाम अलग मापें; अनुदान और समझौता वाणिज्यीकरण नहीं हैं। धैर्यशील पूंजी, परीक्षण सुविधा, मानक, सार्वजनिक खरीद, उद्योग भागीदारी, IP नियम और क्षेत्रीय प्रतिभा नेटवर्क जोड़ें।

संभावित प्रश्न: भारत की नवाचार चुनौती अब केवल ज्ञान निर्माण नहीं, बल्कि उसे उपयोगी और विस्तार योग्य उत्पाद में विश्वसनीय रूप से बदलना है। क्षेत्रीय अनुसंधान-स्टार्टअप-उद्योग मंचों के संदर्भ में विश्लेषण कीजिए।

संबंधित अभ्यास प्रश्न: सार्वजनिक वित्तपोषित अनुसंधान को प्रयोगशाला प्रमाण से वाणिज्यिक स्तर तक जाने में कठिनाई क्यों होती है?; Tier-2 और Tier-3 नगर भारत के नवाचार पारितंत्र में स्थायी केंद्र कैसे बन सकते हैं?

मूल स्रोत

आज के पाँच प्रश्न

उत्तर देखने से पहले इन्हें हल करें। प्रत्येक व्याख्या बताती है कि आकर्षक गलत विकल्प क्यों विफल होता है।

  1. VVP और स्थानीय जैवविविधता शासन पर कौन-सी समान कसौटी लागू होती है?

    1. घोषणाओं की संख्या
    2. क्या अभिसरित संस्थाएं स्थानीय रूप से सत्यापित और टिकाऊ परिणाम बनाती हैं
    3. क्या स्थानीय भागीदारी हटती है
    4. क्या एक मंत्रालय हर निर्णय करता है
    उत्तर

    क्या अभिसरित संस्थाएं स्थानीय रूप से सत्यापित और टिकाऊ परिणाम बनाती हैं

    दोनों में व्यापक नीति को जवाबदेह स्थानीय परिणाम में बदलने के लिए अनेक संस्थाओं का समन्वय चाहिए।

  2. प्रजाति पुनर्बहाली का सही क्रम कौन-सा है?

    1. जागरूकता, समारोह, समाप्ति
    2. केवल बंदी जन्म
    3. खतरा हटाना, जरूरत पर प्रबंधित प्रजनन, सुरक्षित विमोचन और दीर्घ अनुश्रवण
    4. आवास आकलन बिना तुरंत विमोचन
    उत्तर

    खतरा हटाना, जरूरत पर प्रबंधित प्रजनन, सुरक्षित विमोचन और दीर्घ अनुश्रवण

    पुनर्बहाली खतरा घटाने से स्वावलंबी वन्य आबादी तक क्रमिक श्रृंखला मांगती है।

  3. प्रौद्योगिकी हस्तांतरण परिणाम को आयोजन उत्पादन से क्या अलग करता है?

    1. बड़ा स्थल
    2. उपयोगकर्ता वाला तैनात, सुरक्षित और विस्तार योग्य उत्पाद
    3. अधिक भाषण
    4. उपस्थिति पत्र
    उत्तर

    उपयोगकर्ता वाला तैनात, सुरक्षित और विस्तार योग्य उत्पाद

    सत्यापित अपनाव और मूल्य वास्तविक रूपांतरण दिखाते हैं, केवल गतिविधि नहीं।

  4. आंकड़ा-आधारित शासन में त्रुटि सुधार केंद्रीय क्यों है?

    1. सरकारी आंकड़ा गलत नहीं होता
    2. यह सुरक्षा को अनावश्यक बनाता है
    3. यह वैधानिक उद्देश्य सीमा हटाता है
    4. गलत अभिलेख अनुचित जांच करा सकता है, इसलिए नागरिक को सुधार मार्ग चाहिए
    उत्तर

    गलत अभिलेख अनुचित जांच करा सकता है, इसलिए नागरिक को सुधार मार्ग चाहिए

    सुधार और अपील आंकड़ा मिलान की गलती होने पर निष्पक्षता बचाते हैं।

  5. विश्व मानचित्र प्रक्षेप के बारे में कौन-सा कथन सही है?

    1. एक समतल प्रक्षेप हर गुण बचाता है
    2. सम-क्षेत्र प्रक्षेप राष्ट्रीय सीमा तय करता है
    3. प्रक्षेप में समझौते होते हैं और चुनाव उद्देश्य के अनुसार होना चाहिए
    4. Mercator सापेक्ष महाद्वीपीय क्षेत्रफल बचाता है
    उत्तर

    प्रक्षेप में समझौते होते हैं और चुनाव उद्देश्य के अनुसार होना चाहिए

    गोल सतह को समतल करने में विकृति होती है, इसलिए प्रक्षेप उपयोग के अनुसार चुना जाता है।

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