जीएस पेपर 2 — राजव्यवस्था, शासन, अंतर्राष्ट्रीय संबंध
इन विषयों को संस्थागत अभिकल्प से पढ़ें: कानूनी या कूटनीतिक मंच, उत्तरदायी पक्ष और औपचारिक भागीदारी से सत्यापित परिणाम तक का अंतर पहचानें।
7 सितंबर 2026 को फरीदाबाद में राष्ट्रीय महिला आयोग की कार्यशाला में लोकसभा अध्यक्ष ने लगभग 200 महिला विधायकों को संबोधित किया। इसमें 20 राज्यों और 2 केंद्रशासित प्रदेशों की भागीदारी थी। चर्चा ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण की संवैधानिक व्यवस्था को व्यापक शासन-सुधार से जोड़ा। प्रतिनिधित्व से सदन में महिलाओं की संख्या बढ़ सकती है, किंतु प्रभावी भागीदारी समिति दायित्व, शोध सहायता, प्रक्रिया की समझ, निर्वाचन क्षेत्र के संसाधन और भय-मुक्त राजनीतिक वातावरण पर भी निर्भर करती है। संविधान संशोधन संरचनात्मक अवसर देता है, पर समान प्रभाव या लैंगिक उत्तरदायी परिणाम अपने-आप सुनिश्चित नहीं करता। क्षमता निर्माण इसलिए महत्त्वपूर्ण है कि विधायक बजट की जांच करें, विभागों से प्रश्न पूछें, विधायी पहल तैयार करें और स्थानीय अनुभव को नीति से जोड़ें। अगला सुधार-प्रश्न यह है कि अधिक विविध महिला प्रतिनिधियों के लिए संस्थाएं कैसे तैयार हों। मूल्यांकन केवल सीटों की संख्या से नहीं, बल्कि बोलने के अवसर, नेतृत्व, समिति कार्य, उपस्थिति, नीति प्रभाव और वंचित महिलाओं की आवश्यकताओं के प्रति उत्तरदायित्व से होना चाहिए।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: सामान्य अध्ययन पेपर 2 के लिए यह विषय संवैधानिक व्यवस्था, संसद और राज्य विधानमंडल, वास्तविक समानता तथा संस्थागत सुधार को जोड़ता है। उत्तर में संख्यात्मक प्रतिनिधित्व और प्रभावी भागीदारी का अंतर स्पष्ट करें। दलों का आंतरिक लोकतंत्र, चुनावी परिस्थितियां, विधायी सहायता और सुरक्षित राजनीतिक वातावरण यह तय करते हैं कि आरक्षित प्रतिनिधित्व नीति को कितना बदलता है।
संभावित प्रश्न: संवैधानिक आरक्षण विधानमंडलों में महिलाओं की उपस्थिति बढ़ा सकता है, किंतु लैंगिक उत्तरदायी शासन के लिए संस्थागत क्षमता और वास्तविक भागीदारी आवश्यक है। चर्चा कीजिए।
संबंधित अभ्यास प्रश्न: भारत में महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को गहरा करने के लिए आवश्यक संवैधानिक और संस्थागत उपायों की चर्चा कीजिए।; विधानमंडल संख्यात्मक प्रतिनिधित्व को वास्तविक नीति-प्रभाव में कैसे बदल सकते हैं?
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भारतएआई मिशन और स्वीडन ने 7 सितंबर 2026 को इलेक्ट्रॉनिक्स निकेतन में स्वीडन-भारत व्यापार, निवेश और सहयोग ढांचे के अंतर्गत कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर द्विपक्षीय संवाद किया। चर्चा ने स्वीडन की औद्योगिक तथा विनिर्माण क्षमता को भारत के पैमाने, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, प्रतिभा और परीक्षण परिवेश से जोड़ा। भारतएआई ने संगणन क्षमता, आंकड़ा-संग्रह और प्रतिरूप, स्वदेशी तथा क्षेत्र-विशिष्ट तंत्र, अनुप्रयोग, कौशल, नवउद्यम वित्त और सुरक्षित तथा विश्वसनीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता के स्तंभ बताए। प्रतिभागियों ने आंकड़ा शासन, स्थानीय भंडारण, उत्तरदायी उपयोग और बाजार पहुंच भी देखी। संभावित अगले कदमों में प्रायोगिक परियोजना, परीक्षण मंच, सह-विकास और संस्थागत तथा व्यावसायिक साझेदारी शामिल हैं। रणनीतिक मूल्य तभी बनेगा जब व्यापक तकनीकी संबंध को स्पष्ट सार्वजनिक या औद्योगिक समस्याओं वाली परियोजनाओं में बदला जाए। सहयोग को वैध आंकड़ा हित और लोकतांत्रिक जवाबदेही बचानी चाहिए, साथ ही ऐसे असंगत नियमों से बचना चाहिए जो लागत बढ़ाएं या शोध रोकें। परीक्षण परिवेश व्यापक उपयोग से पहले दावों को मापने योग्य बनाते हैं।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: सामान्य अध्ययन पेपर 2 के लिए यह संवाद प्रौद्योगिकी कूटनीति और सीमित बहुपक्षीय आर्थिक सहयोग का उदाहरण है। सामान्य अध्ययन पेपर 3 में यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता, औद्योगिक नवाचार, आंकड़ा शासन और नवउद्यम पारितंत्र से जुड़ता है। अच्छे उत्तर में पारस्परिकता, मानक, बौद्धिक संपदा, संगणन और आंकड़ों तक पहुंच, सुरक्षा मूल्यांकन, कौशल तथा प्रयोग से व्यापक उपयोग तक के मार्ग का परीक्षण करें।
संभावित प्रश्न: प्रौद्योगिकी साझेदारी तभी रणनीतिक मूल्य बनाती है जब साझा सिद्धांत उत्तरदायी उपयोग और अंतर-संचालनीय संस्थाओं में बदलें। कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर भारत-स्वीडन सहयोग के संदर्भ में चर्चा कीजिए।
संबंधित अभ्यास प्रश्न: प्रौद्योगिकी कूटनीति रणनीतिक स्वायत्तता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग दोनों को कैसे बढ़ा सकती है?; सीमा-पार कृत्रिम बुद्धिमत्ता साझेदारी के लिए आवश्यक उत्तरदायी शासन दशाओं की चर्चा कीजिए।
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पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद की 28वीं बैठक 7 सितंबर 2026 को पणजी में हुई। इसमें गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र और दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव केंद्रशासित प्रदेश शामिल थे। क्षेत्रीय परिषदें राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के भाग III के अंतर्गत बनी वैधानिक परामर्शदात्री संस्थाएं हैं; वे संवैधानिक न्यायालय या बाध्यकारी अधिराष्ट्रीय प्राधिकरण नहीं हैं। आधिकारिक संबोधन के अनुसार 2004-14 में परिषद और स्थायी समिति की 25 बैठकें हुईं, जबकि 2014 से 71 बैठकें हुई हैं। इसमें 1,893 मुद्दों पर चर्चा और 1,445 के समाधान की बात भी कही गई। कार्यसूची में त्वरित विशेष न्यायालय, आपात प्रतिक्रिया संख्या 112, खाद्य सुरक्षा, आयुष्मान भारत, गांवों में बैंकिंग, रेल और पर्यावरण अनुमति, प्राथमिक कृषि ऋण समितियां, पोषण, विद्यालय छोड़ना, साइबर अपराध और डिजिटल अवसंरचना थे। यह विस्तार दिखाता है कि अंतर-सरकारी समन्वय प्रायः वैचारिक नहीं, परिचालन समस्या है। बैठक संख्या उपयोगी संकेत है, किंतु समाधान की गुणवत्ता, कार्यान्वयन और अनुवर्ती कार्रवाई सार्वजनिक मूल्य तय करते हैं।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: सामान्य अध्ययन पेपर 2 के लिए क्षेत्रीय परिषदें सहकारी संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध और अंतर-राज्य प्रशासनिक समन्वय का उदाहरण हैं। इन्हें अंतर-राज्य परिषद और न्यायनिर्णयन व्यवस्था से अलग समझें। इनका लाभ विभिन्न विभागों के बीच संरचित संवाद है; सीमा परामर्शदात्री अधिकार और निरंतर अनुवर्ती कार्रवाई पर निर्भरता है।
संभावित प्रश्न: सहकारी संघवाद कभी-कभार होने वाले बड़े समझौतों से कम और नियमित प्रशासनिक टकराव सुलझाने वाली संस्थाओं से अधिक टिकता है। क्षेत्रीय परिषदों की भूमिका और सीमाओं का परीक्षण कीजिए।
संबंधित अभ्यास प्रश्न: भारत में सहकारी संघवाद को मजबूत करने में अंतर-सरकारी मंचों की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।; अंतर-राज्य विवादों में परामर्शदात्री संघीय संस्थाओं और न्यायनिर्णयन तंत्रों का अंतर बताइए।
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जीएस पेपर 3 — अर्थव्यवस्था, पर्यावरण, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, सुरक्षा
प्रौद्योगिकी, कृषि, रक्षा और पर्यावरण को राज्य क्षमता से जोड़ें। घोषित साधन को अपनाने, परिचालन तैयारी, लचीलापन और मापने योग्य सार्वजनिक मूल्य से अलग करें।
7 सितंबर 2026 को केंद्रीय कृषि मंत्री ने राज्य सरकारों के साथ कृषि विज्ञान केंद्रों को मजबूत करने के उपायों की समीक्षा की। योजना में मार्च 2027 तक 300 प्राथमिकता वाले केंद्रों का उन्नयन और दिसंबर 2028 तक सभी केंद्रों में उद्भवन-सह-कौशल केंद्र बनाना शामिल है। समीक्षा में 2026-27 के दौरान दलहन और तिलहन के समूह अग्रिम पंक्ति प्रदर्शनों पर भी चर्चा हुई। 24 राज्यों के 353 केंद्र जिलों में लक्ष्य 12,349 हेक्टेयर था और सूचित कवरेज 9,750 हेक्टेयर तक पहुंचा। इन आंकड़ों का महत्व तभी है जब प्रदर्शन स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल खेती अपनाने में बदलें। कृषि विज्ञान केंद्र विज्ञान और किसान के बीच अंतिम छोर की संस्था हैं, किंतु उनकी प्रभावशीलता कर्मचारी, प्रयोगशाला, क्षेत्रीय आवागमन, राज्य समन्वय, समय पर धन और खेत से शोध संस्थान तक प्रतिपुष्टि पर निर्भर है। साझा पोर्टल निगरानी सुधार सकता है, पर क्षेत्रीय निदान का स्थान नहीं ले सकता। उद्भवन सुविधा तकनीकी सलाह को प्रसंस्करण, उद्यम और बाजार तैयारी से जोड़ सकती है, बशर्ते छोटे किसान, महिला किसान और पट्टेदार बाहर न रहें।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: सामान्य अध्ययन पेपर 3 के लिए कृषि विज्ञान केंद्र कृषि प्रसार, प्रौद्योगिकी प्रसार, फसल विविधीकरण और कार्यान्वयन में सहकारी संघवाद का उदाहरण हैं। प्रदर्शन से अपनाने, उत्पादकता, जोखिम में कमी और आय तक की श्रृंखला का विश्लेषण करें। उपाय स्थानीय कृषि-जलवायु के अनुरूप हों और मूल्यांकन केवल गतिविधि या क्षेत्र नहीं, किसान व्यवहार, समावेशन तथा लचीलापन भी मापे।
संभावित प्रश्न: कृषि प्रसार तब सफल होता है जब वैज्ञानिक ज्ञान को स्थानीय संस्थाओं के माध्यम से अनुकूलित, प्रदर्शित और समर्थित किया जाए। कृषि विज्ञान केंद्रों को सुदृढ़ करने के प्रस्ताव का मूल्यांकन कीजिए।
संबंधित अभ्यास प्रश्न: कृषि उत्पादकता और लचीलापन बढ़ाने में कृषि प्रसार की भूमिका समझाइए।; कृषि प्रौद्योगिकी अपनाने के लिए प्रदर्शन और किसान प्रतिपुष्टि क्यों महत्त्वपूर्ण हैं?
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विदेश व्यापार महानिदेशालय ने 7 सितंबर 2026 को उद्गम प्रमाणपत्रों के लिए खुले अनुप्रयोग प्रोग्रामन अंतरापृष्ठ घोषित किए। निर्यातक अपने उद्यम-संसाधन या लेखा तंत्र को अधिमान्य और गैर-अधिमान्य प्रमाणपत्र मंच से सीधे जोड़ सकते हैं। व्यवस्था में तीन कार्य हैं: प्रमाणीकरण संकेत बनाना, प्रमाणपत्र आवेदन देना और प्रमाणपत्र सत्यापन करना। लेन-देन बही प्रसंस्करण की स्थिति दिखाती है। बताए गए तकनीकी सुरक्षा उपायों में SHA-256 के साथ RSA से हस्ताक्षरित अनुरोध, 2048-बिट प्रमाणपत्र, X.509 मानक, PBKDF2 से परिवर्ती लवण, इंटरनेट पते की श्वेतसूची और 60 मिनट के संकेत शामिल हैं। व्यापार सूचना 25/2026-27 एकीकरण समझाती है। यह सुधार बार-बार आंकड़े भरने, त्रुटि और प्रसंस्करण बाधा को घटा सकता है, विशेषकर नियमित निर्यात करने वाली फर्मों के लिए। किंतु खुला अंतरापृष्ठ अनियंत्रित पहुंच नहीं है। इसका सार्वजनिक मूल्य प्रमाणीकरण, लेखा-परीक्षण चिह्न, साझा आंकड़ा मानक, असफल आवेदन की स्पष्ट जवाबदेही और सीमित सॉफ्टवेयर क्षमता वाले छोटे निर्यातकों के लिए सहायता पर निर्भर होगा।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: सामान्य अध्ययन पेपर 3 के लिए यह पहल निर्यात सुविधा, लेन-देन लागत, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और साइबर सुरक्षा को जोड़ती है। सामान्य अध्ययन पेपर 2 में यह प्रक्रिया-पुनर्रचना और उत्तरदायी ई-शासन का उदाहरण है। उत्तर में प्रपत्र के डिजिटलीकरण और अंतर-संचालनीय तंत्र का अंतर बताएं तथा समावेशन, सुरक्षा, शिकायत निवारण, उपलब्धता और अनुपालन बोझ में वास्तविक कमी को जांचें।
संभावित प्रश्न: अंतर-संचालनीयता व्यापार अनुपालन की बाधा घटा सकती है, किंतु इससे सुरक्षा, समावेशन और जवाबदेही की नई आवश्यकताएं भी बनती हैं। उद्गम प्रमाणपत्रों के लिए महानिदेशालय की खुली अंतरापृष्ठ व्यवस्था के संदर्भ में परीक्षण कीजिए।
संबंधित अभ्यास प्रश्न: डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना भारतीय निर्यातकों की लेन-देन लागत कैसे घटा सकती है?; सार्वजनिक डिजिटल तंत्र में अंतर-संचालनीयता और साइबर सुरक्षा के संतुलन का परीक्षण कीजिए।
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रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 7 सितंबर 2026 को लगभग ₹1,10,000 करोड़ के प्रस्तावों के लिए आवश्यकता की स्वीकृति दी। यह सैद्धांतिक प्रशासनिक अनुमति है जो अधिग्रहण प्रक्रिया आरंभ करती है; यह हस्ताक्षरित अनुबंध या पूरी अनुमानित राशि का तत्काल व्यय नहीं है। प्रस्ताव कई सेनाओं से जुड़े हैं। थल सेना में रासायनिक, जैविक, विकिरण और नाभिकीय टोही वाहन, भारी गतिशीलता वाहन, सुरंग बिछाने की प्रणाली, उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर, सुरंग-रोधी टैंक और सर्वत्र सेतु प्रणाली शामिल हैं। नौसेना के प्रस्तावों में अरुध्र रडार तथा आयात निर्भरता घटाने के उद्देश्य से समुद्री गैस टरबाइन का अभिकल्प, विकास और खरीद शामिल है। वायु सेना में क्षमता उन्नयन, अवरोधक और रक्षा उपकरण क्षेत्रीय आपूर्ति तथा लेखा संगणकीकरण प्रणाली के लिए रेडियो-आवृत्ति पहचान शामिल है। विज्ञप्ति के अनुसार प्रस्तावित खरीद मूल्य का लगभग 98% भारतीय उद्योग से लिया जाएगा। कसौटी यह है कि स्वीकृति पारदर्शी प्रतिस्पर्धा, परीक्षण और जीवनचक्र सहायता के साथ समय पर टिकाऊ सैन्य क्षमता बने।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: सामान्य अध्ययन पेपर 3 के लिए निर्णय रक्षा आधुनिकीकरण, स्वदेशीकरण, रणनीतिक स्वायत्तता और खरीद शासन को जोड़ता है। उत्तर में स्वीकृति, निविदा, परीक्षण, अनुबंध, आपूर्ति और परिचालन तैयारी के चरण अलग करें। घरेलू खरीद तभी मूल्यवान है जब वह केवल आयातित पुर्जों का संयोजन न होकर अभिकल्प ज्ञान, सुरक्षित आपूर्ति-श्रृंखला, रखरखाव क्षमता और निर्यात प्रतिस्पर्धा बनाए।
संभावित प्रश्न: आवश्यकता की स्वीकृति रक्षा अधिग्रहण का केवल पहला द्वार है। भारत खरीद अनुमोदनों को समयबद्ध, स्वदेशी और रखरखाव योग्य सैन्य क्षमता में कैसे बदल सकता है? समझाइए।
संबंधित अभ्यास प्रश्न: रक्षा स्वदेशीकरण और रणनीतिक स्वायत्तता के संबंध की चर्चा कीजिए।; रक्षा खरीद का मूल्यांकन पूरे क्षमता जीवनचक्र पर क्यों होना चाहिए?
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2026 के पांचवें स्वच्छ वायु सर्वेक्षण ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के सभी 130 शहरों का तीन जनसंख्या समूहों में आकलन किया। प्रक्रिया में नगर का स्व-मूल्यांकन, राज्य की निगरानी, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का मूल्यांकन और स्वतंत्र क्षेत्रीय सत्यापन शामिल है; 10 श्रेष्ठ प्रदर्शन वाले शहरों को मान्यता मिलती है। प्राण पोर्टल 24 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 130 शहरों की कार्रवाई देखता है तथा प्रदर्शन-संबद्ध अनुदान ₹16,425 करोड़ है। विज्ञप्ति के अनुसार 2025-26 की 2017-18 आधार अवधि से तुलना में 108 शहरों में कणीय पदार्थ घटा, 72 ने 20% से अधिक कमी, 26 ने 40% से अधिक कमी और 14 ने दस माइक्रोमीटर या उससे कम आकार के कणीय पदार्थ के राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक प्राप्त किए। श्रेष्ठ व्यवहार संकलन उपयोगी उपाय फैलाने का प्रयास है। श्रेणीकरण प्रतिस्पर्धा और दृश्यता बढ़ा सकता है, किंतु वायु गुणवत्ता मौसम, क्षेत्रीय प्रदूषण प्रवाह, निगरानी की गुणवत्ता तथा परिवहन, धूल, उद्योग, अपशिष्ट और घरेलू ईंधन पर समन्वित कार्रवाई से प्रभावित होती है। इसलिए सत्यापन और तुलनीय आंकड़े केंद्रीय हैं।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: सामान्य अध्ययन पेपर 3 के लिए सर्वेक्षण वायु प्रदूषण, पर्यावरण शासन, शहरीकरण और वित्तीय प्रोत्साहन को जोड़ता है। यह सामान्य अध्ययन पेपर 2 में मापन, अंतर-सरकारी समन्वय और जवाबदेही का उदाहरण भी है। उत्तर में उत्सर्जन कार्रवाई और परिवेशी सांद्रता परिणाम अलग करें तथा समझाएं कि वायु-क्षेत्र प्रायः नगर और राज्य सीमा पार करते हैं।
संभावित प्रश्न: नगर श्रेणीकरण स्वच्छ-वायु कार्यक्रम में जवाबदेही तभी सुधार सकता है जब संकेतक तुलनीय, स्वतंत्र रूप से सत्यापित और वायु-क्षेत्र आधारित कार्रवाई से जुड़े हों। विश्लेषण कीजिए।
संबंधित अभ्यास प्रश्न: नगरीय वायु प्रदूषण के लिए नगर सीमा से बाहर समन्वय क्यों आवश्यक है?; पर्यावरण शासन में प्रदर्शन-संबद्ध अनुदान और सार्वजनिक श्रेणीकरण के उपयोग का मूल्यांकन कीजिए।
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