कर्नाटक Basava Jayanti पर नए Anubhava Mantapa का उद्घाटन करेगा
कर्नाटक Basava Jayanti पर नए Anubhava Mantapa का उद्घाटन करेगा, जो 12वीं शताब्दी के समाज सुधारक Basavanna का स्मरण कराता है। Anubhava Mantapa शरण आंदोलन से जुड़ी एक प्रारंभिक लोकतांत्रिक संस्था थी, जो समतावादी आदर्शों, वचन साहित्य और सामाजिक समानता को बढ़ावा देती थी। यह आयोजन भक्ति आंदोलन के सांस्कृतिक महत्त्व और उसकी जाति-विरोधी विरासत को पुष्ट करता है। इसके सांस्कृतिक पर्यटन और कर्नाटक की सुधारवादी विरासत के संरक्षण पर भी प्रभाव हैं।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS-1 भारतीय इतिहास और संस्कृति (भक्ति आंदोलन, सामाजिक सुधार)। यह NCERT इतिहास और Nitin Singhania की Art & Culture में भक्ति संतों, Basavanna और शरण आंदोलन से जुड़ता है। Anubhava Mantapa को भारतीय परंपरा में एक आद्य-लोकतांत्रिक संस्था के रूप में अक्सर उद्धृत किया जाता है, जिससे यह प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों के लिए महत्त्वपूर्ण है।
संभावित प्रश्न: Anubhava Mantapa का उद्घाटन केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं है; यह बारहवीं शताब्दी के सामाजिक लोकतंत्र के प्रयोग को आज की स्मृति में जीवित करता है। क्या हम इस विरासत को केवल पर्यटन तक सीमित रखेंगे या इसके समतावादी आदर्शों को भी पढ़ेंगे?
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