जीएस पेपर 2 — राजव्यवस्था, शासन, अंतर्राष्ट्रीय संबंध
GS प्रश्नपत्र 2 की कहानियों को प्रशासनिक न्याय और सामाजिक क्षेत्र वितरण से पढ़ें। अधिकार-धारक, सेवा शृंखला, शिकायत अथवा जवाबदेही तंत्र और उस साक्ष्य की पहचान करें जो कार्यक्रम के पैमाने को नागरिक के वास्तविक परिणाम से अलग करता है।
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन ने 25 अप्रैल 2025 से 31 जुलाई 2026 के बीच 35 क्षेत्रों की 1,66,189 धनवापसी संबंधी शिकायतों पर कार्रवाई करके ₹105 करोड़ से अधिक की धनवापसी में सहायता की। ई-वाणिज्य में 1,00,466 शिकायतों के माध्यम से ₹74 करोड़ से अधिक और यात्रा तथा पर्यटन क्षेत्र में ₹10 करोड़ से अधिक की धनवापसी कराई गई। हेल्पलाइन पूर्व-मुकदमा तंत्र के रूप में काम करती है। शिकायतें निर्धारित समय-सीमा में भागीदार कंपनियों को डिजिटल रूप से भेजी जाती हैं, उनकी निगरानी होती है और हर उपभोक्ता को उपभोक्ता आयोग जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। 17 भाषाओं में टोल-फ्री नंबर 1915, WhatsApp या SMS, INGRAM पोर्टल, ईमेल, मोबाइल और वेब अनुप्रयोग तथा UMANG से पहुँच उपलब्ध है। आँकड़े डिजिटल बाजार में कम लागत और बहु-माध्यम निवारण का महत्त्व दिखाते हैं, पर सार्वभौमिक गुणवत्ता सिद्ध नहीं करते। प्रतिक्रिया समय, दोहराए गए उल्लंघन, अनसुलझे मामले, कंपनी-वार अनुपालन और कमजोर उपभोक्ताओं की वास्तविक पहुँच भी मापी जानी चाहिए।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS प्रश्नपत्र 2 में यह नागरिक-केंद्रित शासन और न्याय तक पहुँच का उदाहरण है। उत्तर में हेल्पलाइन को व्यापक उपभोक्ता संरक्षण व्यवस्था में रखना, सुविधा और न्यायनिर्णयन का अंतर स्पष्ट करना तथा पारदर्शी सेवा मानक, उपभोक्ता आयोग तक बढ़ोतरी, डेटा संरक्षण और बहुभाषी समावेशन सुझाना चाहिए।
संभावित प्रश्न: डिजिटल पूर्व-मुकदमा शिकायत तंत्र उपभोक्ता न्याय की पहुँच बढ़ा सकता है, किंतु न्यायनिर्णयन का स्थान नहीं ले सकता। प्रभावी राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के अभिकल्प सिद्धांतों की चर्चा कीजिए।
संबंधित अभ्यास प्रश्न: डिजिटल पहुँच से वंचित नागरिकों को बाहर किए बिना प्रौद्योगिकी शिकायत निवारण कैसे सुधार सकती है?; न्यायनिर्णायक संस्थाओं का भार घटाने में वैकल्पिक विवाद निवारण की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
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महिला और बाल विकास मंत्रालय ने वाराणसी में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ किया, जो 9 सितंबर से 8 अक्टूबर 2026 तक 'हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी' विषय के अंतर्गत मनाया जाएगा। अभियान में विविध आहार, पर्याप्त प्रोटीन, ताजा गर्म पका भोजन, आंगनवाड़ी प्रबंधन समितियों और मेनू बोर्ड के माध्यम से सामुदायिक स्वामित्व, पोषण तथा आरंभिक उद्दीपन और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के 10 वर्ष प्रमुख हैं। मंत्रालय के अनुसार 14 लाख से अधिक आंगनवाड़ी केंद्र 7.5 करोड़ से अधिक बच्चों, 1.10 करोड़ गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं तथा लगभग 16 लाख किशोरियों को सेवा देते हैं। 2 लाख केंद्रों को सक्षम आंगनवाड़ी बनाया जा रहा है। PMMVY के तहत 4.65 करोड़ से अधिक माताओं को ₹21,000 करोड़ से अधिक हस्तांतरित हुए हैं। यह पैमाना दिखाता है, पर नीति की कसौटी आहार, मातृ देखभाल, वृद्धि निगरानी, बाल विकास और समयबद्ध रेफरल में सुधार है। समुदाय की भागीदारी विश्वसनीय सार्वजनिक वित्त और कार्यकर्ता क्षमता की पूरक होनी चाहिए, विकल्प नहीं।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS प्रश्नपत्र 2 के लिए यह पोषण, मातृ और बाल स्वास्थ्य, कल्याण वितरण, स्थानीय भागीदारी और महिला-केंद्रित सामाजिक नीति को जोड़ता है। उत्तर में अभियान गतिविधि और परिणाम अलग करें, जीवन-चक्र दृष्टि अपनाएँ तथा स्वास्थ्य, स्वच्छता, खाद्य, प्रारंभिक शिक्षा, पंचायत और स्वयं सहायता समूहों के अभिसरण का परीक्षण करें।
संभावित प्रश्न: भारत की पोषण चुनौती के लिए केवल जागरूकता अभियान नहीं, बल्कि जवाबदेह आंगनवाड़ी सेवाएँ और परिवार स्तर पर आहार परिवर्तन आवश्यक हैं। पोषण माह के संदर्भ में परीक्षण कीजिए।
संबंधित अभ्यास प्रश्न: अनेक खाद्य और पोषण कार्यक्रमों के बावजूद कुपोषण क्यों बना रहता है?; मातृ और बाल पोषण परिणाम सुधारने में सामुदायिक संस्थाओं की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
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जीएस पेपर 3 — अर्थव्यवस्था, पर्यावरण, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, सुरक्षा
GS प्रश्नपत्र 3 की कहानियों को रणनीतिक क्षमता और कार्यान्वयन से पढ़ें। घोषणा को परिचालन क्षमता से अलग करें, नियामक अथवा परियोजना शृंखला बनाएँ, सुरक्षा और पर्यावरण दावों की जाँच करें तथा सार्वजनिक मूल्य सिद्ध करने वाला मापनीय परिणाम पूछें।
भारत ने उत्तरी कैरोलिना में G20 नवाचार मंत्रिस्तरीय बैठक के संदर्भ में घोषित 6G नेतृत्व और सुरक्षा संबंधी कार्रवाई के आह्वान का समर्थन किया। पहल अगली पीढ़ी के नेटवर्क को खुलेपन, परस्पर-संचालनीयता, सुरक्षा, प्रत्यास्थता, संसाधन दक्षता और नवाचार-आधारित प्रतिस्पर्धा से जोड़ती है। दूरसंचार विभाग सरकारी संस्थाओं, उद्योग, शिक्षा जगत और अन्य हितधारकों के साथ अनुवर्ती कार्य का समन्वय करेगा। भारत ने वैश्विक 6G मानकों और पेटेंट में 10 प्रतिशत योगदान का लक्ष्य भी रखा है, जो प्रौद्योगिकी अपनाने वाले देश से नियम और बौद्धिक संपदा गढ़ने वाले देश की ओर बढ़ने की आकांक्षा दिखाता है। संचार मानक तय करते हैं कि प्रणालियाँ आपस में कैसे काम करेंगी, आपूर्ति-शृंखला जोखिम कैसे संभाले जाएँगे और छोटे उद्यमों को प्रतिस्पर्धा का अवसर मिलेगा या नहीं। यह समर्थन स्वयं कोई तैनाती या बाध्यकारी संधि नहीं है। परिणाम अनुसंधान, पारदर्शी स्पेक्ट्रम नीति, अंतरराष्ट्रीय मानक संस्थाओं में भागीदारी, आरंभ से सुरक्षित अभियांत्रिकी और किफायती उत्पादों में अनुसंधान बदलने की घरेलू क्षमता पर निर्भर होगा।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS प्रश्नपत्र 3 के लिए यह विज्ञान और प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, महत्त्वपूर्ण अवसंरचना तथा औद्योगिक नीति को जोड़ता है। उत्तर में कूटनीतिक समर्थन और वास्तविक मानक-निर्माण प्रभाव को अलग करना चाहिए तथा अनुसंधान वित्त, पेटेंट, परीक्षण क्षमता, स्पेक्ट्रम शासन और विश्वसनीय आपूर्ति-शृंखला के संयुक्त महत्त्व का परीक्षण करना चाहिए।
संभावित प्रश्न: 6G मानकों को आकार देने की भारत की आकांक्षा के लिए केवल तकनीकी अनुसंधान पर्याप्त नहीं है। विश्वसनीय मानक-निर्माता बनने हेतु आवश्यक संस्थागत और सुरक्षा क्षमताओं का परीक्षण कीजिए।
संबंधित अभ्यास प्रश्न: अंतरराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी मानक रणनीतिक स्वायत्तता और बाजार प्रतिस्पर्धा को कैसे प्रभावित करते हैं?; अगली पीढ़ी के संचार नेटवर्क की सुरक्षा के लिए आवश्यक शासन व्यवस्था की चर्चा कीजिए।
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वित्तीय आसूचना इकाई-भारत ने धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 की धारा 13 के अंतर्गत 15 आभासी डिजिटल परिसंपत्ति सेवा प्रदाताओं को अनुपालन न करने के नोटिस दिए। FIU-IND ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 और मध्यस्थ नियमों के अंतर्गत नोडल अधिकारी की भूमिका का उपयोग करते हुए उन अनुप्रयोगों या URL को हटाने के नोटिस भी दिए जो भारतीय धन शोधन-रोधी आवश्यकताओं का पालन किए बिना अवैध रूप से संचालित पाए गए। आभासी डिजिटल परिसंपत्ति सेवा प्रदाताओं को मार्च 2023 में भारत के धन शोधन-रोधी और आतंक वित्तपोषण-रोधी ढाँचे में लाया गया था। भारतीय उपयोगकर्ताओं को सेवा देने वाले प्रदाताओं को FIU-IND में रिपोर्टिंग संस्था के रूप में पंजीकरण तथा रिपोर्टिंग, अभिलेख-रखरखाव और संबद्ध दायित्व पूरे करने होते हैं, चाहे वे भारत में हों या विदेश में। यह गतिविधि-आधारित नियमन है, जिसमें दायित्व भौतिक पते के बजाय भारत में दी जाने वाली सेवा से उत्पन्न होते हैं। साथ ही सीमा-पार प्रवर्तन, उचित प्रक्रिया, उपभोक्ता जागरूकता और विभिन्न नियामक संस्थाओं के समन्वय की चुनौती बनी रहती है।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS प्रश्नपत्र 3 में यह धन शोधन, साइबर-सक्षम वित्त, आंतरिक सुरक्षा और उभरते बाजारों के नियमन से जुड़ा है। उत्तर में AML/CFT पंजीकरण को क्रिप्टो उत्पाद की सामान्य सरकारी स्वीकृति से अलग करना चाहिए तथा विदेश-स्थित मंचों पर अधिकार-क्षेत्र, समीक्षा योग्य अवरोध, लाभकारी स्वामित्व और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का विश्लेषण करना चाहिए।
संभावित प्रश्न: गतिविधि-आधारित नियमन विदेश-स्थित डिजिटल परिसंपत्ति मंचों तक धन शोधन-रोधी दायित्व पहुँचा सकता है, किंतु प्रवर्तन कठिन बना रहता है। भारत के नियामक विकल्पों और सुरक्षा उपायों का विश्लेषण कीजिए।
संबंधित अभ्यास प्रश्न: आभासी परिसंपत्तियाँ धन शोधन और आतंक वित्तपोषण के विरुद्ध प्रवर्तन को कैसे जटिल बनाती हैं?; सीमा-पार डिजिटल वित्तीय सेवाओं के नियमन हेतु किस प्रकार का संस्थागत समन्वय आवश्यक है?
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वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में निर्माण और ध्वस्तीकरण परियोजनाओं हेतु वैधानिक निर्देशों के पालन पर हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की समीक्षा की। 500 वर्ग मीटर या अधिक क्षेत्र वाली परियोजनाओं को राज्य अथवा दिल्ली के वेब पोर्टल पर पंजीकरण कराना और कार्यशील वीडियो निगरानी प्रणाली लगाना आवश्यक है, ताकि धूल नियंत्रण उपाय दूर से जाँचे जा सकें। CAQM ने बताया कि 2024 से नमूना-आधारित निगरानी में अधूरे कैमरा लिंक, गलत प्रवेश विवरण, मोबाइल अनुप्रयोग स्थापित करने की माँग करने वाले लिंक, निष्क्रिय लिंक और बंद कैमरे मिले। बैठक ने राज्य बोर्ड से स्पष्टीकरण माँगा और स्पष्ट किया कि पोर्टल बन जाना नियामक दृश्यता नहीं है। प्रभावी अनुपालन के लिए उपयोगी डेटा, कार्यशील उपकरण, प्रमाणित पहुँच, क्षेत्रीय निरीक्षण और लगातार विफलता पर परिणाम आवश्यक हैं। दूरस्थ निगरानी कवरेज बढ़ा सकती है, किंतु भौतिक निरीक्षण का विकल्प नहीं है। यह कार्यान्वयन संघवाद का उदाहरण है, जिसमें क्षेत्रीय वैधानिक निकाय निर्देश देता है और राज्य संस्था तथा परियोजना संचालक वास्तविक परिणाम तय करते हैं।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS प्रश्नपत्र 3 में यह वायु प्रदूषण, निर्माण शासन और पर्यावरण नियमन से जुड़ा है; इसका GS प्रश्नपत्र 2 संस्थागत आयाम भी है। उत्तर में कानूनी निर्देश से राज्य बोर्ड और स्थल व्यवहार तक उत्तरदायित्व शृंखला दिखानी चाहिए तथा कैमरे को पर्याप्त प्रमाण माने बिना परस्पर-संचालनीय पोर्टल, डेटा लेखा-परीक्षण, यादृच्छिक निरीक्षण, स्तरित दंड और सार्वजनिक प्रकटीकरण सुझाना चाहिए।
संभावित प्रश्न: डिजिटल निगरानी पर्यावरणीय पर्यवेक्षण बढ़ा सकती है, किंतु खराब डेटा और कमजोर क्षेत्रीय प्रवर्तन इसे अनुपालन की रस्म बना सकते हैं। NCR में निर्माण धूल नियंत्रण के संदर्भ में विश्लेषण कीजिए।
संबंधित अभ्यास प्रश्न: सुदृढ़ कानूनी अधिदेश के बावजूद पर्यावरण नियम अक्सर कार्यान्वयन स्तर पर क्यों विफल होते हैं?; राज्य सीमाओं के पार वायु गुणवत्ता शासन के समन्वय में क्षेत्रीय संस्थाओं की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
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आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के 17 जिलों में पाँच रेल बहुपथ परियोजनाओं को स्वीकृति दी। परियोजनाएँ रेल नेटवर्क में लगभग 540 किलोमीटर जोड़ेंगी, इनकी अनुमानित लागत ₹10,021 करोड़ है और इन्हें 2029-30 तक पूरा करने की योजना है। पैकेज में अरक्कोनम-रेनिगुंटा, व्हाइटफील्ड-बंगारपेट, होसुर-ओमलूर, सलेम-करूर-दिंडीगुल और सिकंदराबाद-काजीपेट गलियारे शामिल हैं। सरकार का अनुमान है कि क्षमता वृद्धि से कोयला, सीमेंट, इस्पात, कंटेनर, वाहन, खाद्यान्न, पेट्रोलियम उत्पाद और उर्वरक सहित प्रति वर्ष 47 मिलियन टन अतिरिक्त माल यातायात संभव होगा। रेल की ओर यातायात स्थानांतरण से तेल उपयोग और कार्बन उत्सर्जन घटने का भी अनुमान है। ये परियोजना चरण के अनुमान हैं, सुनिश्चित परिणाम नहीं। सार्वजनिक मूल्य समयबद्ध भूमि और कार्य प्रबंधन, सुरक्षा, जंक्शन अवरोध हटाने, नेटवर्क एकीकरण, माल टर्मिनल पहुँच, पारदर्शी लागत नियंत्रण और यात्री विश्वसनीयता में सुधार पर निर्भर करेगा।
यूपीएससी की दृष्टि से क्यों: GS प्रश्नपत्र 3 के लिए यह अवसंरचना, रसद, क्षेत्रीय विकास और निम्न-कार्बन परिवहन का विषय है। उत्तर में मार्ग क्षमता और वास्तविक यातायात अलग करें, परियोजना मूल्यांकन तथा नेटवर्क प्रभाव समझें और पर्यावरण लाभ का परीक्षण वास्तविक परिवहन साधन परिवर्तन, निर्माण प्रभाव और माल संरचना के आधार पर करें।
संभावित प्रश्न: रेल बहुपथ निवेश रसद बाधा तभी घटा सकता है जब गलियारा क्षमता टर्मिनल, सुरक्षा और अंतिम छोर संपर्क से जुड़ी हो। पूँजी स्वीकृति को सार्वजनिक मूल्य में बदलने की शासन प्राथमिकताओं पर चर्चा कीजिए।
संबंधित अभ्यास प्रश्न: रेल निवेश रसद प्रतिस्पर्धा और संतुलित क्षेत्रीय विकास को कैसे सुधार सकता है?; अवसंरचना परिणाम केवल परियोजना पूर्णता के बजाय नेटवर्क एकीकरण पर क्यों निर्भर करते हैं?
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